पाल गांव स्थित एमडी सारण स्कूल में कथा सुनाई जा रही है।
सुनील वर्मा. जोधपुर
भक्तमाल कथा के दूसरे दिन गोपीचंद प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए संत मदनदास महाराज ने कहा कि जीवन का कोई भरोसा नहीं है, इसलिए समय रहते भगवान के नाम का स्मरण कर लेना चाहिए।
पाल गांव स्थित एमडी सारण स्कूल में कथा सुनाई जा रही है। श्री भक्तमाल कथा के दूसरे दिन रामस्नेही संत मदन दास महाराज ने भक्तों को गहरी प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि “जीवन का कोई भरोसा नहीं है। यह कब समाप्त हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। इसलिए समय रहते भगवान के नाम में लग जाना चाहिए, जिससे यह जीवन सार्थक हो जाए।”
संत मदन दास महाराज ने राजा गोपीचंद की पावन कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि गोपीचंद अपनी माता मैनावती की आज्ञा से गुरु गोरखनाथ जी के शिष्य बने और गुरु कृपा से अमरत्व प्राप्त किया। महाराज ने कहा, “गुरु के शब्दों पर चलने से व्यक्ति का जीवन कल्याणमय हो जाता है। अगर कोई सत्संग में बैठकर भी एक बात को अपने जीवन में उतार ले, तो वह भवसागर को पार कर जाता है।”
महाराज ने मां मैनावती और गोपीचंद के भावपूर्ण प्रसंग को बड़े ही ओजस्वी अंदाज में सुनाया। श्रोतागण पूरे समय भावविभोर रहे और कई बार उनकी आँखें नम हो गईं। कथा के दौरान सुंदर भजनों की प्रस्तुति भी हुई, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भजन सुनकर पूरी तरह मग्न हो गए। कथा के अंत में यजमान परिवार द्वारा आरती उतारी गई तथा सभी भक्तों में प्रसाद वितरित किया गया।





