सैकड़ों वर्षों के इतिहास, कला व संस्कृति को समेटे है मेहरानगढ़ दुर्ग म्यूजियम
सुनील वर्मा. जोधपुर
विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर मेहरानगढ़ म्यूजियम में सोमवार को म्यूजियम देखने आने वाले पर्यटकों का स्वागत किया गया। साथ ही म्यूजियम के इतिहास व संस्कृति के बारे में बेहतरीन जानकारी दी गई।
मेहरानगढ़ म्यूजियम की क्यूरेटर डॉ. सुनयना राठौड़ ने बताया कि विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर मेहरानगढ दुर्ग में म्यूजियम देखने वाले पर्यटकों को विशेष रूप से म्यूजियम के इतिहास, कला, साहित्य व संस्कृति से जुड़ी प्रदर्शित वस्तुओं और स्थापत्य कला के बारे में विशेष जानकारी दी गई ।
प्रतिवर्ष 12-13 लाख पर्यटक आते हैं मेहरानगढ़ म्यूजियम देखने
डॉ. राठौड़ ने बताया कि पूर्व नरेश गज सिंह के संरक्षण में मार्च 1972 में मेहरानगढ़ म्यूजियम संग्रहालय का शुभारंभ हुआ था । प्रतिवर्ष 12-13 लाख देसी व विदेशी पर्यटक मेहरानगढ़ दुर्ग स्थित म्यूजियम को देखने आते हैं ।इसकी स्थापत्य कला व प्रदर्शित वस्तुओं के इतिहास के बारे में सराहना करते हैं । मेहरानगढ़ म्यूजियम में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक वस्तुएं, अस्त्र-शस्त्र कटारें, बंदूकें, ढालें -तलवारें, तीर कमान , बख्तर बंद, हाथियों के हौदे, गणगौर, प्राचीन राजसी वस्तुएं, रंग चित्र, रेखाचित्र, छायाचित्र व्यक्ति चित्र, ललित कला सामग्री, विभिन्न अलंकृत कला वस्तुएं, हस्त लिखित ग्रंथ व मुद्रित पुस्तक हैं । म्यूजियम देखने आने वाले पर्यटक म्यूजियम में प्रदर्शित वस्तुओं के इतिहास को जानकर रोमांचित होते हैं। जोधपुर का मेहरानगढ़ म्यूजियम एक बेहतरीन म्यूजियम के रूप में विश्व के संग्रहालयों में शुमार होता है ।
कई खंडों में बंटा हुआ है मेहरानगढ़ म्यूजियम
मेहरानगढ़ म्यूजियम कई खंडों में बंटा हुआ है, जिसमें शाही परिवारों की जीवन शैली और शौर्य की झलक मिलती है । इसमें दौलत खाना (शस्त्रागार ) इस खंड में मुगल और राजपूत काल के हथियारों का शानदार संग्रह है । महाराजा अजीत सिंह की दो धारी तलवार और जालौर विजय के दौरान प्राप्त गजनी खां नामक ऐतिहासिक तोप शामिल है जिसका मुंह अजगर के समान है । हाथी हौदा और पालकी खंड में विभिन्न प्रकार के हाथियों पर बैठने का होदा और शाही सवारी पालकी को प्रदर्शित किया गया है । चित्रशाला पेंटिंग में मारवाड़, मुगल और किशनगढ़ शैली की लघु चित्रों का एक विशाल संग्रह है इसमें महलों के उत्सव और रामायण जैसे महाकाव्य के दृश्य उकेरे गए हैं। म्यूजियम में वस्त्र और दरबारी पोशाक के खंड में राजपूत काल के शाही वस्त्र, पगड़िया और कालीन प्रदर्शित है । टेंट और सामियाने के खंड में मुगल व राजपूती शैली के शाही टेंट का बेहतरीन संग्रह जो युद्ध और शाही यात्राओं के समय उपयोग में किए जाते थे ।म्यूजियम में मेटल फ्रेम और नकाशेदार पत्थरों से बने बहुत खूबसूरत पारंपरिक झूले रखे गए जो मानसून और उत्सवों के दौरान होते थे । भव्य महल संग्रहालय का हिस्सा कई ऐसे ऐतिहासिक और नक्काशीदार महल भी है जिसमें फूल महल, सोने की नक्काशी और शीशे का अद्भुत काम किया गया है, मोती महल दरबार कक्ष, शीश महल है । मेहरानगढ़ म्यूजियम केवल ऐतिहासिक वस्तुओं को रखने का स्थान नहीं है बल्कि संस्कृति का एक जीवन्त केंद्र भी है ।






