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Thursday, July 9, 2026, 2:35 am

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जीवन बचाने की कला सिखाएंगे ‘सीपीआर मैन’, रिजर्व बैंक कर्मियों को मिलेगा आपातकालीन प्रशिक्षण

अचानक कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में “गोल्डन मिनट्स” बन सकते हैं जीवनदान

दिलीप कुमार पुरोहित. जयपुर

आधुनिक जीवनशैली, तनाव, अनियमित खानपान और बढ़ती हृदय संबंधी बीमारियों के बीच अब सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। इसी कड़ी में देशभर में “सीपीआर मैन” के नाम से प्रसिद्ध सामाजिक जागरूकता अभियान से जुड़े प्रशिक्षक बुधवार और बृहस्पतिवार को जयपुर में भारतीय रिजर्व बैंक के कर्मियों को सीपीआर का विशेष प्रशिक्षण देंगे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल एक तकनीकी अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि समय रहते मरीज को सही तरीके से सीपीआर दिया जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। कई बार एंबुलेंस या डॉक्टर के पहुंचने से पहले ही मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसे समय में सामान्य व्यक्ति द्वारा दिया गया सीपीआर जीवन और मृत्यु के बीच निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

क्या है सीपीआर और क्यों जरूरी है इसकी जानकारी

सीपीआर यानी कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन एक ऐसी आपातकालीन प्रक्रिया है, जिसमें मरीज की सांस और हृदय गति रुक जाने पर छाती को दबाकर तथा कृत्रिम सांस देकर रक्त और ऑक्सीजन का प्रवाह बनाए रखने का प्रयास किया जाता है। प्रो. राजेन्द्र तातेड़ बताते हैं कि कार्डियक अरेस्ट के बाद हर गुजरता मिनट मरीज के बचने की संभावना को लगभग 7 से 10 प्रतिशत तक कम कर देता है। ऐसे में यदि आसपास मौजूद लोगों को सीपीआर का प्रशिक्षण हो तो वे तुरंत मदद कर सकते हैं।
प्रो. राजेन्द्र तातेड़ ने बताया कि आज के समय में स्कूलों, कॉलेजों, कार्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में सीपीआर प्रशिक्षण को अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है। विकसित देशों में यह प्रशिक्षण आम नागरिकों के लिए भी अनिवार्य किया जा रहा है, ताकि आपात स्थिति में हर व्यक्ति “फर्स्ट रिस्पॉन्डर” की भूमिका निभा सके।

कार्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में बढ़ रही जागरूकता

प्रो. राजेन्द्र तातेड़ ने बताया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जैसे महत्वपूर्ण संस्थान द्वारा अपने कर्मचारियों के लिए यह प्रशिक्षण आयोजित करना इस बात का संकेत है कि अब संस्थान केवल कार्यक्षमता ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा और आपातकालीन तैयारियों को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े कार्यालयों में प्रतिदिन हजारों कर्मचारी कार्य करते हैं। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी, आगंतुक या आमजन को अचानक स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़े तो प्रशिक्षित कर्मचारी तुरंत सहायता उपलब्ध करा सकते हैं।

सीपीआर प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कार्डियक अरेस्ट की पहचान, सही तरीके से चेस्ट कंप्रेशन देने, आपातकालीन सहायता बुलाने तथा मरीज की स्थिति को स्थिर रखने की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण में डमी मॉडल और लाइव डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से अभ्यास भी कराया जाएगा।

समाज में “सीपीआर संस्कृति” विकसित करने की जरूरत

प्रो. राजेन्द्र तातेड़ ने बताया कि भारत में सड़क दुर्घटनाओं, हार्ट अटैक और अचानक बेहोशी जैसी घटनाओं में बड़ी संख्या में लोग केवल इसलिए जान गंवा देते हैं क्योंकि आसपास मौजूद लोगों को प्राथमिक उपचार और सीपीआर की जानकारी नहीं होती। यदि समाज में सीपीआर को लेकर व्यापक जागरूकता फैलाई जाए तो हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है।

जयपुर में आयोजित होने वाला यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं, बल्कि समाज में स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश देने वाला अभियान भी माना जा रहा है। प्रो. राजेन्द्र तातेड़ का कहना है कि जिस दिन आम नागरिक बिना डर और झिझक के जरूरतमंद व्यक्ति को सीपीआर देने लगेंगे, उस दिन अनेक परिवार अपने प्रियजनों को असमय खोने से बचा सकेंगे।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor