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Thursday, July 9, 2026, 2:35 am

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भोगीशैल परिक्रमा यात्रा 25 मई से 31 मई तक श्रद्धा, सेवा एवं सनातन चेतना के साथ होगी आयोजित

फाइल फोटो।
सौ वर्षों से निरंतर संचालित हो रही यात्रा में हजारों श्रद्धालु होंगे शामिल, 54 से अधिक मंदिरों में होंगे दर्शन

सुनील वर्मा. जोधपुर 

मरुधरा की तपोभूमि जोधपुर में सनातन संस्कृति, अध्यात्म और लोकआस्था का विराट स्वरूप मानी जाने वाली पावन “भोगीशैल परिक्रमा यात्रा” इस वर्ष भी श्रद्धा, सेवा एवं भक्ति के अनुपम संगम के साथ आयोजित होगी। परिक्रमा यात्रा आयोजन समिति के संयोजक नरेश जाजड़ा ने बताया कि हिन्दू सेवा मण्डल, जोधपुर द्वारा गत लगभग सौ वर्षों से आयोजित यह यात्रा केवल पदयात्रा नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम, तप एवं सनातन चेतना का जीवंत महाकुंभ है।

उन्होंने बताया कि यह परिक्रमा यात्रा पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) में आयोजित होती है। इस वर्ष ज्येष्ठ मास अधिक होने के कारण यात्रा 25 मई से 31 मई 2026 तक अधिक मास की ज्येष्ठ शुक्ल दशमी से पूर्णिमा तक सम्पन्न होगी। इस दौरान श्रद्धालु 54 से अधिक मंदिरों एवं तीर्थ स्थलों के दर्शन कर आध्यात्मिक पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे।

परिक्रमा आयोजन समिति के सचिव विष्णुचन्द्र प्रजापत ने बताया कि सनातन धर्म में सूर्य एवं चन्द्रमा की गति के समन्वय हेतु प्रत्येक तीन वर्ष में आने वाला अधिक मास भगवान श्री विष्णु को समर्पित होने के कारण “पुरुषोत्तम मास” कहलाता है। धर्मशास्त्रों में इसे सभी मासों का श्रेष्ठ मास माना गया है। इस अवधि में तप, जप, पूजा-अर्चना एवं साधना का विशेष महत्व होता है। ऐसे पुण्यमयी काल में आयोजित भोगीशैल परिक्रमा यात्रा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखती है।

महारानी हेमलता राजे साहिबा भी बनेंगी पदयात्री

राजपरिवार द्वारा अंतिम दिवस उम्मेद भवन में श्रद्धालुओं का होगा स्वागत एवं सेवा-सत्कार इस वर्ष की परिक्रमा यात्रा में सैनाचार्य अचलानंदगिरी महाराज के पावन सानिध्य में महारानी श्रीमती हेमलता राजे साहिबा भी एक सामान्य श्रद्धालु पदयात्री के रूप में सम्मिलित होंगी। यात्रा के अंतिम दिवस उम्मेद भवन में राजपरिवार द्वारा समस्त यात्रियों का स्वागत एवं सेवा-सत्कार किया जाएगा। यात्रा के सफल आयोजन हेतु जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, जोधपुर विकास प्राधिकरण, नगर निगम सहित 30 से अधिक विभाग विभिन्न व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं। यात्रा मार्ग, विश्राम स्थलों एवं अन्य व्यवस्थाओं का निर्धारण कर लिया गया है।

परिक्रमा यात्रा का शुभारम्भ 25 मई को हिन्दू सेवा मण्डल कार्यालय, घण्टाघर में ध्वज पूजन के साथ होगा। सात दिवसीय यात्रा के दौरान श्रद्धालु शहर एवं आसपास के विभिन्न धार्मिक स्थलों, तीर्थों एवं मंदिरों से होकर गुजरेंगे। यात्रा का समापन 31 मई को हिन्दू सेवा मण्डल कार्यालय, घण्टाघर में विधिवत ध्वज पूजन के साथ किया जाएगा।

60 से अधिक सेवा समितियाँ करेंगी श्रद्धालुओं की सेवा

300 से अधिक कार्यकर्ता विभिन्न व्यवस्थाओं में रहेंगे तैनात, चिकित्सा, जल, भोजन एवं विश्राम की होंगी विशेष व्यवस्थाएँ। परिक्रमा आयोजन समिति के मुख्य मेला अधिकारी राकेश गौड़ ने बताया कि यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत एवं सेवा के लिए 60 से अधिक सेवा समितियाँ सक्रिय रूप से कार्य करेंगी। विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं द्वारा श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क भोजन, चाय, नाश्ता, शीतल पेयजल, नींबू पानी एवं अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध करवाई जाएंगी।

आयोजन समिति के कोषाध्यक्ष कैलाश जाजू ने बताया कि यात्रा के सफल संचालन हेतु 300 से अधिक कार्यकर्ता विभिन्न व्यवस्थाओं में अपनी सेवाएँ देंगे। यात्रियों की सुविधा के लिए अलग-अलग दायित्वों के अनुसार कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं।

आयोजन सचिव विष्णुचन्द्र प्रजापत ने बताया कि यात्रा के दौरान भोजन, टेंट, चिकित्सा, यातायात, पेयजल, सत्संग, प्रकाश एवं सेवा शिविरों की समुचित व्यवस्थाओं हेतु अनुभवी सह संयोजकों की नियुक्ति की गई है। दुर्गम एवं पहाड़ी मार्गों पर श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। वृद्ध, अस्वस्थ एवं दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष बस सुविधा उपलब्ध रहेगी।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक विश्राम स्थल पर भजन-कीर्तन, सत्संग एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिससे संपूर्ण यात्रा भक्तिमय वातावरण से ओत-प्रोत रहेगी।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor