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Thursday, March 12, 2026, 9:50 am

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जांगिड़ भवन में फागोत्सव की धूम: रंग, रस और राग में झूमी मधुबन सखी मंडली

होली के स्वागत में भजन, नृत्य और फूलों की होली से सजा उल्लास का अद्भुत संगम

राखी पुरोहित. जोधपुर 

जोधपुर में होली के आगमन की आहट के साथ ही फागोत्सव की रंगत भी चरम पर पहुंचने लगी है। इसी कड़ी में बुधवार को जांगिड़ भवन में मधुबन सखी मंडली की ओर से भव्य फागोत्सव का आयोजन किया गया। पूरा सभागार रंग-बिरंगे परिधानों, मधुर फाग गीतों और उत्साह से भरे माहौल से सराबोर नजर आया। महिलाओं ने पारंपरिक होली गीतों पर जमकर मस्ती की और भक्ति-रस से ओतप्रोत वातावरण में आनंद की वर्षा कर दी।

कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत दीप प्रज्वलन और भगवान के समक्ष वंदना से हुई। इसके बाद भजन-कीर्तन और सत्संग का दौर चला, जिसमें महिलाओं ने होली के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। फागोत्सव केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, सौहार्द और आपसी भाईचारे का प्रतीक है—इस भावना को मंडली की महिलाओं ने गीतों और प्रवचनों के माध्यम से आत्मसात कराया।

भजन-कीर्तन में बिखरा श्रद्धा का रंग

महिलाओं ने “रंग बरसे भीगे चुनर वाली” जैसे पारंपरिक फाग गीतों के साथ-साथ कृष्ण-राधा के प्रेम से जुड़े भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। ढोलक और मंजीरे की थाप पर जब सुरों की गूंज उठी तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। सुमन शर्मा, श्वेता शर्मा और मधु शर्मा ने मिलकर सामूहिक भजन प्रस्तुत किया, जिस पर उपस्थित महिलाओं ने तालियां बजाकर उत्साह बढ़ाया।

ऋषिका भारद्वाज और नीतू सिंह ने होली के सांस्कृतिक महत्व पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि फागोत्सव हमें जीवन के रंगों को स्वीकारने और रिश्तों में मिठास घोलने की प्रेरणा देता है।

नृत्य और धमाल से गूंजा सभागार

भजन-कीर्तन के बाद नृत्य का दौर शुरू हुआ। रंग-बिरंगी साड़ियों और पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने होली के गीतों पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। गोविंद कंवर, सुरेश कंवर और मनोज कंवर ने भी उत्साहपूर्वक भाग लेकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

राखी पुरोहित के संचालन में कार्यक्रम व्यवस्थित और रोचक बना रहा। उन्होंने समय-समय पर रोचक टिप्पणियों और हास्य-व्यंग्य के माध्यम से माहौल को जीवंत बनाए रखा। डिंपल, विधि और अन्य प्रतिभागियों ने भी समूह नृत्य में भाग लेकर रंगत को और गहरा किया।

फूलों की होली: प्रेम और सौहार्द का प्रतीक

फागोत्सव का सबसे आकर्षक क्षण रहा फूलों की होली। जैसे ही महिलाओं ने एक-दूसरे पर पुष्प वर्षा शुरू की, पूरा हॉल रंगीन पंखुड़ियों से ढंक गया। यह दृश्य मानो वृंदावन की होली की झलक प्रस्तुत कर रहा था। गुलाब और गेंदा के फूलों की खुशबू से वातावरण महक उठा और हर चेहरा मुस्कान से खिल गया।

भव्यांश, लव्यांश, दिव्यांश और शिवांश ने भी उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में भाग लिया और फूलों की होली का आनंद उठाया। बच्चों की खिलखिलाहट और महिलाओं की उमंग ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।

सामाजिक एकता का संदेश

मधुबन सखी मंडली का यह आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं था। यह महिलाओं के सशक्तिकरण, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का भी प्रतीक रहा। सत्संग के दौरान यह संदेश दिया गया कि होली का असली रंग मन की कड़वाहट मिटाकर प्रेम और सद्भाव फैलाने में है।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को अल्पहार और सॉफ्ट ड्रिंक्स वितरित किए गए। आपसी संवाद और हंसी-ठिठोली के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, लेकिन उत्साह और उल्लास की यादें सभी के मन में लंबे समय तक बनी रहेंगी।

रंगों के स्वागत में उमड़ा उत्साह

फागोत्सव ने यह सिद्ध कर दिया कि होली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है। जांगिड़ भवन में सजी यह रंगीन शाम आने वाले होली पर्व के लिए एक शानदार प्रस्तावना बन गई। मधुबन सखी मंडली की महिलाओं ने अपनी ऊर्जा, समर्पण और उत्साह से यह संदेश दिया कि जब दिलों में प्रेम का रंग हो, तो हर दिन फागोत्सव बन सकता है। इस तरह होली के स्वागत में जमी यह रंगत और मस्ती-धमाल लंबे समय तक शहरवासियों के दिलों में यादगार बनी रहेगी।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor