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Thursday, July 9, 2026, 1:52 am

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भौगिशैल परिक्रमा में सेवा, श्रद्धा और समर्पण का अनूठा संगम

अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला संगठन एवं माताजी भक्ति सागर ग्रुप ने जातरुओं की सेवा कर निभाई सामाजिक जिम्मेदारी

पंकज जांगिड़, जोधपुर

धार्मिक आस्था, सेवा भावना और सामाजिक समर्पण का अद्भुत उदाहरण उस समय देखने को मिला जब अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला संगठन के तत्वावधान में माताजी भक्ति सागर ग्रुप की महिलाओं ने मारवाड़ की प्रसिद्ध भौगिशैल परिक्रमा में शामिल होकर जातरुओं की सेवा का कार्य किया।

चार धाम यात्रा के समान पुण्यदायक मानी जाने वाली भौगिशैल परिक्रमा के दौरान महिलाओं के इस समूह ने न केवल धार्मिक यात्रा में भाग लिया, बल्कि जगह-जगह जरूरतमंद यात्रियों को राहत सामग्री, खाद्य सामग्री और शीतल पेय वितरित कर मानव सेवा का संदेश भी दिया।

श्रद्धा और सेवा के इस संगम ने परिक्रमा में शामिल जातरुओं को भावनात्मक और व्यावहारिक दोनों तरह से राहत प्रदान की। धार्मिक यात्रा के दौरान महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने यह भी साबित किया कि सामाजिक और धार्मिक सेवा कार्यों में महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।

मारवाड़ की आस्था का केंद्र है भौगिशैल परिक्रमा

मारवाड़ क्षेत्र में भौगिशैल परिक्रमा को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। इसे क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक यात्राओं में शामिल माना जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस परिक्रमा में भाग लेकर विभिन्न मंदिरों और धार्मिक स्थलों के दर्शन करते हैं।

मान्यता है कि श्रद्धा और सेवा भावना के साथ की गई यह यात्रा आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में जातरू इस परिक्रमा में शामिल होते हैं।

इस वर्ष भी परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक रहा। कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं ने यात्रियों की सुविधा के लिए सेवा शिविर लगाए, जिनमें माताजी भक्ति सागर ग्रुप की सेवाएं विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।

भौगिशैल परिक्रमा के प्रमुख पड़ाव

• रातानाडा गजानन मंदिर
• प्रकट संतोषी माता मंदिर
• बेरीगंगा स्नान स्थल
• बैजनाथ मंदिर
• बड़ली भैरुजी मंदिर
• चौपासनी मार्ग
• जबरेश्वर महादेव मंदिर

31 महिलाओं का समूह बना सेवा का प्रतीक

माताजी भक्ति सागर ग्रुप की अध्यक्ष मुन्नी भाटी ने बताया कि ग्रुप की प्रमुख संयोजक संतोष राठी के नेतृत्व में 31 महिलाओं का समूह एक दिवसीय बस यात्रा के माध्यम से परिक्रमा में शामिल हुआ।

यात्रा की शुरुआत रातानाडा स्थित गजानन मंदिर एवं प्रकट संतोषी माता मंदिर के दर्शन से हुई। इसके बाद महिलाओं ने बेरीगंगा में स्नान कर धार्मिक अनुष्ठान किए। यात्रा आगे बढ़ते हुए बैजनाथ, बड़ली भैरुजी और अन्य धार्मिक स्थलों से होकर चौपासनी मार्ग के जरिए जबरेश्वर महादेव मंदिर तक पहुंची।

पूरी यात्रा के दौरान महिलाओं ने भक्ति, अनुशासन और सेवा भावना का परिचय दिया। श्रद्धालुओं के बीच समूह की सक्रियता और सहयोग की भावना की सराहना भी की गई।

सेवा कार्यों से जातरुओं को मिली राहत

ग्रुप की सचिव मधु भंडारी ने बताया कि यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर जातरुओं के लिए सेवा कार्य किए गए। विशेष रूप से कोडी खाने में दान-पुण्य और सेवा के माध्यम से यात्रियों को राहत पहुंचाने का प्रयास किया गया।

महिलाओं द्वारा श्रद्धालुओं को खाद्य सामग्री, राशन सामग्री, शीतल पेय पदार्थ, ड्राई फ्रूट्स, फल एवं अन्य आवश्यक वस्तुएं वितरित की गईं। गर्म मौसम और लंबी यात्रा के दौरान यह सेवा यात्रियों के लिए काफी उपयोगी साबित हुई।

कई यात्रियों ने महिलाओं की इस सेवा भावना की प्रशंसा करते हुए कहा कि धार्मिक यात्राओं में इस प्रकार की सेवाएं श्रद्धालुओं के उत्साह को और बढ़ाती हैं।

यात्रियों को वितरित की गई सामग्री

• खाद्य सामग्री
• राशन सामग्री
• शीतल पेय पदार्थ
• ड्राई फ्रूट्स
• फल
• जरूरतमंद वस्तुएं

महिलाओं ने दिया सामाजिक एकता का संदेश

भौगिशैल परिक्रमा के दौरान माताजी भक्ति सागर ग्रुप की महिलाओं ने केवल धार्मिक गतिविधियों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज में सहयोग और सेवा का संदेश भी दिया।

समूह की महिलाओं ने सामूहिक रूप से सेवा कार्यों में भाग लेकर यह दिखाया कि यदि समाज संगठित होकर कार्य करे तो जरूरतमंदों की मदद आसानी से की जा सकती है।

धार्मिक आयोजनों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत मानी जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि महिलाओं की सक्रियता से सेवा और जागरूकता के कार्यक्रमों को नई दिशा मिल रही है।

वर्षों से सामाजिक सेवा में सक्रिय है ग्रुप

माताजी भक्ति सागर ग्रुप केवल धार्मिक यात्राओं तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से विभिन्न सामाजिक सेवा कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। ग्रुप द्वारा अब तक 237 विवाह योग्य कन्याओं का शगुन कार्यक्रम आयोजित किया जा चुका है। इसके माध्यम से जरूरतमंद परिवारों की बेटियों को सहयोग प्रदान किया जाता है। इसके अलावा 88 प्रसूताओं को जांपे की सामग्री भेंट कर मातृ स्वास्थ्य और सामाजिक सहयोग की दिशा में भी सराहनीय कार्य किया गया है। समूह की महिलाओं का कहना है कि सेवा कार्यों का उद्देश्य केवल सहायता देना नहीं बल्कि समाज में अपनत्व और संवेदनशीलता की भावना विकसित करना भी है।

माताजी भक्ति सागर ग्रुप के प्रमुख सामाजिक कार्य

• 237 विवाह योग्य कन्याओं का शगुन कार्यक्रम
• 88 प्रसूताओं को जांपे की सामग्री वितरण
• धार्मिक यात्राओं में सेवा शिविर
• जरूरतमंदों को खाद्य एवं राशन सहायता
• महिला सहभागिता और सामाजिक जागरूकता

सेवा और भक्ति का बना प्रेरणादायक उदाहरण

भौगिशैल परिक्रमा में माताजी भक्ति सागर ग्रुप की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि धार्मिक आयोजन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि उनमें मानव सेवा का भाव भी जुड़ा होना चाहिए। यात्रा के दौरान महिलाओं ने जिस समर्पण और अनुशासन के साथ सेवा कार्य किए, उसने अन्य लोगों को भी प्रेरित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक आयोजनों के साथ यदि सेवा कार्यों को जोड़ा जाए तो समाज में सहयोग, सद्भाव और मानवीय संवेदनाओं को मजबूती मिलती है।

समाज में बढ़ रही महिला शक्ति की भागीदारी

आज महिलाएं केवल पारिवारिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं।माताजी भक्ति सागर ग्रुप की महिलाओं ने यह साबित किया कि संगठित महिला शक्ति समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। भक्ति, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी के इस संगम ने भौगिशैल परिक्रमा को और अधिक प्रेरणादायक बना दिया। श्रद्धालुओं ने भी महिलाओं की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सेवा कार्य समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor