कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. त्रिलोक चंद सेन ने की। मुख्य अतिथि डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’ थी। अति विशिष्ट अतिथि डॉ. सुधीर श्रीवास्तव थे। सरस्वती वंदना दिलीप कुमार शर्मा ने की। गणेश वंदना/स्वागत गीत डॉ. शशि जायसवाल “चंद्रिका”, प्रयागराज ने प्रस्तुत किया। स्वागत भाषण संस्थापक आर.एम. लाल ने प्रस्तुत किया। संचालन प्रथम सत्र में सुधीर श्रीवास्तव “यमराज मित्र”, गोंडा ने किया। द्वितीय सत्र का संचालन दीपा शर्मा ‘उजाला’ ने किया।
राखी पुरोहित. जोधपुर
डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’ के जन्मोत्सव पर रायबरेली काव्य रस साहित्य मंच राजस्थान इकाई द्वारा ऑनलाइन राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी आयोजित की गई।जोधपुर निवासी, सुप्रसिद्ध शायरा, चिकित्सक एवं केंद्रीय पटल प्रभारी डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’ के जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर रायबरेली काव्य रस साहित्य मंच, राजस्थान इकाई द्वारा भव्य ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम बिना किसी व्यवधान के चरम उत्कर्ष तक पहुँचा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. त्रिलोक चंद सेन ने की। मुख्य अतिथि डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’ थी। अति विशिष्ट अतिथि डॉ. सुधीर श्रीवास्तव थे। सरस्वती वंदना दिलीप कुमार शर्मा ने की। गणेश वंदना/स्वागत गीत डॉ. शशि जायसवाल “चंद्रिका”, प्रयागराज ने प्रस्तुत किया। स्वागत भाषण संस्थापक आर.एम. लाल ने प्रस्तुत किया। संचालन प्रथम सत्र में सुधीर श्रीवास्तव “यमराज मित्र”, गोंडा ने किया। द्वितीय सत्र का संचालन दीपा शर्मा ‘उजाला’ ने किया।
कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. त्रिलोक चंद सेन की अनुमति से गोष्ठी का शुभारंभ हुआ। वरिष्ठ साहित्यकार ऊषा सूद ने आशीर्वचन स्वरूप डॉ. शाहीन को समर्पित पंक्तियाँ प्रस्तुत कीं: “सागर में एक लहर तेरे नाम की, तुझे मुबारक आज घड़ी सुबह शाम की” तत्पश्चात माँ पर मार्मिक रचना “मौत के लिए बहुत सस्ते, पर जन्म देने के लिए माँ है, हमसे पहला परिचय माँ कराती है” प्रस्तुत की।
रचनाकार एवं उनकी प्रस्तुतियां
– संस्थापक डॉ. शिवनाथ सिंह ‘शिव’: मुक्तक पाठ
– डॉ. सुधीर श्रीवास्तव: मुक्तकों से कार्यक्रम में चार चाँद लगाए
– दिलीप कुमार शर्मा “आपका सुखी रहे संसार, सरगम से सजे और महके जीवन बारम्बार”
– अविनाश खरे “एक नया सवेरा, एक नया संकल्प, एक नई किरण आपके जीवन को रोशन करे”
– मीडिया प्रभारी राम लखन वर्मा: दोहे — “जन्म दिवस है आपका लगता है कुछ खास, खुशियों की बरसात हो ऐसा है विश्वास”
– डॉ. शशि जायसवाल ‘चंद्रिका’: सुंदर रचना प्रस्तुति
– महेंद्र भट्ट गद्य व्यंग्यात्मक हास्यप्रद ‘चिंकुटी’ — “अनवरत संघर्ष करता रहा, जान की परवाह किए बिना धूल चटाता रहा”
– अवधेश “साहित्य में सभी विधाओं की बहिन संजीदा खान है, इनसे साहित्य जगत की शान है” एवं माँ पर मार्मिक रचना
– कुंतल हर्ष “जन्मदिन है आपका बड़ा शुभ, दिन आपका सफलता का परचम लहराए” एक आलीशान_“अकेलापन… घर बहुत बड़ा बना लिया, बड़े शौक से अपनों को उसमें सजा लिया”
-डॉ. विजयलक्ष्मी ‘अनाम अपराजिता’: शुभकामनाएं एवं माँ को समर्पित रचना
– जनकवि सुखराम सुंदर रचना
– छोटे लाल “माँ के आँचल की छाया, सुखद शीतल छाँव मिले”
– रामदेव ‘राही’ ग़ज़ल — “महफिलें दिल में उम्मीदों की शमा जलाती रही, ग़म का साया तक ना आए ये है राही की दुआ”
– दीपा एवं राम मनोहर लाल सुंदर रचना प्रस्तुति
– मीना रावलानी “क्या देखा है माँ को खुद की परवाह कभी करते हुए”
– सुधीर श्रीवास्तव “माँ की ममता है बड़ी अपार, पूर्ण हुआ इससे उद्धार”
मुख्य अतिथि डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’ ने ‘धरती धोरा रि राजस्थान रि माटी’ को समर्पित रचना एवं तरन्नुम में एक सुंदर ग़ज़ल प्रस्तुत की। अपनी पुस्तक ‘कहकशां’ से रचना पढ़ी: “कहकशां तेरी मेरी बातों का, तेरा साथ हो दिलकश नज़ारा हो, माहौल में खुशनुमा रंगीनी छा गई” अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. त्रिलोक चंद सेन ने कार्यक्रम की सफलता का श्रेय सभी पदाधिकारियों एवं साहित्यकारों को दिया। राम मनोहर लाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया एवं रामदेव राही ने भविष्य में पुनः गोष्ठी आयोजन की अभिलाषा के साथ कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की। पटल पर प्रेषित शुभकामनाएं
पत्रकार जे.पी.शर्मा जयपुर काव्यस्थली मंच के संस्थापक ने सुंदर शब्दों के मोती से रचित विचार प्रेषित। गज़ल गुरु मनशाह नायक, डॉ. हस्तमल आर्य, राखी पुरोहित, डॉ. शरीफ द्वारा सुंदर रचनाएं एवं शुभकामना संदेश प्रेषित किए गए।
नन्हा कलमकार मोहम्मद आतिफ खान — डॉ. शाहीन जी के सुपुत्र — ने माँ पर मार्मिक रचना भेजी: “माँ तुम तो अलार्म हो, जागती हो रातों को, दर्द छुपाती हो और दिन में कामों की आड़ में मुस्काती हो” कार्यक्रम में माँ, जन्मोत्सव, राजस्थान की माटी एवं मानवीय संवेदनाओं पर केंद्रित रचनाओं की प्रधानता रही। ‘सत्ता अनुकूल’ से ‘माँ अनुकूल’ तक की यात्रा इस गोष्ठी में तय हुई।









