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आचार्य बालकृष्ण के शब्दों में… “देश बाजार नहीं, परिवार है” : आयुर्वेद, योग और निशुल्क चिकित्सा सेवा को जन-जन तक पहुंचाने में जुटा पतंजलि

आचार्य बालकृष्ण अपने चैनल में कहते हैं— स्वस्थ भारत के लिए योग, आयुर्वेद और सेवा भाव को जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी

हजारों केंद्रों, वैद्यों और टेलीमेडिसिन सेवा के माध्यम से लोगों तक पहुंच रही निशुल्क वैदिक चिकित्सा

विशेष रिपोर्ट. दिलीप कुमार पुरोहित

9783414079 diliprakhai@gmail.com

योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली संस्था पतंजलि आज केवल एक आयुर्वेदिक संस्थान नहीं, बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता और सेवा का व्यापक अभियान बन चुकी है। आचार्य बालकृष्ण अपने यूटयूब चैनल पर संबोधन में कहते हैं कि पतंजलि का उद्देश्य केवल औषधियां बनाना नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक व्यक्ति तक स्वास्थ्य, योग और प्राकृतिक चिकित्सा का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि संस्था ने सनातन संस्कृति की मूल भावना को आगे बढ़ाते हुए लोगों के स्वास्थ्य और राष्ट्रहित दोनों को केंद्र में रखा है।

आचार्य बालकृष्ण कहते हैं कि पतंजलि ने उच्च गुणवत्ता वाली “एविडेंस बेस्ड रिसर्च” यानी वैज्ञानिक शोध आधारित आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण किया है। साथ ही देशभर में हजारों वैद्यों और चिकित्सा केंद्रों के माध्यम से निशुल्क परामर्श सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। उनका कहना था कि आधुनिक जीवनशैली और बढ़ती बीमारियों के दौर में योग और आयुर्वेद केवल उपचार नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन का मार्ग बन सकते हैं।

योग और आयुर्वेद को जनआंदोलन बनाने का प्रयास

आचार्य बालकृष्ण कहते हैं कि पतंजलि ने वर्षों से योग और आयुर्वेद को घर-घर पहुंचाने का प्रयास किया है। संस्था का उद्देश्य केवल बीमारी होने पर उपचार देना नहीं, बल्कि लोगों को ऐसा जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है जिससे वे रोगों से दूर रह सकें।

उन्होंने बताया कि देशभर में हजारों योग कक्षाएं निशुल्क संचालित की जा रही हैं, जहां लाखों लोग प्रतिदिन योगाभ्यास कर अपने स्वास्थ्य में सुधार महसूस कर रहे हैं। योग के माध्यम से मधुमेह, मोटापा, तनाव, उच्च रक्तचाप और जीवनशैली से जुड़ी अनेक समस्याओं में लाभ मिलने की बात भी उन्होंने कही।

आचार्य बालकृष्ण लोगों से आग्रह करते हैं कि यदि उनके आसपास योग कक्षाएं या वैदिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं तो वे उनसे जुड़ें और प्राकृतिक जीवन पद्धति को अपनाएं।

निशुल्क वैद्य परामर्श को बताया बड़ी सेवा

वे कहते हैं कि देशभर में पतंजलि द्वारा बड़ी संख्या में वैद्य सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इन केंद्रों पर योग्य वैद्य लोगों को निशुल्क परामर्श देते हैं। उनका मानना है कि आयुर्वेद केवल औषधियों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन जीने की समग्र पद्धति है।

वे कहते हैं कि कई लोग आर्थिक या अन्य कारणों से चिकित्सालय तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे लोगों के लिए पतंजलि की सेवाएं मददगार साबित हो रही हैं। संस्था ने इस दिशा में ऐसे प्रयास किए हैं कि सामान्य व्यक्ति भी बिना आर्थिक बोझ के स्वास्थ्य संबंधी सलाह प्राप्त कर सके।

आचार्य बालकृष्ण कहते हैं कि स्वास्थ्य सेवा केवल व्यवसाय नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें सेवा भाव और मानवीय दृष्टिकोण भी आवश्यक है।

टेलीमेडिसिन सेवा से घर बैठे मिल रहा परामर्श

आचार्य बालकृष्ण कहते हैं कि आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए पतंजलि ने टेलीमेडिसिन सेवा भी शुरू की है। इसके माध्यम से लोग घर बैठे योग्य वैद्यों से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार मरीज तत्काल चिकित्सकीय सलाह चाहते हैं लेकिन दूरी या समय के कारण चिकित्सालय तक नहीं पहुंच पाते। ऐसी स्थिति में ऑनलाइन परामर्श व्यवस्था उपयोगी सिद्ध हो रही है।

वे बताते हैं कि इस सेवा के तहत लोग फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से अपनी स्वास्थ्य समस्याएं बता सकते हैं। वैद्य मरीज की जानकारी, मेडिकल रिपोर्ट और लक्षणों के आधार पर परामर्श देते हैं। आवश्यकता होने पर औषधियां भी उपलब्ध कराई जाती हैं। आचार्य बालकृष्ण कहते हैं कि इस प्रकार की सेवाएं ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी हैं।

“स्वास्थ्य केवल शरीर नहीं, जीवन शैली है”

अपने संबोधन में आचार्य बालकृष्ण कहते हैं कि स्वास्थ्य का अर्थ केवल रोगमुक्त शरीर नहीं होता। मानसिक शांति, संतुलित आहार, अनुशासित दिनचर्या और सकारात्मक सोच भी स्वस्थ जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं।आज तनाव, अनियमित खानपान और भागदौड़ भरी जिंदगी ने लोगों को अनेक रोगों से घेर लिया है। ऐसे में योग और आयुर्वेद व्यक्ति को केवल शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी मजबूत बनाते हैं।

वक लोगों से आग्रह करते हैं कि सुबह जल्दी उठने, योग करने, सात्विक भोजन अपनाने और प्राकृतिक जीवनशैली की ओर लौटने का प्रयास करें।

सनातन संस्कृति और स्वास्थ्य का गहरा संबंध

आचार्य बालकृष्ण कहते हैं कि भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य को हमेशा आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन से जोड़ा गया है। ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष पहले योग और आयुर्वेद के माध्यम से स्वस्थ जीवन का मार्ग बताया था।वे कहते हैं कि सनातन परंपरा केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और स्वस्थ बनाने की पद्धति भी है। आयुर्वेद में शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर विशेष बल दिया गया है। आचार्य बालकृष्ण कहते हैं कि आधुनिक दुनिया अब धीरे-धीरे योग और आयुर्वेद की महत्ता को समझ रही है। यही कारण है कि विश्व के अनेक देशों में भारतीय योग पद्धति और आयुर्वेद के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है।

सेवा भाव को बताया सबसे बड़ा धर्म

अपने संबोधन में वे कहते हैं कि बार-बार “सेवा” शब्द पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि किसी पीड़ित व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाना सबसे बड़ा पुण्य कार्य है। पतंजलि देश को बाजार नहीं, बल्कि परिवार मानकर कार्य कर रहा है। यही कारण है कि संस्था स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है। वे लोगों से अपील करते हैं कि वे जरूरतमंदों को इन सेवाओं की जानकारी दें ताकि अधिक से अधिक लोग लाभ उठा सकें। आचार्य बालकृष्ण कहते हैं कि यदि किसी व्यक्ति के छोटे से प्रयास से किसी मरीज को राहत मिलती है तो यह मानवता की सच्ची सेवा होगी।

बढ़ती बीमारियों के दौर में आयुर्वेद की ओर लौट रहा समाज

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में लोग प्राकृतिक चिकित्सा और पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में वृद्धि के कारण लोग अब ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जिनमें दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ मिल सके। आचार्य बालकृष्ण कहते हैं कि आयुर्वेद शरीर की प्रकृति के अनुसार उपचार की बात करता है। इसमें रोग के मूल कारण को समझकर जीवनशैली सुधारने पर बल दिया जाता है। वे कहते हैं कि योग और आयुर्वेद को यदि नियमित जीवन का हिस्सा बनाया जाए तो अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है।

समाज में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने की आवश्यकता

वे कहते हैं कि केवल दवाइयों के भरोसे स्वस्थ समाज नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। नियमित योग, संतुलित आहार, सकारात्मक सोच और प्राकृतिक जीवनशैली को अपनाकर व्यक्ति स्वयं को स्वस्थ रख सकता है। आचार्य बालकृष्ण लोगों से आग्रह करते हैं कि वे अपने परिवार, मित्रों और परिचितों को भी योग और आयुर्वेद से जोड़ें। उन्होंने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।

□ सेवा :

पतंजलि की प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं
  • निशुल्क वैद्य परामर्श
  • योग कक्षाओं का संचालन
  • टेलीमेडिसिन सुविधा
  • शोध आधारित आयुर्वेदिक औषधियां
  • ऑनलाइन चिकित्सा सहायता
  • वीडियो कॉल के माध्यम से स्वास्थ्य सलाह

□ योग :

नियमित योग से क्या हो सकते हैं लाभ

  • तनाव में कमी
  • शरीर में ऊर्जा का संचार
  • मोटापा नियंत्रण
  • मधुमेह और रक्तचाप में सहायता
  • मानसिक शांति और एकाग्रता
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार

□ आयुर्वेद :

आयुर्वेद किन बातों पर देता है जोर
  • संतुलित आहार
  • प्राकृतिक जीवनशैली
  • दिनचर्या और ऋतुचर्या
  • रोग के मूल कारण का उपचार
  • शरीर, मन और आत्मा का संतुलन

□ प्रेरक विचार

आचार्य बालकृष्ण के संदेश
  • “देश बाजार नहीं, परिवार है”
  • “स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है”
  • “योग और आयुर्वेद स्वस्थ जीवन का आधार हैं”
  • “सेवा भाव ही सच्ची मानवता है”
  • “रोग से पहले जीवनशैली सुधार जरूरी”

अंत में…योग-आयुर्वेद संतुलित जीवन की दिशा दिखाते हैं…

आज जब दुनिया तनाव, प्रदूषण और जीवनशैली जनित बीमारियों से जूझ रही है, तब योग और आयुर्वेद एक संतुलित जीवन की दिशा दिखाते नजर आते हैं। आचार्य बालकृष्ण का संदेश केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं, बल्कि एक ऐसे जीवन दर्शन की ओर संकेत करता है जिसमें स्वास्थ्य, सेवा, संस्कृति और संवेदना सभी का समावेश हो। पतंजलि द्वारा चलाई जा रही स्वास्थ्य सेवाएं इस बात का उदाहरण हैं कि यदि सेवा भाव के साथ आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान का समन्वय किया जाए तो लाखों लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा सकती हैं। योग, आयुर्वेद और सेवा… यही वह त्रिवेणी है जिसे आचार्य बालकृष्ण स्वस्थ और निरोग भारत का आधार मानते हैं।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor