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जनगणना के नाम पर बढ़ रहा साइबर और डोर-टू-डोर फ्रॉड का खतरा

फर्जी अधिकारी, नकली वेबसाइट और वायरल मैसेज से रहें सावधान, बैंक डिटेल्स साझा करना पड़ सकता है भारी
जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा, विशेषज्ञों ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

भारत में जनगणना की प्रक्रिया चल रही है और इसके साथ ही देशभर में लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता भी तेजी से महसूस की जा रही है। जहां एक ओर सरकार घर-घर जाकर नागरिकों से आंकड़े एकत्रित कर रही है, वहीं दूसरी ओर ठग और साइबर अपराधी भी सक्रिय हो गए हैं। जनगणना के नाम पर लोगों से निजी जानकारी, बैंक डिटेल्स और ओटीपी हासिल करने के प्रयास सामने आने लगे हैं। सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप, फर्जी वेबसाइट और नकली अधिकारियों के माध्यम से लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल सामान्य ठगी नहीं, बल्कि एक संगठित साइबर और सामाजिक धोखाधड़ी का हिस्सा हो सकता है। ऐसे में नागरिकों के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि वास्तविक जनगणना प्रक्रिया कैसी होती है और किन बातों से सतर्क रहना चाहिए।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं फर्जी मैसेज

पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सऐप पर कई तरह के संदेश वायरल हुए हैं, जिनमें दावा किया गया कि जनगणना के नाम पर कुछ लोग घरों में प्रवेश कर चोरी या ठगी कर रहे हैं। कई संदेशों में गृह मंत्रालय का नाम लेकर डर पैदा करने की कोशिश भी की गई। हालांकि ऐसे कई दावे बाद में फर्जी साबित हुए, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मैसेज लोगों की चिंता बढ़ाकर ठगों के लिए माहौल तैयार करते हैं।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ठग पहले अफवाह फैलाते हैं और फिर लोगों के डर का फायदा उठाकर उन्हें अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। यही कारण है कि किसी भी वायरल मैसेज को बिना जांचे-परखे आगे भेजना भी खतरनाक साबित हो सकता है।

जनगणना के नाम पर किन जानकारियों की मांग नहीं की जाती

विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक जनगणना प्रक्रिया में किसी भी नागरिक से बैंकिंग या आर्थिक जानकारी नहीं मांगी जाती। सरकारी कर्मचारी केवल सामान्य सामाजिक और पारिवारिक जानकारी लेते हैं, जैसे—

  • परिवार में कितने सदस्य हैं
  • घर की स्थिति कैसी है
  • शिक्षा और रोजगार से जुड़ी सामान्य जानकारी
  • निवास संबंधी विवरण

इसके अलावा किसी भी व्यक्ति से निम्न जानकारी नहीं मांगी जाती—

  • बैंक खाता नंबर
  • एटीएम या डेबिट कार्ड डिटेल्स
  • ओटीपी
  • यूपीआई पिन
  • इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड
  • आधार या पैन की फोटोकॉपी
  • किसी प्रकार की फीस या नकद राशि

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति जनगणना अधिकारी बनकर ऐसी जानकारी मांगता है, तो वह स्पष्ट रूप से संदिग्ध है।

कैसे काम करते हैं ठग

साइबर अपराधी और फर्जी एजेंट अलग-अलग तरीकों से लोगों को निशाना बनाते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि कुछ लोग सरकारी कर्मचारी बनकर घर-घर पहुंचते हैं। वे पहचान पत्र जैसा दिखने वाला नकली कार्ड दिखाकर विश्वास जीतने की कोशिश करते हैं। इसके बाद वे “वेरिफिकेशन”, “ऑनलाइन अपडेट” या “डेटा पुष्टि” के नाम पर निजी जानकारी मांगते हैं।

कुछ मामलों में लोगों को एसएमएस, ईमेल या व्हाट्सऐप लिंक भेजे जाते हैं। इनमें कहा जाता है कि जनगणना से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने के लिए लिंक पर क्लिक करें। जैसे ही व्यक्ति लिंक खोलता है, उसका मोबाइल हैक होने या बैंकिंग जानकारी चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है।

कई बार फर्जी मोबाइल ऐप डाउनलोड करवाकर भी लोगों के फोन का एक्सेस लिया जाता है। साइबर अपराधी इस माध्यम से बैंक खाते खाली करने तक की घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं।

असली जनगणना की पहचान कैसे करें

विशेषज्ञों के अनुसार वास्तविक जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह निर्धारित नियमों के तहत होती है। सरकारी कर्मचारी अधिकृत पहचान पत्र के साथ घरों में पहुंचते हैं और सीमित जानकारी ही पूछते हैं। वे किसी प्रकार की आर्थिक लेनदेन या बैंकिंग जानकारी नहीं मांगते।

यदि किसी नागरिक को किसी व्यक्ति पर संदेह हो तो वह—

  • उसका पहचान पत्र ध्यान से देख सकता है
  • स्थानीय प्रशासन या पुलिस से पुष्टि कर सकता है
  • तुरंत जानकारी साझा करने से बच सकता है
  • संदिग्ध गतिविधि होने पर पुलिस को सूचित कर सकता है

प्रशासन का कहना है कि सतर्क नागरिक ही ऐसे अपराधों को रोकने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

बुजुर्ग और ग्रामीण क्षेत्र सबसे अधिक निशाने पर

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ठग सबसे ज्यादा उन लोगों को निशाना बनाते हैं जो डिजिटल जानकारी कम रखते हैं। बुजुर्ग, ग्रामीण क्षेत्र के लोग और पहली बार ऑनलाइन प्रक्रिया का उपयोग करने वाले नागरिक अधिक खतरे में रहते हैं।

अक्सर अपराधी डर या सरकारी कार्रवाई का भय दिखाकर लोगों से तुरंत जानकारी मांगते हैं। कई लोग घबराकर अपनी निजी जानकारी साझा कर देते हैं। विशेषज्ञों ने परिवारों से अपील की है कि वे अपने घर के बुजुर्गों को इस तरह के फ्रॉड के बारे में अवश्य समझाएं।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह

विशेषज्ञों ने लोगों को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतने की सलाह दी है—

  • किसी अनजान व्यक्ति को बैंकिंग जानकारी न दें
  • ओटीपी किसी के साथ साझा न करें
  • किसी संदिग्ध ऐप को डाउनलोड न करें
  • फर्जी लिंक पर क्लिक करने से बचें
  • सरकारी नाम देखकर तुरंत भरोसा न करें
  • पहचान पत्र की पुष्टि करें
  • किसी भी प्रकार की फीस जमा न करें

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की कोई भी प्रक्रिया नागरिकों से फोन पर बैंक पासवर्ड या ओटीपी नहीं मांगती।

पुलिस और प्रशासन ने भी बढ़ाई निगरानी

देश के विभिन्न हिस्सों में साइबर सेल और स्थानीय पुलिस प्रशासन ऐसे मामलों पर नजर बनाए हुए हैं। कई राज्यों में लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति जनगणना के नाम पर ठगी करने की कोशिश करता है तो उसकी तुरंत शिकायत करनी चाहिए। साइबर अपराधों में देरी से शिकायत करने पर नुकसान बढ़ सकता है। इसलिए किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई आवश्यक है।

जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, अपराध के तरीके भी उतने ही आधुनिक होते जा रहे हैं। ऐसे में केवल सरकारी तंत्र पर निर्भर रहने के बजाय नागरिकों को स्वयं जागरूक होना होगा। जनगणना एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य देश की सामाजिक, आर्थिक और जनसंख्या संबंधी जानकारी एकत्रित करना है। लेकिन इसके नाम पर फैल रही ठगी लोगों की सुरक्षा और विश्वास दोनों के लिए चुनौती बनती जा रही है। यदि लोग सतर्क रहें, निजी जानकारी सुरक्षित रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें, तो इस प्रकार के फ्रॉड को काफी हद तक रोका जा सकता है।

□ सचेत रहें :

जनगणना के नाम पर क्या कभी साझा न करें
  • ओटीपी
  • यूपीआई पिन
  • बैंक डिटेल्स
  • एटीएम नंबर
  • इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड
  • आधार या पैन की कॉपी
  • मोबाइल में कोई संदिग्ध ऐप
□ पहचान :
असली जनगणना अधिकारी की पहचान
  • वैध सरकारी पहचान पत्र
  • केवल सामान्य सामाजिक जानकारी
  • कोई बैंकिंग डिटेल नहीं मांगता
  • किसी प्रकार की फीस नहीं लेता
  • सीमित और निर्धारित प्रश्न पूछता है
□ सुरक्षा :
अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति मिले तो क्या करें
  • तुरंत निजी जानकारी देने से बचें
  • पहचान पत्र की जांच करें
  • स्थानीय प्रशासन से पुष्टि करें
  • पुलिस हेल्पलाइन पर शिकायत करें
  • संदिग्ध लिंक या ऐप से दूर रहें
□ परिवार के लिए संदेश :
बुजुर्गों को जरूर बताएं ये बातें
  • ओटीपी किसी को न दें
  • फोन पर बैंक जानकारी साझा न करें
  • सरकारी नाम से आने वाले हर कॉल पर भरोसा न करें
  • किसी अजनबी को मोबाइल न दें
  • किसी भी संदेह की स्थिति में परिवार को तुरंत बताएं
Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor