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पुरुषोत्तम मास में गूंजेगा “श्रीराम” और “हनुमान चालीसा” का स्वर

विश्वव्यापी अभियान के तहत 26 मई को शाम 7 बजे घर-घर होगा हनुमान चालीसा पाठ, दीप प्रज्ज्वलन और श्रीराम नाम जप

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

पुरुषोत्तम मास यानी अधिकमास के पावन अवसर पर देश और दुनिया में भक्ति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का संदेश फैलाने के उद्देश्य से 26 मई को शाम 7 बजे विश्वव्यापी स्तर पर “हनुमान चालीसा पाठ” और “श्रीराम नाम जप” का आयोजन किया जाएगा। इस अभियान के तहत लोगों से अपने घरों, मंदिरों, कॉलोनियों और आसपास के सार्वजनिक स्थलों पर सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा पाठ करने की अपील की गई है।

इस धार्मिक और आध्यात्मिक अभियान को लेकर विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष डॉ. राम गोयल तथा महामंडलेश्वर स्वामी शिवस्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने देशवासियों से अधिक से अधिक संख्या में जुड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने इसे केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा, शांति, साहस और एकता का संदेश फैलाने वाला अभियान बताया है।

“पुरुषोत्तम मास का संयोग अत्यंत शुभ”

जारी संदेश के अनुसार इस वर्ष पुरुषोत्तम मास, मंगलवार और संध्याकाल का विशेष संयोग बन रहा है, जिसे अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास को भगवान विष्णु और श्रीराम भक्ति का विशेष महीना माना जाता है, जबकि मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित होता है।

डॉ. राम गोयल ने कहा कि ऐसे दुर्लभ संयोग समाज में आध्यात्मिक जागरण और सकारात्मक ऊर्जा के प्रसार का अवसर बनते हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे इस दिन अपने परिवार, मित्रों और परिचितों के साथ मिलकर हनुमान चालीसा का पाठ करें और भगवान श्रीराम के नाम का जप करें।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया तनाव, हिंसा, अशांति और मानसिक दबाव से गुजर रही है। ऐसे में भक्ति, प्रार्थना और सामूहिक आध्यात्मिक कार्यक्रम समाज में शांति और सद्भाव का वातावरण बना सकते हैं।

26 मई के कार्यक्रम की मुख्य बातें

समय : शाम 7 बजे
तिथि : 26 मई 2026, मंगलवार
मुख्य कार्यक्रम : हनुमान चालीसा पाठ
दीप प्रज्ज्वलन
सामूहिक प्रार्थना
श्रीराम नाम जप
प्रसाद वितरण

“घर-घर जले भक्ति का दीप” : महामंडलेश्वर  डॉ. शिवस्वरूपानंद सरस्वती

महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. शिवस्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि यह आयोजन केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हर घर तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां भी संभव हो— घर, मंदिर, मोहल्ला, कॉलोनी या सार्वजनिक स्थल— वहां सामूहिक रूप से भक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। उनके अनुसार जब लोग एक साथ बैठकर प्रभु स्मरण करते हैं तो वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और बच्चों को भी इस अभियान से जोड़ने की अपील की।स्वामी शिवस्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि “हनुमान चालीसा केवल पाठ नहीं, बल्कि साहस, आत्मविश्वास और भक्ति का संदेश है। जब समाज सामूहिक रूप से भगवान का स्मरण करता है तो नकारात्मकता दूर होती है।”

श्रीराम नाम जप और दीप प्रज्ज्वलन पर विशेष जोर

अभियान के तहत केवल हनुमान चालीसा पाठ ही नहीं, बल्कि “श्रीराम नाम जप” और दीप प्रज्ज्वलन का भी विशेष महत्व बताया गया है। आयोजकों का कहना है कि दीप प्रज्ज्वलन अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक है।डॉ. राम गोयल ने कहा कि लोगों से अपील की गई है कि वे शाम 7 बजे अपने घरों और मंदिरों में दीप जलाएं और सामूहिक रूप से श्रीराम का स्मरण करें। इससे परिवारों में सकारात्मकता और मानसिक शांति का वातावरण बनेगा।

उन्होंने कहा कि आज तकनीक और भागदौड़ भरे जीवन में लोग आध्यात्मिक शांति से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे आयोजन लोगों को अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं।

क्यों खास माना जा रहा है यह आयोजन?

पुरुषोत्तम मास का पावन अवसर
मंगलवार और संध्याकाल का विशेष संयोग
विश्वव्यापी स्तर पर सामूहिक आयोजन
घर-घर भक्ति और सकारात्मकता का संदेश
समाज में शांति और एकता का आह्वान

सोशल मीडिया के माध्यम से संदेश फैलाने की अपील

आयोजकों ने लोगों से इस अभियान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की भी अपील की है। जारी संदेश में परिवार, मित्रों और समूहों में इस आयोजन की जानकारी साझा करने तथा सोशल मीडिया पर इसे प्रचारित करने का आग्रह किया गया है। अभियान का उद्देश्य केवल एक दिन का धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और सामूहिकता की भावना को मजबूत करना बताया गया है।

स्वामी शिवस्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि “जब समाज एक साथ जुड़कर प्रार्थना करता है तो उसका प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे वातावरण पर पड़ता है।”

“हनुमान भक्ति से मिलता है साहस और आत्मबल”

धार्मिक विद्वानों के अनुसार भगवान हनुमान को शक्ति, साहस, सेवा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। हनुमान चालीसा का पाठ मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला माना जाता है। डॉ. राम गोयल ने कहा कि वर्तमान समय में लोगों को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत होने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि श्रीराम और हनुमान भक्ति व्यक्ति को सकारात्मक सोच और जीवन में संघर्ष करने की शक्ति देती है। उन्होंने कहा कि यह अभियान किसी एक संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए खुला है। सभी धर्मप्रेमी लोग अपने-अपने स्तर पर इस कार्यक्रम से जुड़ सकते हैं।

आयोजकों की अपील

परिवार सहित शामिल हों
शाम 7 बजे दीप जलाएं
हनुमान चालीसा का पाठ करें
श्रीराम नाम जप करें
प्रसाद वितरण करें
संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं

“भक्ति से ही सकारात्मक समाज का निर्माण”

महामंडलेश्वर स्वामी शिवस्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि समाज में बढ़ती अशांति, तनाव और नकारात्मकता के दौर में आध्यात्मिक चेतना की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि भक्ति व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाती है और समाज को जोड़ने का कार्य करती है। सामूहिक प्रार्थना और आध्यात्मिक आयोजनों से सामाजिक समरसता भी बढ़ती है। आयोजकों का मानना है कि यदि अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ते हैं तो यह केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं रहेगा, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाने वाला जनआंदोलन बन सकता है।

“जय श्रीराम” और “जय बजरंगबली” के जयघोष के साथ होगा आयोजन

विश्वव्यापी स्तर पर होने वाले इस आयोजन में लोगों से भक्ति भाव के साथ शामिल होने की अपील की गई है। आयोजकों ने कहा कि पुरुषोत्तम मास का यह पावन अवसर लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने और समाज में शांति, भक्ति और सकारात्मकता का संदेश फैलाने का माध्यम बनेगा। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे 26 मई को शाम 7 बजे अपने घरों, मंदिरों और आसपास के स्थानों पर दीप प्रज्ज्वलित कर “हनुमान चालीसा” और “श्रीराम नाम जप” में शामिल हों।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor