“होली के दिन दिल खिल जाते हैं, रंगों में रंग मिल जाते हैं…
गिले शिकवे भूल के दोस्तों, दुश्मन भी गले मिल जाते हैं…”
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
उपरोक्त पंक्तियों की भावना को आत्मसात करते हुए राइजिंग भास्कर ने इस होली पर पत्रकार साथियों के लिए कुछ विशेष और हल्के-फुल्के टाइटल तैयार किए हैं। होली रंगों, उमंगों और मस्ती का पर्व है—जहां गंभीरता भी मुस्कान ओढ़ लेती है और औपचारिकता भी दोस्ती में बदल जाती है। इसी भावना के साथ हमने पत्रकारों की कार्यशैली, उनकी पहचान और उनके अंदाज़ को सकारात्मक दृष्टि से देखते हुए हास्य-परिहास के रंग में कुछ उपाधियाँ देने का प्रयास किया है।
हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि ये सभी टाइटल पूर्णतः मज़ाकिया और स्नेहपूर्ण भाव से तैयार किए गए हैं। इनका उद्देश्य किसी की मानहानि करना, कटाक्ष करना या किसी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना बिल्कुल नहीं है। पत्रकारिता एक जिम्मेदारी भरा और गरिमामय पेशा है, और राइजिंग भास्कर हर पत्रकार की मेहनत, प्रतिबद्धता और सामाजिक भूमिका का सम्मान करता है।
हमने पूरी सावधानी बरती है कि किसी भी साथी की गरिमा और आत्मसम्मान को ठेस न पहुंचे। यदि अनजाने में किसी को कोई बात खल जाए, तो हम folded hands के साथ यही निवेदन करेंगे कि इसे होली की मस्ती का हिस्सा मानें। जिस तरह होली के रंग आपस की दूरियां मिटा देते हैं, उसी तरह यदि कोई कड़वाहट हो तो उसे भी रंगों में घोल दें।
आइए, इस होली पर एक रंग खुशी का बिखेरें, एक रंग अपनत्व का और एक रंग हंसी का—ताकि हर मन खिल उठे और हर दिल रंगों में रंग जाए।
चौथा खंबा…(जर्नलिस्ट)
ओम गौड़ : बोनस री नौकरी
सुरेश व्यास : घर में लगाया, चौथा पाया
राजकुमार व्यास : पत्रकारिता री भूख
मोती जैन : लिखूं तो चैन आवै
चंद्रमोहन कल्ला : उम्र 65 पार, अर्ध शतक आज भी मार लैवे यार
शरद शर्मा : लेखन री शरद ऋतु आई
महेंद्र भंसाली : पत्रकारिता रो मैदान पूरो खाली है
श्रेयांश भंसाली : छोटे मियां कमाल के
संगीता शर्मा : कमांडर ऑफ जर्नलिज्म
हिमालय मूथा : तपस्या के मूड में
सुरेश पारीक : अपनी ढपली, अपना राग
कमल श्रीमाली : अकेले होने का गम नहीं
दौलत सिंह चौहान : शब्द ही दौलत है
सुनील चौधरी : पत्रकारिता री चौधराहट जिंदा है
एमआर मलकानी : शब्दों का सरताज
राकेश गांधी : बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत कहो
भंवर जांगिड़ : पत्रकार तो काम का था पर…
अजय अस्थाना : जमी जमाई जाजम
शिवप्रकाश पुरोहित : पत्रकारिता री शिव चालीसा
दिनेश जोशी : पुराना चावल
केडी इसरानी : मैं स्वतंत्र पत्रकार हूं…
मिश्रीलाल पंवार : शब्दों में मिश्री ज्यों मीठी बात
दिलीप कुमार पुरोहित : मोदी जी रो मानस पुत्र
दिनेश शिवनानी : मुद्दे सूं भटकणो कौनी
केके सिंघवी : पत्रकारिता में मराठा
राजेश शर्मा : राजसी ठाट
अभिषेक बिस्सा : होम्योपैथी पत्रकारिता
मनीष व्यास : हम किसी से कम नहीं
जितेंद्र खंडेलवाल : मेरे दम पर अखबार
मुकुल गुप्ता : बणिया बुद्धि सूं अखबार चालै
प्रवीण दवे : शब्दों रौ खिलाड़
प्रमोद दवे : आराम री पत्रकारिता
उदय पुरोहित : पत्रकारिता रो पुरौधा
विनोद वाजपेयी : रेल छूट जावै, पर खबर नहीं छूटे
मधु बैनर्जी : हर हाल में खुश
राजीव गौड़ : सबको साथ लेकर चलना है
इम्तियाज अहमद : मैं भी कुछ हूं भाई जान
अर्जुन पंवार : डेस्क रौ आदमी, कंप्यूटर सूं दूरी
महेश व्यास : सूर्य अस्त, व्यासजी मस्त
पदम मेहता : राजस्थानी नै मान्यता दिलाय रैसूं…
दीपक मेहता : राम राम सा
गुरुदत्त अवस्थी : कॉलम चले न चले, कलम चालती रैवणी चाइजै
रजनीश छंगाणी : सुख के दिन बीते रै भैया
केआर गोदारा : कभी हमारा भी वक्त था
मनीष चौपड़ा : कमान हमारे हाथ में हैं
गोपाल सिंह राठौड़ : पत्रकारिता में राठौड़ी चालै कौनी
सुमित लोढ़ा : आदतन नहीं पीता
अलोक भंडारी : दीप जलै, शब्द खिले
प्रदीप लोढ़ा : सारे घर के बदल डालूंगा
अजय मिश्रा : नाम रौ संपादक
कपिल भटनागर : मीठो डाकी
विकास माथुर : पत्रकारिता में समाजवाद
सुरेश पी. खेतानी : आयो लाल झूलेलाल…
सैय्यद मुनव्वर अली : हालात बदलकर रहेंगे
गौतम जैन : ऋषि परंपरा रो पत्रकार
सौरभ पुरोहित : पत्रकारिता में भाभा वाद
रविन्द्र शर्मा : खेल री खबरों में एक्सपर्ट
राजेश त्रिवेदी : मिस्टर क्लीन
महेश शर्मा : ब्रह्मा-विष्णु-महेश
रमेश सारस्वत : तेरी-मेरी उसकी बात
मनोज शर्मा : मनसा-वाचा-करमणा
रंजन दवे : एक दिन भाग्य बदल कर रख दूंगा
नंदकिशोर सारस्वत : कथा वाचक पत्रकार
प्रवीण धींगड़ा : अलग राह पर
मुकेश सिंहमार : सफलता सिर पर है
विकास आर्य : ढोली घोड़ा पत्रकार
राजकुमार शर्मा : सिद्धहस्त लेखनी
गोविंद सिंह : पईसौ हाथ री मैल है…
बृजमोहन वर्मा : कंप्यूटर रो कीड़ौ
भूपेंद्र विश्नोई : कल की कल देखेंगे
अरुण हर्ष : सोच कर सोचो साथ क्या जाएगा?
प्रदीप जोशी : इंट्रो लिखणो बाकी है
सुमित देवड़ा : आ बैल मुझे मार
चंद्रशेखर व्यास : पत्रकारिता जारी है..
मुकेश दवे : विज्ञप्ति भेज दीजौ सा…
जितेंद्र पुरोहित : खबर रै बगा लाय में कूद जासूं
मनोज वर्मा : एकला चालो रै…
अशोक शर्मा : गांव री चौपाल
मधु भाई रामदेव : चौक रो लिखाड़
गुलाम मोहम्मद : सेवा री पत्रकारिता
राहुल शर्मा : खांचा पॉलिटिक्स
डीडी वैष्णव : डिफेंस पीआरओ
वीरेंद्र सिंह चौहान : दूसरी पारी
राजेंद्र खोरवाल : चाले ज्यों चालण दो…
महावीर शर्मा : तीन महीने में एक खबर
मुकेश माथुर : सोशल मीडिया रो चस्को
एलपी पंत : गोरधन सिंह सूं बचाओ…
कुलदीप व्यास : पत्रकारिता रो दारा सिंह
मदन सैन : सैनाचार्य री गादी माथै नजर








