Explore

Search

Sunday, August 23, 2026, 6:31 am

Sunday, August 23, 2026, 6:31 am

LATEST NEWS
[wonderplugin_slider id=1]
Lifestyle

जहर खा रहे हो हर दिन…पैकेट पर हेल्दी, अंदर शुगर और केमिकल्स! डॉ. उज्ज्वल पाटनी ने यू-ट्यूब वीडियो में फूड इंडस्ट्री के ‘स्कैम’ पर उठाए सवाल

बच्चों के सेरेलक से लेकर मसालों और हेल्थ ड्रिंक्स तक पर चर्चा, लोगों से पैकेट का पिछला हिस्सा पढ़ने की अपील

कौन है डॉ. उज्ज्वल पाटनी? : डॉ. उज्ज्वल पाटनी देश के प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर, लेखक, बिजनेस कोच और ट्रेनर हैं। वे व्यक्तित्व विकास, सफलता, नेतृत्व, स्वास्थ्य जागरूकता और उद्यमिता जैसे विषयों पर प्रेरक व्याख्यान देते हैं। उनकी किताबें और यू-ट्यूब वीडियो युवाओं, व्यापारियों और विद्यार्थियों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

देश में तेजी से बढ़ते जंक फूड और पैकेट बंद खाद्य पदार्थों को लेकर इन दिनों नई बहस छिड़ी हुई है। इसी बीच मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक डॉ. उज्ज्वल पाटनी ने अपने यू-ट्यूब चैनल पर जारी एक वीडियो में कई बड़ी कंपनियों के खाद्य उत्पादों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने देशवासियों को आगाह करते हुए कहा है कि लोग अनजाने में हर दिन ऐसा भोजन खा रहे हैं, जिसमें जरूरत से ज्यादा शुगर, प्रिजर्वेटिव्स और केमिकल्स मौजूद हैं।

डॉ. उज्ज्वल पाटनी के अनुसार, कंपनियां पैकेजिंग, बड़े-बड़े दावों, सेलिब्रिटी विज्ञापनों और आकर्षक नामों के जरिए उपभोक्ताओं को भ्रमित करती हैं। उनका कहना है कि लोग “हेल्दी”, “नेचुरल”, “रियल”, “आयुर्वेदिक” और “इम्यूनिटी बूस्टर” जैसे शब्द देखकर उत्पाद खरीद लेते हैं, जबकि असल सच्चाई पैकेट के पीछे छोटे अक्षरों में लिखी होती है।

“फ्रंट में हीरो, बैक में विलेन”

डॉ. उज्ज्वल पाटनी जागरूक करते हुए कहते हैं कि कंपनियां पैकेट के सामने वाले हिस्से में बड़े अक्षरों में “100% फाइबर”, “100% नेचुरल” या “हेल्दी” जैसे दावे लिखती हैं, लेकिन पीछे सामग्री सूची में मैदा, शुगर और पाम ऑयल जैसी चीजें सबसे ऊपर होती हैं।

बतौर उनके, खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार कंपनियों को सामग्री घटते क्रम में लिखनी होती है। यानी जिस चीज की मात्रा सबसे ज्यादा होगी, उसका नाम सबसे ऊपर आएगा। लेकिन अधिकांश उपभोक्ता पैकेट का पिछला हिस्सा पढ़ते ही नहीं हैं। डॉ. पाटनी देशवासियों से अपील करते हैं कि किसी भी पैकेट बंद चीज को खरीदने से पहले उसके इंग्रेडिएंट्स जरूर पढ़ें। यदि उसमें अत्यधिक शुगर, मैदा या पाम ऑयल हो तो ऐसे उत्पादों से दूरी बनानी चाहिए।

सेरेलक और बच्चों के भोजन पर उठे सवाल

वीडियो में डॉ. उज्ज्वल पाटनी ने शिशु आहार उत्पादों को लेकर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, यूरोप में छोटे बच्चों के लिए बेचे जाने वाले कई उत्पादों में शुगर नहीं डाली जाती, जबकि भारत में उन्हीं उत्पादों में शुगर मिलाई जाती है। उन्होंने कहा कि छह महीने से लेकर दो साल तक के बच्चों को दिए जाने वाले खाद्य पदार्थों में अतिरिक्त शुगर नहीं होनी चाहिए। डॉ. उज्ज्वल पाटनी आगाह करते हैं कि बचपन से ही मीठे स्वाद की आदत बच्चों के स्वास्थ्य पर लंबे समय तक असर डाल सकती है।

बॉर्नविटा और हेल्थ ड्रिंक्स पर भी निशाना

डॉ. उज्ज्वल पाटनी के अनुसार, कई तथाकथित हेल्थ ड्रिंक्स में शुगर की मात्रा बेहद ज्यादा होती है। उन्होंने वीडियो में दावा किया कि कुछ उत्पादों में 100 ग्राम में लगभग आधा हिस्सा शुगर का होता है। उनके अनुसार, कंपनियां “तैयारी जीत की”, “हेल्थ ड्रिंक” और “एनर्जी” जैसे नारों से लोगों को आकर्षित करती हैं, लेकिन वास्तविक पोषण की तुलना में शुगर की मात्रा कहीं ज्यादा होती है। डॉ. पाटनी का कहना है कि माता-पिता को विज्ञापनों से प्रभावित होने के बजाय पोषण संबंधी तथ्यों को समझना चाहिए।

मसालों में केमिकल्स को लेकर चिंता

वीडियो में मसाला कंपनियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। डॉ. उज्ज्वल पाटनी के मुताबिक, कुछ भारतीय मसाला उत्पादों में एथिलीन ऑक्साइड जैसे केमिकल पाए जाने की खबरें सामने आई थीं, जिन्हें कुछ देशों ने गंभीरता से लिया। उन्होंने लोगों से अपील की कि भोजन में इस्तेमाल होने वाली हर चीज को आंख मूंदकर सुरक्षित मान लेना सही नहीं है। डॉ. उज्ज्वल पाटनी के अनुसार, यदि किसी उत्पाद को विदेशों में जांच का सामना करना पड़ रहा है तो भारतीय उपभोक्ताओं को भी सतर्क रहने की जरूरत है।

“सेलिब्रिटी खुद नहीं खाते, जनता को बेचते हैं”

डॉ. उज्ज्वल पाटनी जागरूक कर रहे हैं कि कंपनियां फिल्मों और क्रिकेट सितारों के जरिए लोगों के दिमाग पर असर डालती हैं। उन्होंने कहा कि लोग अपने पसंदीदा कलाकारों को देखकर वही उत्पाद खरीद लेते हैं। बतौर उनके, यह एक “सबकॉन्शियस मार्केटिंग” तकनीक है, जिसमें उपभोक्ता भावनात्मक रूप से प्रभावित होकर निर्णय लेते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी सेलिब्रिटी विज्ञापन को देखकर आंख बंद करके उत्पाद न खरीदें।

जानिए : कैसे पहचानें हेल्दी और अनहेल्दी प्रोडक्ट?

खरीदने से पहले ये 5 बातें जरूर देखें
  • पैकेट का पिछला हिस्सा जरूर पढ़ें
  • इंग्रेडिएंट्स की सूची देखें
  • शुगर, मैदा और पाम ऑयल ऊपर हो तो सतर्क रहें
  • “नेचुरल”, “हेल्दी”, “आयुर्वेदिक” जैसे शब्दों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें
  • प्रिजर्वेटिव कोड जैसे INS/E-नंबर जांचें

सावधान : डॉ. उज्ज्वल पाटनी की लोगों को सलाह

“डेड फूड” से बचें

डॉ. उज्ज्वल पाटनी देशवासियों से अपील करते हैं कि लंबे समय तक खराब न होने वाले अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड कम से कम खाएं। उनके अनुसार, ताजे फल, सब्जियां और घर का बना भोजन शरीर के लिए ज्यादा बेहतर है। उन्होंने कहा कि यदि कोई खाद्य पदार्थ महीनों तक खराब नहीं होता, तो उसके पीछे इस्तेमाल हुए प्रिजर्वेटिव्स और प्रोसेसिंग को समझना जरूरी है।

AI से भी जांचने की सलाह

डॉ. उज्ज्वल पाटनी ने लोगों को नई तकनीक का उपयोग करने की भी सलाह दी। उनके अनुसार, आज के दौर में लोग किसी भी उत्पाद के पैकेट की फोटो लेकर AI टूल्स से उसके नुकसान और फायदे समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि जागरूक उपभोक्ता बनना समय की जरूरत है। यदि लोग खुद पढ़ना और समझना शुरू कर देंगे तो कंपनियों पर भी बेहतर उत्पाद देने का दबाव बनेगा।

बढ़ रहा है जंक फूड का खतरा

विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा शुगर और हाई फैट वाले खाद्य पदार्थ मोटापा, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। बच्चों में भी जंक फूड की बढ़ती आदत चिंता का विषय बनती जा रही है। डॉ. उज्ज्वल पाटनी आगाह करते हैं कि यदि समय रहते खानपान की आदतें नहीं बदली गईं तो आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।

जागरूकता ही बचाव

यह खबर डॉ. उज्ज्वल पाटनी के यू-ट्यूब चैनल पर जारी वीडियो में व्यक्त विचारों और दावों पर आधारित है। उद्देश्य लोगों को खाद्य पदार्थों के प्रति जागरूक करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी उत्पाद का सेवन संतुलित मात्रा में करना चाहिए तथा आवश्यकता होने पर पोषण विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह भी लेनी चाहिए।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor