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Thursday, July 9, 2026, 1:52 am

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Lifestyle

अरंगेत्रम…देवांशी चांडक की दिव्य प्रस्तुति

शिवम् नाट्यालय की 66वीं प्रस्तुति

भगवान पंवार. जोधपुर

शहर के प्रतिष्ठित भरतनाट्यम संस्थान शिवम् नाट्यालय में गौरवपूर्ण क्षण देखने को मिला जब प्रतिभाशाली नृत्यांगना देवांशी चांडक ने अपना अरंगेत्रम सफलतापूर्वक पूर्ण किया। यह शिवम् नाट्यालय का 66वां अरंगेत्रम रहा जो वर्ष 1999 से जोधपुर का प्रथम भरतनाट्यम संस्थान होने का गौरव रखता है।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक पुष्पांजलि से हुई, जिसके बाद क्रमशः अल्लारिपु, जातिस्वरम, शब्दम, वर्णम, पदम, तिल्लाना और अंत में मंगलम की प्रस्तुतियां दी गईं। प्रत्येक प्रस्तुति में देवांशी ने उत्कृष्ट भाव-भंगिमा, लय और तकनीकी कौशल का अद्भुत प्रदर्शन किया।

इन प्रस्तुतियों में विभिन्न रागों— नटई, हेमावती, राग माल्लिका, रेवती और राग बहाग का सुंदर संयोजन देखने को मिला, जबकि तालों में आदि तालम, चतुरस एकम, रूपक तालम और मिश्र चापु का प्रयोग किया गया। संगीत और नृत्य का यह समन्वय दर्शकों के लिए अत्यंत मंत्रमुग्ध कर देने वाला रहा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे घेवरचंद्र सारस्वत, सीआई जोधपुर कमिश्नरेट लेखराज सियाग, ललित व्यास, अनुराग लोहिया, वैभव डोशी ने देवांशी को उसके शानदार प्रदर्शन के लिए हार्दिक बधाई दी। सभी अतिथियों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मेहनत और समर्पण से इस महत्वपूर्ण पड़ाव को सफलतापूर्वक हासिल किया है।

शिवम् नाट्यालय की निर्देशिका एवं गुरु डॉ. मंजूषा चन्द्र भूषण सक्सेना ने भी देवांशी को आशीर्वाद और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्हें देवांशी की उपलब्धि पर अत्यंत गर्व है। उन्होंने बताया कि देवांशी ने वर्षों की कठोर साधना, अनुशासन और समर्पण से इस मुकाम को प्राप्त किया है।

कार्यक्रम के अंत में दर्शकों ने तालियों की गूंज के साथ देवांशी के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की। यह आयोजन न केवल एक विद्यार्थी की सफलता का प्रतीक बना, बल्कि जोधपुर में शास्त्रीय नृत्य परंपरा के निरंतर विकास का भी साक्षी रहा। कार्यक्रम का संचालन संस्था की शिष्या मेहल शारदा एवं जिज्ञा शर्मा ने किया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor