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Wednesday, July 8, 2026, 11:36 pm

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देश में भीषण गर्मी में गहराया जल संकट: आधे से ज्यादा जलाशय खाली, फिर भी नहीं थम रही पानी की बर्बादी

कम बारिश, बढ़ती लू और गिरता जलस्तर बना चिंता का विषय, प्रशासन सख्ती के मूड में, आमजन से भी जिम्मेदारी निभाने की अपील

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर/नई दिल्ली

9783414079 diliprakhai@gmail.com

देश इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है और इसके साथ ही जल संकट भी गंभीर रूप लेता जा रहा है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि एक ओर जहां जलाशयों का जलस्तर लगातार गिर रहा है, वहीं दूसरी ओर लोग पानी की बर्बादी से बाज नहीं आ रहे हैं। यह स्थिति आने वाले समय में और भयावह हो सकती है।

ताजा आंकड़ों और रिपोर्ट्स के अनुसार, देश के आधे से अधिक जलाशयों में पानी का स्तर 40 प्रतिशत से भी नीचे पहुंच चुका है। खासतौर पर पूर्वी भारत के कुछ राज्यों, विशेषकर पश्चिम बंगाल में स्थिति बेहद गंभीर बताई जा रही है।

कम बारिश और बढ़ती गर्मी ने बढ़ाई परेशानी

India Meteorological Department के अनुसार, 1 मार्च से 29 अप्रैल के बीच देश के एक-तिहाई से अधिक हिस्सों में सामान्य से कम या लगभग नगण्य वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में प्री-मानसून बारिश की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन यह पूरे देश के लिए राहत देने के लिए पर्याप्त नहीं है।

गर्मी अपने चरम पर है और कई राज्यों में लू (हीटवेव) की स्थिति बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो आने वाले हफ्तों में जलाशयों का जलस्तर और नीचे जा सकता है, जिससे पेयजल संकट और गहरा सकता है।

जलाशयों में घटता जलस्तर: चेतावनी की घंटी

देश के प्रमुख बांधों और जलाशयों में पानी की कमी अब साफ दिखाई देने लगी है। जल संसाधन विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक मौसमी समस्या नहीं, बल्कि दीर्घकालिक जल प्रबंधन की विफलता का संकेत भी है।

  • कई जलाशयों में पानी 40% से नीचे
  • कुछ क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति प्रभावित
  • ग्रामीण इलाकों में टैंकरों पर निर्भरता बढ़ी

एक ओर संकट, दूसरी ओर बर्बादी

जहां एक ओर देश के कई हिस्सों में लोग पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग अभी भी पानी की बर्बादी कर रहे हैं।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि:

  • लोग पेयजल से ही पाइप लगाकर वाहन धो रहे हैं
  • घरों में टंकियां ओवरफ्लो होती रहती हैं
  • नलों से लगातार पानी टपकता रहता है
  • सड़क पर पाइप से पानी बहाकर सफाई की जाती है

यह लापरवाही जल संकट को और गंभीर बना रही है।

जुर्माने के बावजूद नहीं सुधर रहे लोग

कई राज्यों में पानी की बर्बादी रोकने के लिए जुर्माने का प्रावधान किया गया है:

  • बेंगलुरु: ₹5,000
  • गुड़गांव: ₹5,000
  • राजस्थान: ₹1,000
  • हैदराबाद: ₹10,000 तक जुर्माना

बार-बार नियम तोड़ने पर पानी का कनेक्शन काटने तक की चेतावनी दी गई है। इसके बावजूद लोग पाइप से वाहन धोने और पानी बहाने से बाज नहीं आ रहे हैं।

प्रशासन को सख्ती की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अपील करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सख्त कार्रवाई जरूरी है। नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम को इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।

प्रशासनिक स्तर पर जरूरी कदम:

  1. टपकते नल और पाइप को 48 घंटे में ठीक करना अनिवार्य हो
  2. समय पर मरम्मत न करने पर जुर्माना लगाया जाए
  3. नल खुला छोड़ने वालों पर सख्त पेनल्टी
  4. टंकी ओवरफ्लो होने पर तुरंत कार्रवाई
  5. हर घर में ऑटोमैटिक फ्लोट वाल्व अनिवार्य
  6. पानी को नाली में बहाने पर रोक
  7. पाइप से वाहन धोने पर प्रतिबंध
  8. हर घर में वाटर मीटर लगाना जरूरी
  9. निगरानी के लिए जल समिति का गठन
  10. वर्षा जल संचयन अनिवार्य किया जाए

आमजन भी निभाएं अपनी जिम्मेदारी

जल संकट केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी।

पानी बचाने के आसान उपाय:

  1. टपकते नल को तुरंत ठीक करवाएं
  2. पाइपलाइन लीकेज की मरम्मत कराएं
  3. ब्रश करते समय नल बंद रखें
  4. दाढ़ी बनाते समय कम पानी का उपयोग करें
  5. कपड़े धोते समय पानी का पूरा उपयोग करें
  6. वाहन धोने के लिए बाल्टी का उपयोग करें
  7. वर्षा जल संचयन अपनाएं
  8. पौधों को सुबह या शाम पानी दें
  9. इस्तेमाल किया गया हल्का पानी दोबारा उपयोग करें
  10. दूसरों को भी जागरूक करें

जल संरक्षण: आज की जरूरत, कल की सुरक्षा

जल ही जीवन है—यह केवल कहावत नहीं, बल्कि आज की सच्चाई है। जिस तरह से जल संकट गहराता जा रहा है, वह आने वाले समय के लिए खतरे की घंटी है।

अगर आज भी हम नहीं चेते, तो भविष्य में:

  • पीने के पानी के लिए संघर्ष बढ़ेगा
  • कृषि प्रभावित होगी
  • स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ेंगी

समझदारी: हर बूंद की कीमत समझें

देश आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां जल संरक्षण केवल विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है। एक ओर प्रकृति का असंतुलन और कम बारिश है, तो दूसरी ओर मानवीय लापरवाही।

जरूरत है कि:

  • प्रशासन सख्त कदम उठाए
  • कानूनों का पालन हो
  • और सबसे जरूरी—हर व्यक्ति पानी की कीमत समझे

क्योंकि अगर आज हमने पानी नहीं बचाया, तो कल पानी हमें नहीं बचा पाएगा।

जोधपुर में पानी का संकट गहराया : लोग हरकतों से नहीं आ रहे बाज

जोधपुर में इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) में क्लोजर को देखते हुए पानी का संकट गहरा गया है। पानी की किल्लत कम करने के लिए, प्रशासन ने कायलाना और तखतसागर जैसी मुख्य डिग्गियों का भंडारण किया है, तथा 1 दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति का निर्णय लिया गया है, जिसमें टैंकर सुविधा भी शामिल है। कई इलाकों से शिकायतें मिल रही है कि एकांतरे पानी की सप्लाई का सिस्टम गड़बड़ा गया है। जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन मिलकर पानी की चोरी रोकने और टैंकर माफिया पर लगाम कसने के लिए विशेष निगरानी कर रहे हैं, ताकि आम लोगों को परेशानी न हों।ग्रामीण क्षेत्रों की ज़रूरतों को पूरा करने में जलदाय विभाग को पसीना आ रहा है। लेकिन पानी की बर्बादी का सिलसिला थम नहीं रहा है। एक तरफ शहर और ग्रामीण इलाकों में जल संकट की स्थिति है, वहीं दूसरी तरफ पानी की बर्बादी भी रुक नहीं रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि पानी की बर्बादी रोक और बूंद-बूंद पानी को बचाए ताकि पानी का सदुपयोग हो सकें।
Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor