डॉ. पद्मजा शर्मा बोलीं— 50 रचनाकारों को एक सूत्र में पिरोना बड़ी उपलब्धि, प्रगति गुप्ता ने कहा— संजीदा की मेहनत का परिणाम है ‘कहकशां’, रेणु वर्मा ने सराहा— लंबे समय बाद आया ऐसा प्रभावशाली साझा संकलन
दिलीप कुमार पुरोहित | जोधपुर
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साहित्य की दुनिया में साझा काव्य संकलन केवल रचनाओं का संग्रह नहीं होता, बल्कि यह विभिन्न भावनाओं, अनुभवों और अभिव्यक्तियों का एक ऐसा संगम होता है, जो समाज के विविध रंगों को एक मंच पर प्रस्तुत करता है। ऐसा ही एक उल्लेखनीय प्रयास है शायरा डॉ. संजीदा खानम “शाहीन” द्वारा संपादित साझा काव्य संकलन ‘कहकशां’, जिसका लोकार्पण गुरुवार को डॉ. मदन सावित्री डागा साहित्य भवन, नेहरू पार्क में गरिमामय समारोह के बीच किया गया।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम साहित्यिक ऊर्जा, रचनात्मकता और भावनात्मक अभिव्यक्ति का अद्भुत संगम बन गया, जिसमें शहर के प्रमुख साहित्यकारों, कवियों और शायरों ने भाग लिया और अपनी उपस्थिति से आयोजन को यादगार बना दिया।
50 रचनाकारों को एक सूत्र में पिरोना बड़ी उपलब्धि : डॉ. पद्मजा शर्मा
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्रख्यात साहित्यकार डॉ. पद्मजा शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि ‘कहकशां’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि संभावनाओं के नए द्वार खोलने वाला एक साहित्यिक प्रयास है। उन्होंने कहा—
“50 रचनाकारों को एक मंच पर लाकर उनकी रचनाओं को एक माला में पिरोना कोई साधारण कार्य नहीं है। यह 50 मोतियों की माला है, जिसमें हर रचना अपनी अलग चमक और पहचान रखती है।”
उन्होंने आगे कहा कि इस तरह का संकलन तैयार करने के लिए संपादक को न केवल साहित्यिक समझ की आवश्यकता होती है, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर संवाद, संपर्क और धैर्य की भी जरूरत होती है। संजीदा खानम ने इन सभी पहलुओं पर खरा उतरते हुए एक उत्कृष्ट संकलन प्रस्तुत किया है।
संजीदा की मेहनत का साकार रूप है ‘कहकशां’ : प्रगति गुप्ता
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रसिद्ध साहित्यकार प्रगति गुप्ता ने कहा कि डॉ. संजीदा खानम का व्यक्तित्व बहुआयामी है। वे पेशे से डॉक्टर होने के साथ-साथ एक संवेदनशील साहित्यकार भी हैं।
उन्होंने कहा—
“संजीदा खानम ने जिस संजीदगी और समर्पण के साथ इस पुस्तक को तैयार किया है, वह काबिले-तारीफ है। उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि ‘कहकशां’ आज इस सुंदर स्वरूप में हमारे सामने है।”
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे संकलन नए और स्थापित रचनाकारों के बीच संवाद स्थापित करते हैं और साहित्य को नई दिशा प्रदान करते हैं।
लंबे समय बाद आया ऐसा प्रभावशाली संकलन : रेणु वर्मा
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित वरिष्ठ रचनाधर्मी रेणु वर्मा ने ‘कहकशां’ की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में इस स्तर का साझा काव्य संकलन कम ही देखने को मिलता है।
उन्होंने कहा—
“संजीदा खानम का जवाब नहीं। उन्होंने इस पुस्तक को तैयार करने में जो मेहनत की है, वह हर पृष्ठ पर दिखाई देती है। लंबे समय बाद ऐसा संकलन सामने आया है, जो साहित्य प्रेमियों को आकर्षित करेगा।”
भव्य लोकार्पण, अतिथियों ने बताया— साहित्य का अनमोल खजाना
कार्यक्रम के दौरान डॉ. संजीदा खानम शाहीन, मनशाह नायक, डॉ. पद्मजा शर्मा, प्रगति गुप्ता और रेणु वर्मा और अशफाक अहमद फौजदार ने संयुक्त रूप से ‘कहकशां’ का लोकार्पण किया। इस अवसर पर सभी अतिथियों ने पुस्तक को साहित्य का “अनमोल खजाना” बताते हुए इसकी उपयोगिता और महत्व पर प्रकाश डाला।
सरस्वती वंदना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ राइजिंग भास्कर की चीफ राखी पुरोहित द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना और स्वागत गीत से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।
इसके बाद अतिथियों के स्वागत का क्रम चला, जिसमें—
- बसंती पंवार ने डॉ. पद्मजा शर्मा का
- अमिता भंडारी ने प्रगति गुप्ता का
- दीपा टाक ने रेणु वर्मा का
- दीपा परिहार ने डॉ. संजीदा खानम शाहीन का
स्वागत किया।
अशफाक अहमद फौजदार ने मंच संचालन कर रहे मनशाह नायक का स्वागत किया।
काव्य गोष्ठी में रचनाओं की गूंज, श्रोताओं ने सराहा
लोकार्पण के बाद आयोजित काव्य गोष्ठी कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही, जिसमें विभिन्न कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रशांत साहू ने नारी शक्ति पर आधारित रचना “नारी नर की ताकत है…” प्रस्तुत की, वहीं हंसराज बारासा ने अपनी पंक्तियों “वो जब भी बोलता है, अपने लफ्जों को तोलता है…” से गहरी छाप छोड़ी।
अशफाक अहमद फौजदार ने इश्क की भावनाओं को शब्द देते हुए कहा—
“दुनिया वालों राहे इश्क में दुश्वारी क्या…”
दीपा परिहार की पंक्तियाँ—
“मन मत भारी रख, दुनियादारी रख…”
श्रोताओं के दिल को छू गईं।
राखी पुरोहित ने ‘कहकशां’ शीर्षक से प्रेरित रचना प्रस्तुत कर कार्यक्रम में विशेष आकर्षण जोड़ा, जबकि स्वयं संजीदा खानम शाहीन ने अपनी भावनात्मक रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
मनशाह नायक की ग़ज़लों ने बांधा समां
कार्यक्रम के संचालक और प्रसिद्ध शायर मनशाह “नायक” ने अपनी ग़ज़लों से महफिल में चार चांद लगा दिए। उनकी ग़ज़ल ‘धूप’ जब उन्होंने मधुर स्वर में प्रस्तुत की, तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनकी दूसरी ग़ज़ल भी जीवन के यथार्थ से जुड़ी हुई थी, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।
आशु कविताओं ने दिखाई प्रतिभा की चमक
दीपा टाक ने आशु कविताएं प्रस्तुत कर अपनी रचनात्मक क्षमता का परिचय दिया। दर्शकों की फरमाइश पर तुरंत कविता रचकर सुनाना उनके कौशल को दर्शाता है, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
इन रचनाकारों ने भी किया काव्य पाठ
कार्यक्रम में कुंतल हर्ष, डॉ. हस्तीमल आर्य, दिलीप कुमार पुरोहित, दशरथ कुमार सोलंकी, युवा कवि कल्याण विश्नोई, शायर अरमान जोधपुरी, बाड़मेर के हास्य कवि प्रताप पागल, वरिष्ठ शायर रजा मोहम्मद खान सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
प्रत्येक रचना में समाज, जीवन, प्रेम, संघर्ष और संवेदनाओं के विभिन्न आयाम देखने को मिले, जिसने कार्यक्रम को बहुआयामी बना दिया।
सफल संचालन और धन्यवाद ज्ञापन
कार्यक्रम का सफल और प्रभावी संचालन प्रसिद्ध शायर मनशाह “नायक” ने किया। उनकी शैली ने पूरे कार्यक्रम को सहज और आकर्षक बनाए रखा।
अंत में उदीयमान कवयित्री अमिता भंडारी ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।
गणमान्य नागरिकों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर महेश पंवार, अब्दुल कयूम, अशफाक रंगरेजा, गायक शब्बीर हुसैन, सलीम खान, इंसाफ अली, तरुण जोशी, ग़ज़ल गायक सुरेश कुमार, वरिष्ठ कथाकार हरिप्रकाश राठी, कौशल्या अग्रवाल, साजिदा खानम तथा मोहम्मद आतिफ खान सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
साहित्य के आकाश में चमकती ‘कहकशां’
समग्र रूप से देखा जाए तो ‘कहकशां’ केवल एक काव्य संकलन नहीं, बल्कि साहित्य के आकाश में चमकती एक ऐसी आभा है, जिसमें 50 रचनाकारों की संवेदनाएं, विचार और अभिव्यक्तियां एक साथ झिलमिलाती नजर आती हैं।डॉ. संजीदा खानम “शाहीन” का यह प्रयास न केवल सराहनीय है, बल्कि आने वाले समय में साझा साहित्यिक संकलनों के लिए प्रेरणा भी बनेगा। यह संकलन यह संदेश देता है कि जब विविध आवाजें एक मंच पर आती हैं, तो साहित्य का दायरा और भी विस्तृत हो जाता है।
















