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Friday, April 10, 2026, 2:08 pm

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कमलेश त्रिवेदी बने मोरिंगा क्रांति के सूत्रधार; कृषि, संस्कृति और सेवा के यज्ञ में दे रहे आहुतियां

संघर्षों से संकल्प तक, कृष्ण-भक्ति से कृषि नवाचार तक—सिरोही के युवा ने कैसे खड़ी की एक ‘सेवा आधारित’ वैश्विक पहचान

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

राजस्थान की मरुधरा में आज एक नई हरियाली की गूंज सुनाई दे रही है—‘मोरिंगा क्रांति’। यह केवल खेती का बदलाव नहीं, बल्कि जीवनशैली, स्वास्थ्य और संस्कृति का एक समग्र आंदोलन बन चुका है। इस परिवर्तन के केंद्र में हैं सिरोही के युवा समाजसेवी और उद्यमी कमलेश त्रिवेदी, जो स्वयं को किसी क्रांति का नेता नहीं, बल्कि “भगवान श्रीकृष्ण का एक छोटा सा सेवक” मानते हैं।
अभावों से भरे बचपन, भूकंप की त्रासदी, परिवार के बिछोह और संघर्षों से गुजरते हुए कमलेश ने जिस रास्ते को चुना, वह केवल सफलता का नहीं, बल्कि सेवा, श्रद्धा और स्वदेशी चेतना का मार्ग है। राइजिंग भास्कर के लिए प्रस्तुत है कमलेश त्रिवेदी से एक विस्तृत बातचीत, जिसमें उन्होंने अपने जीवन, मिशन, मोरिंगा क्रांति और भविष्य के विजन पर खुलकर चर्चा की।

प्रश्न 1: कमलेश जी, सबसे पहले अपने बचपन और शुरुआती संघर्षों के बारे में बताइए।

उत्तर: मेरा जन्म गुजरात के ध्रांगध्रा में एक साधारण पुजारी परिवार में हुआ। बचपन से ही आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन संस्कार बहुत गहरे थे। भगवान के प्रति श्रद्धा और सेवा का भाव परिवार से ही मिला। फिर 2001 का भूकंप आया, जिसने सब कुछ बदल दिया। हमने अपना घर खो दिया, और उससे भी बड़ा आघात तब लगा जब एक महीने बाद ही मेरे पिता का देहांत हो गया। उस समय ऐसा लगा जैसे जीवन पूरी तरह से शून्य हो गया हो। लेकिन शायद वही समय था जब ईश्वर ने मुझे एक नई दिशा देने का निर्णय लिया। मैंने हार नहीं मानी और मुंबई चला गया।

प्रश्न 2: मुंबई में आपका संघर्ष कैसा रहा?

उत्तर: मुंबई में जीवन आसान नहीं था। वहां मैंने कंप्यूटर डिप्लोमा किया और फिर LIC एजेंट के रूप में काम शुरू किया। यह काम मुझे लोगों से जुड़ना सिखाता था। मैंने सीखा कि हर व्यक्ति के पीछे एक कहानी होती है, एक संघर्ष होता है। वहीं पर मैंने जीवन के व्यावहारिक पहलुओं को समझा—आर्थिक प्रबंधन, धैर्य, संवाद और सबसे महत्वपूर्ण, आत्मविश्वास। लेकिन भीतर कहीं न कहीं एक खालीपन था, एक सवाल था—क्या मैं केवल अपने लिए ही काम कर रहा हूं?

प्रश्न 3: फिर आपको अपनी जड़ों की ओर लौटने की प्रेरणा कैसे मिली?

उत्तर: इसमें दो चीजों ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई। पहली—RSS की शाखा, जहां से मुझे राष्ट्र सेवा के संस्कार मिले। दूसरी—‘सत्यमेव जयते’ शो, जिसने मुझे समाज के वास्तविक मुद्दों से रूबरू कराया। इन दोनों ने मुझे सोचने पर मजबूर किया कि मेरा जीवन केवल कमाने के लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए कुछ करने के लिए है। तभी मैंने निर्णय लिया कि मैं अपनी जड़ों की ओर लौटूंगा और कुछ ऐसा करूंगा जो समाज और प्रकृति दोनों के लिए उपयोगी हो।

प्रश्न 4: मोरिंगा से आपका जुड़ाव कैसे हुआ?

उत्तर: मोरिंगा से मेरा जुड़ाव एक संयोग नहीं, बल्कि ईश्वरीय संकेत था। जब मैंने इसके गुणों के बारे में पढ़ा और प्रयोग करना शुरू किया, तो मुझे एहसास हुआ कि यह एक ‘सुपरफूड’ है, जो कुपोषण, रोग प्रतिरोधक क्षमता और स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है।
धीरे-धीरे मैंने इसकी खेती, उपयोग और प्रसंस्करण पर गहराई से काम करना शुरू किया। लेकिन मैंने इसे कभी व्यापार नहीं माना, बल्कि सेवा का माध्यम माना।

प्रश्न 5: संतों का मार्गदर्शन आपके जीवन में कितना महत्वपूर्ण रहा?

उत्तर: बहुत अधिक। नंदगांव गौशाला में एक कार्यक्रम के दौरान जब सभी अतिथियों को मोरिंगा जलजीरा पिलाया गया, तब मुझे एक अलग ही अनुभूति हुई। दत्तशरणानंदजी महाराज ने कहा कि यदि गौमाता मोरिंगा को स्वीकार कर लें, तो वह स्थान धन्य हो जाएगा। जब गौमाता ने उसे प्रेम से ग्रहण किया, तो वह मेरे लिए एक संकेत था कि मैं सही मार्ग पर हूं। इसके बाद मुझे और भी संतों का आशीर्वाद मिला, जिसने मेरे संकल्प को और मजबूत किया।

प्रश्न 6: आप ‘नि:शुल्क ज्ञान दान’ की बात करते हैं। यह विचार कैसे आया?

उत्तर: यह विचार मेरे अंदर से नहीं, बल्कि मेरे ठाकुर जी की प्रेरणा से आया। जब एक किसान का वीडियो यूट्यूब पर वायरल हुआ और मुझे देश-विदेश से कॉल आने लगे, तब मैंने सोचा—अगर मैं इससे पैसा कमाने लगूं, तो यह सेवा नहीं रह जाएगी। इसलिए मैंने निर्णय लिया कि मैं किसी से कोई फीस नहीं लूंगा। आज अमेरिका, यूरोप और भारत के कोने-कोने से लोग फोन करते हैं, और मैं उन्हें घंटों समय देता हूं। मेरे लिए यह व्यवसाय नहीं, बल्कि भक्ति है।

प्रश्न 7: आपने अब तक कितने लोगों तक यह संदेश पहुंचाया है?

उत्तर: भगवान की कृपा से अब तक लगभग 6,50,000 बीज किसानों तक पहुंचा चुके हैं। करीब 40,000 से अधिक लोगों—जिनमें पुलिस, डॉक्टर, अधिकारी और आम नागरिक शामिल हैं—को मोरिंगा जलजीरा पिलाया है। लेकिन मैं इसे अपनी उपलब्धि नहीं मानता, यह सब भगवान की योजना है।

प्रश्न 8: सरकार और प्रशासन से आपको किस तरह का समर्थन मिला?

उत्तर: राजस्थान के मुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री और कृषि आयुक्त ने हमारे काम की सराहना की है। यह हमारे लिए सम्मान की बात है, लेकिन मैं इसे भी एक जिम्मेदारी के रूप में देखता हूं। सरकारी समर्थन से हमें अपने मिशन को और व्यापक स्तर पर ले जाने में मदद मिलेगी।

प्रश्न 9: अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आई बाधाओं को आप कैसे देखते हैं?

उत्तर: मैं हर परिस्थिति को ‘कृष्ण की लीला’ मानता हूं। जब अमेरिका का 50% टैरिफ और अन्य अंतरराष्ट्रीय समस्याएं सामने आईं, तो शुरू में लगा कि यह एक बाधा है। लेकिन बाद में समझ आया कि यह संकेत है कि हमें अपने देश के लोगों पर ध्यान देना चाहिए।
आज मैं भारत के किसानों और उपभोक्ताओं के लिए काम कर रहा हूं, और यही सही दिशा है।

प्रश्न 10: आपका ‘Adi Wellness’ स्टोर क्या संदेश देता है?

उत्तर: ‘Adi Wellness’ केवल एक स्टोर नहीं, बल्कि एक विचार है—स्वदेशी, प्राकृतिक और स्वास्थ्य आधारित जीवनशैली का।
यह एक ऐसा मंच है जहां लोग आकर मोरिंगा और अन्य प्राकृतिक उत्पादों के बारे में जान सकते हैं, उन्हें अनुभव कर सकते हैं और अपने जीवन में अपना सकते हैं।

प्रश्न 11: आप ‘लाइव मॉडल फार्म’ क्यों बनाना चाहते हैं?

उत्तर: मेरा मानना है कि केवल बातों से बदलाव नहीं आता, लोगों को दिखाना पड़ता है। अगर किसान एक जगह आकर देख सकें कि गौ-आधारित प्राकृतिक खेती कैसे होती है, तो वे उसे आसानी से अपनाएंगे। इसलिए मैं सिरोही में 1 एकड़ जमीन पर एक लाइव ट्रेनिंग सेंटर बनाना चाहता हूं। यह मेरे लिए एक सपना नहीं, बल्कि एक संकल्प है।

प्रश्न 12: आपकी मां का आपके जीवन में क्या योगदान रहा?

उत्तर: मेरी मां, पुष्पाबेन, मेरे जीवन की सबसे बड़ी शक्ति थीं। उनकी डायबिटीज में जब मोरिंगा से सुधार हुआ, तो वह मेरे लिए एक चमत्कार जैसा था। 30 दिसंबर 2025 को उनके जाने के बाद एक खालीपन जरूर आया, लेकिन अब मेरी हर सेवा, हर प्रयास उन्हीं की स्मृति को समर्पित है। मैं जो भी करता हूं, उसे उनके और भगवान के चरणों में अर्पित करता हूं।

प्रश्न 13: किसानों के लिए आपका मुख्य संदेश क्या है?

उत्तर: मैं किसानों से कहना चाहता हूं कि वे गौ-आधारित प्राकृतिक खेती अपनाएं। गौपालन केवल दूध के लिए न करें, बल्कि गोबर, गौमूत्र और जीवामृत का उपयोग करें। खेत की बाउंड्री पर पेड़ लगाएं, जैव विविधता बढ़ाएं और मिट्टी की उर्वरता को बचाएं।
यह केवल खेती नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलन का मार्ग है।

प्रश्न 14: भविष्य के लिए आपका विजन क्या है?

उत्तर: मेरा विजन बहुत स्पष्ट है—हर किसान आत्मनिर्भर बने, हर परिवार स्वस्थ रहे और हर व्यक्ति प्रकृति के साथ जुड़ा रहे।
मैं चाहता हूं कि भारत एक ‘स्वदेशी वेलनेस’ मॉडल के रूप में दुनिया के सामने आए। और अगर इसमें मैं एक छोटा सा योगदान दे सकूं, तो यही मेरे जीवन की सबसे बड़ी सफलता होगी।

प्रश्न 15: अंत में, आप अपने जीवन को किस रूप में देखते हैं?

उत्तर: मैं अपने जीवन को किसी उपलब्धि या सफलता के रूप में नहीं देखता। मैं खुद को केवल एक माध्यम मानता हूं—भगवान श्रीकृष्ण का एक छोटा सा सेवक। जो कुछ भी हो रहा है, वह उनकी इच्छा से हो रहा है। मेरा काम केवल इतना है कि मैं ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाता रहूं।

कमलेश की कहानी विश्वास, सेवा और संकल्प की जीवंत मिसाल

कमलेश त्रिवेदी की कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह विश्वास, सेवा और संकल्प की एक जीवंत मिसाल है। मोरिंगा के माध्यम से वे केवल स्वास्थ्य या खेती में बदलाव नहीं ला रहे, बल्कि एक ऐसी सोच को जन्म दे रहे हैं, जहां विकास का अर्थ प्रकृति के साथ संतुलन और समाज के प्रति जिम्मेदारी है। राजस्थान की धरती पर शुरू हुई यह ‘मोरिंगा क्रांति’ आने वाले समय में देश और दुनिया के लिए एक प्रेरणा बन सकती है—और इसके केंद्र में हैं एक विनम्र सेवक, जो हर सफलता का श्रेय अपने भगवान को देता है।

संपर्क सूत्र:

कमलेश त्रिवेदी, संस्थापक – Adi Wellness / Aayushved Wellness
aayushvedwellness@gmail.com
मोबाइल :  7300109799

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor