प्रधानाचार्य हनुमान बड़ल बोले – अनुशासन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संस्कार से विद्यार्थियों को मिल रही नई दिशा, भामाशाह और सीएसआर का सहयोग मिले तो और निखरेगा प्रतिभाओं का भविष्य
विद्यालय की स्थापना 9 सितंबर 2003 को जर्मनी की केएफडब्ल्यू सोसायटी के सहयोग से की गई थी। इसका उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है। विद्यालय में कुल 560 सीटें हैं और यहां कक्षा 6 से 12वीं तक प्रवेश दिया जाता है।
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
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किसी भी समाज का भविष्य उसकी शिक्षा व्यवस्था और उस शिक्षा से तैयार होने वाले युवा तय करते हैं। यदि शिक्षा के साथ अनुशासन, संस्कार और अवसर मिल जाएं तो वही युवा देश की सबसे बड़ी ताकत बन जाते हैं। जोधपुर के मंडोर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर राजकीय बालक आवासीय विद्यालय भी ऐसी ही एक संस्था है, जहां सीमित संसाधनों के बावजूद विद्यार्थियों की प्रतिभा लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है।
यह विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि उन बच्चों के सपनों का घर है जो ग्रामीण और आर्थिक रूप से साधारण परिवारों से आते हैं, लेकिन अपने परिश्रम से बड़ी उपलब्धियां हासिल करने का जज्बा रखते हैं। यहां से निकलने वाले विद्यार्थी आज न्यायपालिका, प्रशासन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, सेना और खेल जगत में देश-विदेश में अपनी पहचान बना रहे हैं।
इस सफलता के पीछे विद्यालय की व्यवस्थित व्यवस्था, समर्पित शिक्षक और अनुशासनात्मक वातावरण की बड़ी भूमिका है। इन सबके केंद्र में हैं विद्यालय के प्रधानाचार्य हनुमान बड़ल, जिनका अपना जीवन भी संघर्ष और मेहनत की मिसाल रहा है। राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित ने प्रधानाचार्य हनुमान बड़ल से विद्यालय की कार्यप्रणाली, विद्यार्थियों की उपलब्धियों, प्रवेश प्रक्रिया और भविष्य की योजनाओं को लेकर विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश—
प्रश्न : सबसे पहले अपने जीवन और शिक्षा यात्रा के बारे में बताइए।
हनुमान बड़ल: मेरा प्रारंभिक जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा है। मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से आता हूं और मेरी 12वीं तक की पढ़ाई गांव में ही हुई। मैंने अंबेडकर छात्रावास बेलवा में रहकर पढ़ाई की। बाद में कॉलेज स्तर की पढ़ाई जोधपुर के तीन नंबर हॉस्टल में रहकर पूरी की। मैंने बीए-बीएड और एमए-बीएड किया और साथ ही नेट-जेआरएफ भी किया। पढ़ाई के साथ-साथ खेल और सामाजिक गतिविधियों में भी मेरी गहरी रुचि रही। मैं ऑल इंडिया सॉफ्टबॉल खिलाड़ी रहा हूं और स्काउट, एनसीसी तथा एनएसएस से भी जुड़ा रहा हूं। इन गतिविधियों ने मेरे व्यक्तित्व को मजबूत बनाया और अनुशासन सिखाया।
प्रश्न : शिक्षक बनने की यात्रा कैसे शुरू हुई?
हनुमान बड़ल: शिक्षा के क्षेत्र में काम करने का सपना हमेशा से था। वर्ष 2012 में मेरी नियुक्ति तृतीय श्रेणी शिक्षक के रूप में हल्दीघाटी में हुई। इसके बाद मैंने स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल खमनौर और बालेसर मॉडल स्कूल में सेवाएं दीं। बाद में प्रथम श्रेणी शिक्षक के रूप में चयन हुआ और सिरोही में भी कार्य करने का अवसर मिला। शिक्षण कार्य के दौरान विद्यार्थियों के साथ जुड़ाव और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव देखना सबसे बड़ी प्रेरणा देता है।
मेरे काम को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा शिक्षक दिवस के अवसर पर वर्ष 2023 में ब्लॉक स्तर, 2024 में जिला स्तर और 2025 में राज्य स्तर पर बेस्ट शिक्षक के रूप में सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल मेरा नहीं बल्कि उन विद्यार्थियों और सहयोगी शिक्षकों का भी है जिनके साथ मिलकर हमने यह उपलब्धि हासिल की।
प्रश्न : डॉ. अंबेडकर राजकीय बालक आवासीय विद्यालय की स्थापना और उद्देश्य क्या है?
हनुमान बड़ल: इस विद्यालय की स्थापना 9 सितंबर 2003 को जर्मनी की केएफडब्ल्यू सोसायटी के सहयोग से की गई थी। इसका उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है। विद्यालय में कुल 560 सीटें हैं और यहां कक्षा 6 से 12वीं तक प्रवेश दिया जाता है। 11वीं और 12वीं में विज्ञान और वाणिज्य संकाय उपलब्ध हैं। यहां पढ़ने वाले अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं, लेकिन उन्हें यहां वही सुविधाएं देने का प्रयास किया जाता है जो किसी अच्छे निजी स्कूल में मिलती हैं।
प्रश्न : विद्यालय में प्रवेश की प्रक्रिया और पात्रता क्या है?
हनुमानराम बड़ल: विद्यालय में प्रवेश के लिए कुछ जरूरी शर्तें हैं—
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विद्यार्थी राजस्थान का मूल निवासी होना चाहिए।
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पिछली कक्षा में कम से कम 40 प्रतिशत अंक होना जरूरी है।
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परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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सरकारी कर्मचारी लेवल 11 तक वेतन पाने वाले पात्र होंगे।
प्रवेश में प्राथमिकता उन बच्चों को दी जाती है जो—
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कोरोना महामारी से अनाथ हुए हों
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विधवा या परित्यक्ता माता के बच्चे हों
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विशेष योग्यजन परिवार से हों
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बीपीएल परिवार से हों
एक महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि यदि छात्र का परिवार विद्यालय से 5 किलोमीटर के भीतर रहता है तो उसे प्रवेश नहीं दिया जाता, क्योंकि यह पूर्णत: आवासीय विद्यालय है।
कक्षा 6 में इस वर्ष 80 सीटें रिक्त हैं। इनमें—
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60% अनुसूचित जाति
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15% अनुसूचित जनजाति
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15% अन्य पिछड़ा वर्ग
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10% आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग
के विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा।
प्रवेश प्रक्रिया 15 फरवरी 2026 से शुरू हो चुकी है और 31 मई 2026 तक आवेदन किए जा सकते हैं।
प्रश्न : विद्यालय में बच्चों की दिनचर्या कैसी रहती है?
हनुमानराम : हमारा प्रयास है कि बच्चों का जीवन अनुशासित और संतुलित हो।
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सुबह 5 बजे बच्चे उठते हैं
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नित्यकर्म के बाद योग और व्यायाम करते हैं
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7 बजे पौष्टिक नाश्ता दिया जाता है
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10 बजे से नियमित कक्षाएं शुरू होती हैं
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12:40 बजे दोपहर का भोजन
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4 बजे स्कूल की छुट्टी
इसके बाद बच्चों को खेलने और आराम का समय दिया जाता है।
शाम को खेल गतिविधियां होती हैं और विद्यालय में हरा-भरा बड़ा मैदान और ओपन जिम उपलब्ध है, जिसमें 42 प्रकार के उपकरण लगे हैं। रात में भोजन के बाद जीरो मूवमेंट स्टडी होती है, जिसमें बच्चे अपने बेड पर बैठकर शांत वातावरण में पढ़ाई करते हैं। इससे उनमें आत्मानुशासन विकसित होता है।
प्रश्न : खेल और अन्य गतिविधियों में विद्यालय की उपलब्धियां कैसी हैं?
हनुमान बड़ल: हमारा मानना है कि शिक्षा के साथ खेल और सांस्कृतिक गतिविधियां भी उतनी ही जरूरी हैं।
इस सत्र में—कुल 37 मेडल जिला स्तर पर जीते है।
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13 विद्यार्थी कुश्ती में स्टेट लेवल पर खेले
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05 विद्यार्थी एथलेटिक्स में स्टेट लेवल तक पहुंचे
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4 विद्यार्थी तीरंदाजी में स्टेट लेवल पर खेले
विशेष रूप से तीरंदाजी में हमारे विद्यार्थियों की बादशाहत रही है। कई विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर पर भी विजेता रह चुके हैं। यह उपलब्धियां बताती हैं कि यदि सही मार्गदर्शन मिले तो ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चे भी किसी से कम नहीं हैं।
प्रश्न : विद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों की उपलब्धियां क्या हैं?
हनुमान बड़ल: हमारे विद्यालय के पूर्व विद्यार्थी आज कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं। कैलाश लीलावत का वर्तमान में आरजेएस में चयन हुआ था। धारूराम लीलावत का पूर्व में आरजेएस में चयन हुआ था।
इसके अलावा—
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राजेंद्र कुमार – आरपीएस
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भोमाराम – आरटीएस
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सुनील विश्नोई – आरएएस
हमारे विद्यालय से—
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40 से अधिक विद्यार्थी एमबीबीएस कर चुके हैं
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100 से अधिक नर्सिंग ऑफिसर हैं
इंजीनियर, पुलिस अधिकारी, बैंक कर्मचारी, पत्रकार, कलाकार और कई सफल उद्यमी भी हमारे पूर्व विद्यार्थी हैं। कई छात्र विदेशों में भी कार्यरत हैं।
प्रश्न : विद्यालय में एल्युमिनाई एसोसिएशन की क्या भूमिका है?
हनुमान बड़ल: वर्तमान संस्था प्रधान ने त्वरित प्रयास करते हुए इसी सत्र में विद्यालय की एल्युमिनी अंबेडकर आवासीय विद्यालय एल्युमिनी एसोसिएशन मंडोर जोधपुर (आवाज) के नाम से पंजीकृत करवाकर 9 नवंबर को एल्युमिनाई मीट आयोजित करवाई। इसमें लगभग 1 हजार पूर्व छात्रों ने हिस्सा लिया। जिसमें डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, वकील, आरएएस, आरजेएस, पत्रकार, उद्यमी, पुलिसकर्मी, सेना, बैंककर्मी सहित विभिन्न सेवाओं में चयनित पूर्व छात्रों ने भाग लेकर विद्यालय के प्रति आभार जताया एवं एल्युमिनी की कार्यकारिणी के माध्यम से लगभग 5 लाख की राशि भी एकत्रित की है। एल्युमिनाई की कार्यकारिणी में लगभग 30 सदस्य हैं, जिनमें—
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न्यायिक अधिकारी
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पुलिस अधिकारी
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डॉक्टर
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विभिन्न सरकारी सेवाओं में कार्यरत पूर्व छात्र
शामिल हैं।
इनका उद्देश्य विद्यालय के वर्तमान विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देना और संस्थान के विकास में योगदान देना है।
प्रश्न : विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में बताइए।
हनुमान बड़ल: विद्यालय में कुल 23 शिक्षक और लगभग 25 स्टाफ सदस्य कार्यरत हैं। सुरक्षा के लिए 24 घंटे रिटायर्ड फौजी गार्ड तैनात रहता है। सुविधाओं की बात करें तो—
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उन्नत भोजनशाला, जहां 300 बच्चे एक साथ भोजन कर सकते हैं
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6 डिजिटल बोर्ड
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ई-लाइब्रेरी
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कंप्यूटर लैब
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3500 पुस्तकों का पुस्तकालय
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लिंग्वा लैब
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फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी लैब
इसके अलावा 16 स्टाफ क्वार्टर भी हैं। हमारे लैब असिस्टेंट सुभाष विश्नोई नर्सिंग की भी सेवाएं दे रहे हैं, जिससे बच्चों को प्राथमिक चिकित्सा सुविधा मिलती है।
प्रश्न : विद्यालय को किन सुविधाओं की आवश्यकता है?
हनुमान बड़ल: विद्यालय लगातार प्रगति कर रहा है, लेकिन कुछ सुविधाओं की अभी आवश्यकता है।
सबसे जरूरी है—
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इमरजेंसी वाहन, ताकि किसी छात्र के बीमार होने पर तुरंत अस्पताल ले जाया जा सके
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प्रार्थना स्थल पर डोम
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एक आधुनिक ऑडिटोरियम
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हॉस्टल के 28 कमरों में कूलिंग सिस्टम
यदि सरकार और समाज के भामाशाह आगे आएं तो इन सुविधाओं को जल्द पूरा किया जा सकता है और बच्चों को और बेहतर माहौल मिलेगा।
प्रश्न : विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियां कैसी हैं?
हनुमान बड़ल: विद्यालय का परीक्षा परिणाम हमेशा अच्छा रहता है। गत सत्र 2024-25 में भी 100 प्रतिशत परिणाम रहा।
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2024-25 में 12वीं में 7 विद्यार्थियों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए
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एक विद्यार्थी ने केमेस्ट्री में 100 में से 100 अंक हासिल किए
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दो विद्यार्थी जेईई मेन्स पास कर चुके हैं
इसके अलावा दो विद्यार्थियों का चयन राज्य सरकार की इंस्पायर्ड स्कीम में हुआ है, जिसके तहत उन्हें 4 लाख रुपए की सहायता मिलेगी।
पूर्व प्रधानाचार्य सुरेशाराम मेहरा की क्या भूमिका रही?
हनुमान बड़ल : विद्यालय में लगभग 10 वर्षों तक कार्यरत रहे पूर्व संस्था प्रधान सुरेशाराम मेहरा का संस्था के विकास में उल्लेखनीय योगदान रहा है। उन्होंने संस्थान को राजस्थान में श्रेष्ठ आवासीय विद्यालय के स्तर पर पहुंचाने में अपना अमूल्य योगदान दिया। इस उपलब्धि पर पूर्व प्रधानाचार्य सुरेशाराम मेहरा को राज्य स्तर पर विभाग द्वारा तत्कालीन शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने सम्मानित भी किया था। सुरेशाराम मेहरा की प्रेरणा लेकर उनके सपनों को पूरा करने में वर्तमान युवा संस्था प्रधान हनुमान बड़ल उतनी ही बखूबी से कार्य कर रहे हैं।
प्रश्न : विद्यार्थियों में विद्यालय के प्रति लगाव कैसा है?
हनुमान बड़ल: यह हमारे लिए सबसे गर्व की बात है कि बच्चे इस विद्यालय को अपना घर मानते हैं। कई बार बच्चों ने अपनी पॉकेट मनी से भी विद्यालय को सहयोग दिया है। 9 नवंबर 2025 से अब तक 22 सफल विद्यार्थियों को विद्यालय गौरव अवार्ड दिया जा चुका है। इससे बच्चों में प्रेरणा और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ती है।
स्कूल के विकास में इनका योगदान भी अमूल्य है
हनुमान बड़ल : स्कूल में प्रवेश प्रभारी के रूप में किसनाराम वणल का योगदान रहा है। राजेंद्र कुमार बामणिया छात्रावास अधीक्षक,, सांस्कृतिक प्रभारी शालिनी सिहाग, शारीरिक शिक्षक सरोज, चिकित्सा प्रभारी सुभाष विश्नोई का सहयोग उत्कृष्ट रहा है। इनके सहयोग से स्कूल निरंतर विकास के पायदान छू रहा है। विद्यालय विकास मे बोर्ड प्रभारी सुरेंद्रपाल सिंह यादव, ई-लाईब्रेरी प्रभारी सुमन जाटोलिया, शालादर्पण प्रभारी बख्तदान, परीक्षा प्रभारी सत्यप्रकाश, विद्यालय सौंदर्यीकरण प्रभारी रघुवीर सिंह, ईको क्लब प्रभारी अनिता गोठवाल, स्काउट प्रभारी कृष्णा खिंची, यूडाईस प्रभारी मुकेश कुमार सांधू, लैब प्रभारी प्रकाश माण्डण, लेखा शाखा प्रभारी रेखा सिरवी, कार्यालय प्रभारी महेन्द्र चौधरी, नीरज खिंची का बड़ा योगदान है।
सफलता की प्रयोगशाला बना मंडोर का अंबेडकर आवासीय विद्यालय
डॉ. भीमराव अंबेडकर राजकीय बालक आवासीय विद्यालय मंडोर आज केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि संघर्ष से सफलता की कहानी लिखने वाली एक प्रेरणादायक प्रयोगशाला बन चुका है। प्रधानाचार्य हनुमानराम बड़ल के नेतृत्व में यहां अनुशासन, संस्कार और आधुनिक शिक्षा का ऐसा वातावरण तैयार हुआ है, जिसमें साधारण परिवारों के बच्चे भी असाधारण उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं। यदि, समाज और भामाशाहों का सहयोग मिले तो यह संस्थान आने वाले वर्षों में और भी अधिक प्रतिभाओं को तैयार कर सकता है। और शायद यही इस विद्यालय की सबसे बड़ी पहचान है—यहां केवल पढ़ाई नहीं होती, यहां भविष्य गढ़ा जाता है।























