हरे कृष्णा मारवाड़ मंदिर चौखा चौपासनी में फूलों की होली व गेर पूर्णिमा महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
9783414079 diliprakhai@gmail.com
भक्ति, सेवा और उत्साह का अद्भुत संगम 1 मार्च को देखने को मिलेगा, जब हरे कृष्णा मारवाड़ मंदिर चौखा चौपासनी परिसर में शाम 6:30 बजे से रात 8:30 बजे तक फूलों की होली और गेर पूर्णिमा महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह उत्सव केवल रंगों और पुष्पों का उत्सव नहीं होगा, बल्कि भक्ति, संकीर्तन और सेवा भावना का जीवंत प्रतीक बनेगा। इसी पावन अवसर पर नंदकिशोर राठी मेडिकल एंड एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा भेंट किए गए अन्नसेवा वाहन का उद्घाटन भी किया जाएगा, जो स्कूलों और अस्पतालों में निःशुल्क भोजन सेवा का माध्यम बनेगा।
फूलों की होली: भक्ति और प्रेम का दिव्य उत्सव
फूलों की होली अत्यंत विशेष महत्व रखती है। जहां सामान्य होली में रंगों का प्रयोग होता है, वहीं मंदिरों में पुष्पों की वर्षा कर भगवान के साथ प्रेममयी होली खेली जाती है। यह आयोजन भक्त और भगवान के बीच आत्मीय संबंध का प्रतीक है।
मंदिर परिसर में भक्तगण विभिन्न प्रकार के सुगंधित फूलों के साथ श्रीविग्रहों के समक्ष होली खेलेंगे। गुलाब, गेंदे, कनेर और अन्य पुष्पों की वर्षा के बीच संकीर्तन की मधुर ध्वनि वातावरण को भक्तिमय बनाएगी। ऐसा प्रतीत होगा मानो पूरा परिसर वृंदावन की पावन भूमि में परिवर्तित हो गया हो।
फूलों की होली का संदेश है – रंगों से अधिक प्रेम का रंग चढ़े। यह आयोजन मन, वचन और कर्म से भगवान की आराधना का अवसर प्रदान करता है। यहां किसी प्रकार की बाहरी चकाचौंध नहीं, बल्कि भक्ति की निर्मलता और आनंद की अनुभूति प्रमुख रहती है।
गेर पूर्णिमा और चैतन्य महाप्रभु का प्राकट्य महोत्सव
यह दिन विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी अवसर पर भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु के गोल्डन अवतार का प्राकट्य उत्सव मनाया जाएगा। चैतन्य महाप्रभु को भक्ति आंदोलन का अग्रदूत माना जाता है। उन्होंने संकीर्तन आंदोलन के माध्यम से हरि नाम का प्रचार-प्रसार किया और प्रेम-भक्ति को जन-जन तक पहुंचाया।
गेर पूर्णिमा को उनके जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विशेष पुष्प अभिषेक, संकीर्तन, पालकी महोत्सव, महाआरती और प्रसाद वितरण जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
संकीर्तन के दौरान “हरे कृष्णा” महामंत्र की गूंज पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करेगी। पालकी महोत्सव में भगवान की झांकी निकाली जाएगी, जिसमें भक्तजन नृत्य-कीर्तन करते हुए सहभागी बनेंगे। यह दृश्य श्रद्धा, उल्लास और भक्ति का अनुपम उदाहरण होगा।
अन्नसेवा वाहन: सेवा भावना का सशक्त संकल्प
इस भव्य धार्मिक आयोजन का एक और महत्वपूर्ण पक्ष है अन्नसेवा वाहन का उद्घाटन। यह वाहन नंदकिशोर राठी मेडिकल एंड एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा मंदिर को भेंट किया गया है। समाजसेवी श्री आनंद जी राठी और समाजसेवी श्री सुरेश जी राठी के सहयोग से यह सेवा कार्य साकार रूप ले रहा है।
यह वाहन विशेष रूप से स्कूलों और अस्पतालों में निःशुल्क भोजन सेवा के लिए उपयोग में लिया जाएगा। जरूरतमंद बच्चों, मरीजों और उनके परिजनों को समय पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना इसका उद्देश्य है।
भारतीय संस्कृति में अन्नदान को महादान कहा गया है। शास्त्रों में उल्लेख है कि अन्नदान से बड़ा कोई दान नहीं, क्योंकि यह सीधे जीवन से जुड़ा है। इसी भावना को साकार करते हुए ट्रस्ट ने यह पहल की है।
वाहन के माध्यम से भोजन वितरण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और व्यापक हो सकेगी। अब सेवा केवल मंदिर परिसर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शहर के विभिन्न हिस्सों में जरूरतमंदों तक पहुंचेगी। यह पहल समाज में करुणा और सहयोग की भावना को और सुदृढ़ करेगी।
समाजसेवी आनंद जी राठी और सुरेश जी राठी की प्रेरक भूमिका
समाजसेवी आनंद जी राठी और समाजसेवी श्री सुरेश जी राठी द्वारा भेंट किया गया यह वाहन उनके सेवा समर्पण का प्रमाण है। वे कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहेंगे। उनका मानना है कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों की सहायता करना भी उतना ही आवश्यक है।
उनकी प्रेरणा से ट्रस्ट लगातार शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सेवा कार्य कर रहा है। अन्नसेवा वाहन इसी श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो जरूरतमंदों के जीवन में आशा और सहारा बनेगा।
प्रायोजकों का सहयोग
इस महोत्सव के प्रायोजक शिवम हॉस्पिटल के डॉ. जेपी सोनी और डॉ. मीनाक्षी सोनी रहेंगे। उनका सहयोग इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। चिकित्सा सेवा से जुड़े होने के कारण वे भी समाजसेवा और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित हैं।
आध्यात्मिकता और सेवा का संगम
यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आध्यात्मिकता और सेवा का संगम है। एक ओर जहां भक्तजन फूलों की होली और संकीर्तन के माध्यम से भगवान के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करेंगे, वहीं दूसरी ओर अन्नसेवा वाहन के माध्यम से समाजसेवा का संकल्प भी साकार होगा।
आज के भौतिकवादी दौर में ऐसे आयोजन लोगों को आत्मिक शांति और सामाजिक जिम्मेदारी दोनों की याद दिलाते हैं। मंदिर परिसर में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ केवल उत्सव मनाने नहीं, बल्कि एक सकारात्मक संदेश ग्रहण करने आएगी – भक्ति के साथ सेवा ही सच्चा धर्म है।
भव्य तैयारियां और श्रद्धालुओं में उत्साह
मंदिर परिसर को विशेष सजावट से सजाया जा रहा है। रंग-बिरंगे पुष्प, आकर्षक रोशनी और पारंपरिक सज्जा से वातावरण भक्तिमय बनेगा। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से समय पर पहुंचकर कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की है।
आयोजन की रूपरेखा इस प्रकार रहेगी –
-
6:30 बजे संकीर्तन आरंभ
-
पुष्प अभिषेक और फूलों की होली
-
पालकी महोत्सव
-
महाआरती
-
अन्नसेवा वाहन का उद्घाटन
-
प्रसाद वितरण
समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश
फूलों की होली हमें सिखाती है कि जीवन में प्रेम और सौहार्द के रंग भरें। गेर पूर्णिमा हमें भक्ति और समर्पण का संदेश देती है। वहीं अन्नसेवा वाहन हमें याद दिलाता है कि सच्ची पूजा वही है जो मानव सेवा से जुड़ी हो।
1 मार्च का यह आयोजन जोधपुर शहर के लिए केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक प्रेरणा बनेगा। भक्ति की मधुर ध्वनि, पुष्पों की वर्षा और सेवा के संकल्प के साथ यह महोत्सव निश्चित ही आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक सहयोग का नया अध्याय लिखेगा। इस प्रकार हरे कृष्णा मारवाड़ मंदिर चौखा चौपासनी में आयोजित होने वाला फूलों की होली और गेर पूर्णिमा महोत्सव भक्तों के लिए दिव्य अनुभव का अवसर होगा, वहीं नंदकिशोर राठी मेडिकल एंड एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा भेंट किया गया अन्नसेवा वाहन समाजसेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। भक्ति, प्रेम और सेवा का यह संगम शहरवासियों के लिए अविस्मरणीय रहेगा।



