कृश्न चंदर की कलम और विकास कपूर के डायरेक्शन से सजे हास्य व्यंग्य नाटक में जोधपुर राजस्थान के कलाकारों ने अदाकारी से रंग जमाया. -इप्टा के नेशनल ड्रामा फेस्टिवल की धूम
राखी पुरोहित. मुंबई
बिना सोचे समझे अनजाने में अंधी आस्था के पीछे झलकता पागलपन, धर्म के नाम पर श्रद्धा और अकीदत के नाम पर डोलता भरोसा और मौकापरस्ती का चढ़ावा। यह था इप्टा के बैनर तले मुंबई के माटुंगा स्थित मैसूर एसोसिएशन आडिटोरियम में आयोजित नेशनल ड्रामा फेस्टिवल का रोचक नजारा ।
प्रतिष्ठित रंग संस्था आकांक्षा (जोधपुर इप्टा) के बैनर तले मंगलवार को प्रख्यात कथाकार व उपन्यासकार कृश्न चंदर की अमर कहानी पर आधारित व सफलता से मंचित हास्य व्यंग्य नाटक ‘थाली का बैंगन’ के माध्यम से कुछ ऐसा ही संदेश दिया गया।
जोधपुर राजस्थान के कलाकारों की इस शानदार पेशकश ने दर्शकों का दिल जीत लिया । चुटीले व्यंग्य और हास्य से लबरेज संवादों से सजे इस नाटक को देख कर दर्शक अभिभूत हो उठे। प्रचंड गर्मी के बावजूद बहुत सारे दर्शक नाटक को देखने के लिए आडिटोरियम पहुंचे। इस नाटक के माध्यम से समाज में फैले अंधविश्वास, धार्मिक अवसरवाद और पाखंड पर बेहद संजीदगी लेकिन तीखे अंदाज में प्रहार किया गया।
डॉ. विकास कपूर के निर्देशन का बेजोड़ कलात्मक व भावपक्ष देखने को मिला, जिसे देख सभागार में मौजूद दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। यह नाटक समाज को यह कड़ा संदेश देने में पूरी तरह सफल रहा कि किस तरह चंद स्वार्थी तत्व अपनी रोटियां सेकने के लिए आम जनता की धार्मिक भावनाओं और अंधविश्वास का दुरुपयोग करते हैं, जिसका खामियाजा अंततः निर्दोष समाज को भुगतना पड़ता है।
कार्यक्रम के अंत में दर्शकों ने खड़े होकर तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। इस नाटक को देखने के लिए रंगकर्म और बॉलीवुड के कई मशहूर निर्माता निर्देशक और कलाकार मौजूद थे।
जोधपुर के इन कलाकारों ने अदाकारी से धूम मचाई
नाटक की सफलता का मुख्य श्रेय इसके कलाकारों को जाता है, जिन्होंने अपने किरदारों में जान फूंक दी। मंच पर अभिनय करने वाले प्रमुख कलाकार इस प्रकार रहे:
इंदर (मुख्य पात्र/पति): अनुज अरोड़ा
सुंदरी (पत्नी): डॉ. नीतू परिहार
मास्टर जी: राजकुमार चौहान
गणेश मियां / मनन मियां: जयदीप व प्रवीण शर्मा
हाजी छन्नन: मोहम्मद हाशिर कश्फी
साई करम शाह: शरद शर्मा
पण्डित राम दयाल: हिमांशु जोशी
मौलवी साहब:
अफजल
हुसैन
टी.वी. रिपोर्टर: अंतिमा व्यास
पुत्तन: दीप्तांशु व्यास
अन्य कलाकार (कोरस व सहयोगी): कैलाश गहलोत, आराध्या परिहार, आदित्य, साहिल, सौरभ कच्छवाहा और मोहम्मद हाशिर।
मंच से परे (नेपथ्य की टीम)
नाटक को तकनीकी और संगीतमय रूप से प्रभावी बनाने में बैकस्टेज टीम का विशेष योगदान रहा:
गीत संयोजन: अनुज अरोड़ा
गीत रिकॉर्डिंग: सुनील गौड़ (गौड़ स्टूडियो, जोधपुर)
वेशभूषा: कैलाश गहलोत एवं डॉ. नीतू परिहार
रूप सज्जा (मेकअप): अंतिमा व्यास व कैलाश गहलोत
मंच व्यवस्था: प्रवीण शर्मा और माया
ध्वनि प्रभाव: रौनक गहलोत
मंच आलोकन (प्रकाश व्यवस्था): मोहम्मद शफी
प्रस्तुति नियंत्रक: प्रवीण कुमार झा




