अंतरराष्ट्रीय नर्सेज दिवस पर आज एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर में एमजीएच जोधपुर की वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी श्रीमती तेज कंवर सांखला को राज्यस्तरीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया।
राखी पुरोहित. जयपुर
अंतरराष्ट्रीय नर्सेज दिवस पर आज एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर में एमजीएच जोधपुर की वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी श्रीमती तेज कंवर सांखला को राज्यस्तरीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में बलवंत सिंह, विशेष सहायक मंत्री चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, राकेश शर्मा, संयुक्त शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, श्रीमती जोइस कुरियन, रजिस्ट्रार राजस्थान नर्सिंग कौंसिल तथा संजय सक्सेना, संयुक्त निदेशक रजिस्ट्रार राजस्थान नर्सिंग कौंसिल मंच पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन राजस्थान नर्सिंग कौंसिल, जयपुर द्वारा किया गया। गाइडलाइन के साथ इस वर्ष की थीम “Our Nurses, Our Future – Empowered Nurses Save Lives” पर कार्यक्रम आयोजित हुआ।
सेवा की मिसाल बनीं जोधपुर की बेटी तेज कंवर की प्रमुख उपलब्धियां:
1. थैलेसीमिया बच्चों की ‘माँ’: राज्य सरकार की थैलेसीमिया कुटुंब योजना के तहत अस्पताल में भर्ती थैलेसीमिया पीड़ित नन्हें बच्चों की सेवा के साथ रोजाना फल और बिस्किट की व्यवस्था कर माँ की तरह स्नेह व देखभाल दी।
2. CPR की पाठशाला: अस्पताल के साथ गांव-ढाणी तक महिलाओं-गृहणियों को CPR का प्रशिक्षण दिलाकर तैयार किया, ताकि आपात परिस्थिति में महिला अपना परिवार की रक्षा कर सके। इस तरह सैकड़ों लोगों को जीवन रक्षक बनाया।
3. मरीजों के लिए पौष्टिक भोजन: किचन विभाग प्रभारी के रूप में सुनिश्चित किया कि हर मरीज तक समय पर गर्म, पौष्टिक और उपचार में सहायक भोजन पहुंचे। साथ ही किचन गार्डन में परिंडे लगाकर पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था प्रतिदिन की जाती है तथा किचन विभाग परिसर में बहुत सारे हरे-भरे पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
4. आपदा में बनीं ढाल: भूंगरा अग्निकांड, माता का थान हादसा व जैसलमेर बस दुर्घटना में ड्यूटी के साथ अतिरिक्त समय दिया। घायल मरीजों के परिजनों के साथ खड़ी रहीं, उन्हें ढांढस बंधाया और परिजनों के लिए भी भोजन व पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाया ताकि वे अपने मरीजों की सेवा निश्चिंत होकर कर सकें। गंभीर झुलसे मरीजों के लिए विशेष प्रोटीन डाइट की व्यवस्था भी करवाई।
5. वृद्धजनों की सेवा: अस्पताल में भर्ती असहाय वृद्ध मरीजों की विशेष देखभाल के साथ वृद्धाश्रम जाकर वृद्धजनों की सेवा की। समय-समय पर उनके लिए पौष्टिक आहार की व्यवस्था करवाई और अपनों जैसा अपनापन दिया।
6. दिव्यांगों की संबल: दिव्यांग जनसंस्थान जाकर दिव्यांगजनों की सेवा की। दिव्यांग मरीजों की तकलीफ समझकर उनके लिए अस्पताल में विशेष व्यवस्था के साथ दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाने व रिन्यूअल करवाने में स्वयं साथ रहकर पूरी मदद की। जरूरतमंद दिव्यांगों को ट्राईसाइकिल दिलाने में मदद की और उनकी हर संभव सहायता कर तकलीफों से बचाया।
7. 27 वर्ष की तपस्या: कोविड-19 महामारी में अपनी माता एवं दो मामा के निधन का गहरा दुख झेलने के साथ भी एक दिन का अवकाश लिए बिना मरीजों की सेवा में डटी रहीं।
8. अस्पताल से बाहर भी सेवा: लम्पी बीमारी के दौरान गौशालाओं में चारा व पानी की व्यवस्था के साथ आज भी समय-समय पर गौशालाओं में गौ माता के लिए पौष्टिक आहार, खाने व पानी की व्यवस्था करवाती हैं। साथ ही प्रति वर्ष स्कूल, अस्पताल व गौशालाओं में हजारों पौधे लगाकर ये पुण्य कार्य अनवरत आज दिनांक तक पर्यावरण बचाने के लिए जारी है।
9. महिला सशक्तिकरण व शिक्षा: कई सामाजिक संस्थाओं के साथ जुड़कर महिलाओं को रोजगार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में भी कई संस्थाओं के साथ मिलकर जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा से जोड़ने व शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध करवाने का कार्य निरंतर कर रही हैं।
10. स्वास्थ्य जागरूकता व अंगदान प्रेरणा: समय-समय पर चिकित्सा शिविर आयोजित कर लोगों को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करती हैं। साथ ही अंगदान, देहदान व नेत्रदान के प्रति लोगों में फैली भ्रांतियों को दूर कर, उन्हें समझाकर व प्रेरित कर इस महादान के लिए आगे लाने का पुण्य कार्य भी निरंतर कर रही हैं।
11. सामाजिक सरोकार: स्लम एरिया में जाकर नशा मुक्ति अभियान चलाकर लोगों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करती हैं। साथ ही वहां के बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहित कर अच्छी आदतें, संस्कार व गुड हैबिट्स सिखाने का कार्य सामाजिक सरोकार के तहत निरंतर कर रही हैं।
12. कुरीति उन्मूलन: सामाजिक सरोकार के तहत मृत्युभोज प्रथा का खुलकर विरोध करती हैं। मृत्यु के बाद होने वाले मृत्युभोज को बंद करने के लिए जन-जन तक पहुंचकर, विशेषकर महिलाओं को समझाकर व प्रेरित कर इस सामाजिक कुरीति को समाप्त करने का कार्य कर रही हैं। साथ ही सामूहिक संस्थाओं के साथ मिलकर कम खर्च में परंपरा निभाने के लिए भी लोगों को प्रेरित कर रही हैं।
इनकी निस्वार्थ सेवा के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने प्रशंसा पत्र भेजा तथा वर्ष 2025 में हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के साथ राष्ट्रीय स्तर पर मेडल व प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया।”सेवा ही धर्म” को जीने वाली जोधपुर की बेटी तेज कंवर ने पूरे राजस्थान का गौरव बढ़ाया है।




