जोधपुर में भव्य आयोजन की तैयारियां पूर्ण, समाजसेवियों का होगा सम्मान; भक्ति और सामाजिक एकता का संदेश देगा महोत्सव
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
संत परंपरा और भक्ति भाव के प्रतीक संत शिरोमणि श्री नामदेव महाराज के 80वें वार्षिक महोत्सव को लेकर शहर में व्यापक स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 29 मार्च 2026 को आयोजित होने वाला यह महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि सामाजिक समरसता और सेवा भावना का भी सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करेगा। आयोजन स्थल श्रीनाथ संत नामदेव मंदिर, 8-डी सिंधी कॉलोनी, संत नामदेव मार्ग, ई-शास्त्री नगर, जोधपुर को भव्य रूप से सजाया जा रहा है।
इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य संत नामदेव की शिक्षाओं—भक्ति, समानता, सेवा और मानवता—को जन-जन तक पहुंचाना है। आयोजन समिति के अनुसार, इस बार का महोत्सव विशेष रूप से भव्य और व्यापक होगा, जिसमें धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ समाजसेवियों का सम्मान भी किया जाएगा।
भक्ति और सांस्कृतिक परंपरा का अनूठा संगम
महोत्सव में संत नामदेव के जीवन और उनके योगदान को केंद्र में रखते हुए भजन-कीर्तन, सत्संग और धार्मिक प्रवचनों का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालु पूरे दिन भक्ति रस में सराबोर रहेंगे। मंच पर प्रसिद्ध भजन गायकों द्वारा नामदेव भक्ति के गीत प्रस्तुत किए जाएंगे, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठेगा।
कार्यक्रम में संत नामदेव के जीवन दर्शन पर आधारित झांकियां भी प्रस्तुत की जाएंगी, जिनमें उनके द्वारा दिए गए संदेशों—जाति-पांति से ऊपर उठकर मानवता की सेवा—को दर्शाया जाएगा। यह आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का भी एक माध्यम बनेगा।
समाजसेवियों का होगा सम्मान
इस महोत्सव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा समाज में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों का सम्मान है। इस वर्ष विभिन्न श्रेणियों में समाजसेवियों को सम्मानित किया जाएगा, जिनमें प्रमुख रूप से—
- सिन्धु समाज रत्न से सम्मानित होंगी श्रीमती पूनम मोतीयानी
- संत नामदेव रत्न सम्मान प्राप्त करेंगे राजेन्द्र गहलोत (सांसद)
- निस्वार्थ समाज सेवा के लिए देवीदास भाटी को सम्मानित किया जाएगा
- सेवा सम्मान से नवाजे जाएंगे जितेन्द्र सिंह बत्रा
इन सम्मान समारोहों के माध्यम से समाज में सेवा और समर्पण की भावना को प्रोत्साहित किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि ऐसे सम्मान दूसरों को भी प्रेरित करते हैं कि वे समाज के लिए आगे आएं और सकारात्मक बदलाव लाएं।
आयोजन समिति की सक्रिय भूमिका
महोत्सव को सफल बनाने में आयोजन समिति के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्वागतकर्ता के रूप में वासुदेव खेतानी, लक्ष्मण खेतानी, रमेश खेतानी, महेश खेतानी, कमलेश खेतानी, सुरेश एस. डी. खेतानी, सी. पी. खेतानी और किशोर खेतानी सहित कई समाजसेवी सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। इन सभी ने मिलकर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की है और यह सुनिश्चित किया है कि प्रत्येक श्रद्धालु को आयोजन का पूरा लाभ मिल सके। समिति द्वारा साफ-सफाई, सुरक्षा, पार्किंग और जलपान जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है।
धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक संदेश
संत नामदेव का जीवन केवल भक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने समाज में समानता और सेवा का संदेश भी दिया। उन्होंने अपने भजनों और शिक्षाओं के माध्यम से यह बताया कि सच्ची भक्ति वही है, जो मानव सेवा के साथ जुड़ी हो। महोत्सव के दौरान इस विचारधारा को विशेष रूप से प्रचारित किया जाएगा। आयोजक चाहते हैं कि लोग केवल धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेने तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों की मदद के लिए भी प्रेरित हों।
युवाओं को जोड़ने की पहल
इस बार के महोत्सव में युवाओं की भागीदारी को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। युवा स्वयंसेवकों को आयोजन की जिम्मेदारियां दी गई हैं, ताकि वे नेतृत्व और सेवा की भावना को समझ सकें। इसके अलावा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी युवाओं को मंच प्रदान किया जाएगा, जिससे उनकी प्रतिभा को निखारने का अवसर मिलेगा। यह पहल भविष्य में समाज के लिए एक मजबूत नेतृत्व तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
भव्य सजावट और व्यवस्थाएं
मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया जा रहा है। प्रवेश द्वार पर आकर्षक तोरणद्वार बनाए गए हैं, जो श्रद्धालुओं का स्वागत करेंगे। कार्यक्रम स्थल पर बैठने की पर्याप्त व्यवस्था की गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग कार्यक्रम का आनंद ले सकें। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा, सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।
समाज में एकता का संदेश
यह महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे को बढ़ावा देने का भी माध्यम है। विभिन्न वर्गों और समुदायों के लोग इसमें भाग लेकर एकता का संदेश देंगे। संत नामदेव की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं, खासकर उस समय में जब समाज में विभाजन की प्रवृत्ति बढ़ रही है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से लोगों को एकजुट करने का प्रयास किया जा रहा है।
श्रद्धालुओं में उत्साह
महोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। दूर-दूर से लोग इस आयोजन में भाग लेने के लिए जोधपुर पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं। कई परिवार इसे एक धार्मिक पर्व के रूप में मनाते हैं और पूरे उत्साह के साथ इसमें शामिल होते हैं।
Author: Dilip Purohit
Group Editor



