Explore

Search

Thursday, July 9, 2026, 7:04 am

Thursday, July 9, 2026, 7:04 am

LATEST NEWS

The specified slider does not exist.

Lifestyle

त्रिष्णा महापात्रा के अरंगेत्रम ने उत्कृष्ट भाव-भंगिमा, लय और तकनीकी कौशल का अद्भुत प्रदर्शन किया

शिवम् नाट्यालय का 65वां भव्य अरंगेत्रम संपन्न

भगवान पंवार. जोधपुर

शहर के प्रतिष्ठित भरतनाट्यम संस्थान शिवम् नाट्यालय में आज एक गौरवपूर्ण क्षण देखने को मिला। जब प्रतिभाशाली नृत्यांगना त्रिष्णा महापात्रा ने अपना अरंगेत्रम सफलतापूर्वक पूर्ण किया। यह शिवम् नाट्यालय का 65वां अरंगेत्रम रहा, जो वर्ष 1999 से जोधपुर का प्रथम भरतनाट्यम संस्थान होने का गौरव रखता है।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक पुष्पांजलि से हुई। इसके बाद क्रमशः अल्लारिपु, जातिस्वरम, शब्दम, वर्णम, पदम, तिल्लाना और अंत में मंगलम की प्रस्तुतियां दी गईं। प्रत्येक प्रस्तुति में त्रिष्णा ने उत्कृष्ट भाव-भंगिमा, लय और तकनीकी कौशल का अद्भुत प्रदर्शन किया।

इन प्रस्तुतियों में विभिन्न रागों— नटई, हेमावती, राग मल्लिका, शंकरवर्णम, रेवती और कादन कुतूहलम—का सुंदर संयोजन देखने को मिला, जबकि तालों में आदि तालम, चतुरस एकम, रूपक तालम और मिश्र चापु का प्रयोग किया गया। संगीत और नृत्य का यह समन्वय दर्शकों के लिए अत्यंत मंत्रमुग्ध कर देने वाला रहा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे परम पूज्य राघव पंडित दास, प्रण वल्लभ दास, अर्जुन दास, राम दास, भोपाल सिंह तथा दिनेश अग्रवाल ने त्रिष्णा को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए हार्दिक बधाई दी। सभी अतिथियों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मेहनत और समर्पण से इस महत्वपूर्ण पड़ाव को सफलतापूर्वक हासिल किया है।

शिवम् नाट्यालय की निदेशक एवं गुरु डॉ. मंजुषा चन्द्र भूषण सक्सेना ने भी त्रिष्णा को आशीर्वाद और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्हें त्रिष्णा की उपलब्धि पर अत्यंत गर्व है। उन्होंने बताया कि त्रिष्णा ने वर्षों की कठोर साधना, अनुशासन और समर्पण से इस मुकाम को प्राप्त किया है।

कार्यक्रम के अंत में दर्शकों ने तालियों की गूंज के साथ त्रिष्णा के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की। यह आयोजन न केवल एक विद्यार्थी की सफलता का प्रतीक बना, बल्कि जोधपुर में शास्त्रीय नृत्य परंपरा के निरंतर विकास का भी साक्षी रहा। कार्यक्रम का संचालन सुनील अरोड़ा ने किया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor