Explore

Search

Thursday, July 9, 2026, 12:02 am

Thursday, July 9, 2026, 12:02 am

LATEST NEWS

The specified slider does not exist.

Lifestyle

स्नेहा भंडारी : संघर्षों की राह से उठी वह मुस्कान, जिसने हजारों बेटियों के जीवन में रोशनी भर दी

बेटी एक मुस्कान नई सोच संस्थान की फाउंडर स्नेहा भंडारी हजारों बेटियों और महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी हैं। उनका जीवन संघर्ष, साहस, आत्मविश्वास और समाज सेवा का ऐसा उदाहरण है, जो हर व्यक्ति को प्रेरित करता है। राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित ने उनका इंटरव्यू लिया। प्रस्तुत है प्रमुख अंश-

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

समाज में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपनी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में बदलाव लाने की क्षमता से पहचाने जाते हैं। स्नेहा भंडारी ऐसा ही एक नाम हैं। एक समय था जब बाल विवाह, दहेज प्रताड़ना, सामाजिक तिरस्कार और आर्थिक संघर्षों ने उनके जीवन को चारों ओर से घेर लिया था। लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे झुकने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बना लिया।

आज स्नेहा भंडारी केवल एक सफल उद्यमी नहीं हैं, बल्कि “बेटी एक मुस्कान नई सोच संस्थान” की फाउंडर के रूप में हजारों बेटियों और महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी हैं। उनका जीवन संघर्ष, साहस, आत्मविश्वास और समाज सेवा का ऐसा उदाहरण है, जो हर व्यक्ति को प्रेरित करता है।

प्रश्न : स्नेहा जी, आपके जीवन की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई?

उत्तर : मेरा जीवन शुरू से ही आसान नहीं रहा। कम उम्र में मेरा बाल विवाह कर दिया गया। उस समय सपने देखने की उम्र थी, लेकिन जिम्मेदारियां मेरे कंधों पर आ गईं। शादी के बाद दहेज को लेकर ताने और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। जब बेटी का जन्म हुआ तो परिस्थितियां और अधिक कठिन हो गईं।

समाज में आज भी कई जगह बेटियों को बोझ समझा जाता है। मुझे भी ऐसी ही मानसिकता का सामना करना पड़ा। कई बार लगा कि जीवन रुक गया है, लेकिन मेरी बेटी मेरी सबसे बड़ी ताकत बन गई। आखिरकार सात वर्षों बाद मैंने तलाक लेने का निर्णय लिया और अपनी बेटी की जिम्मेदारी खुद संभाली।

प्रश्न : तलाक के बाद जीवन को दोबारा खड़ा करना कितना चुनौतीपूर्ण था?

उत्तर : बहुत कठिन था। आर्थिक रूप से मैं पूरी तरह संघर्ष कर रही थी। लेकिन मैंने यह तय कर लिया था कि परिस्थितियां मेरी पहचान नहीं बनेंगी। मैंने छह महीने का ब्यूटीशियन कोर्स किया और छोटे स्तर से काम शुरू किया।

दिन-रात मेहनत की, लोगों का विश्वास जीता और धीरे-धीरे अपना व्यवसाय स्थापित किया। आज “काया मेकअप स्टूडियो” केवल एक व्यवसाय नहीं है, बल्कि मेरे संघर्ष और आत्मविश्वास की कहानी है।

सफलता का सूत्र

“परिस्थितियां कभी हमारी मंजिल तय नहीं करतीं, हमारे निर्णय तय करते हैं कि हमें कहां पहुंचना है।” – स्नेहा भंडारी

प्रश्न : काया मेकअप स्टूडियो की सफलता का सफर कैसा रहा?

उत्तर : सत्रह वर्षों की मेहनत के बाद आज यह संस्थान सैकड़ों महिलाओं और युवतियों को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान कर रहा है। मेरा उद्देश्य सिर्फ व्यवसाय करना नहीं था, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना था।

जब कोई महिला प्रशिक्षण लेकर अपने पैरों पर खड़ी होती है और सम्मानजनक जीवन जीने लगती है, तो मुझे लगता है कि मेरी सफलता सार्थक हो गई।

प्रश्न : “बेटी एक मुस्कान नई सोच संस्थान” शुरू करने की प्रेरणा कहां से मिली?

उत्तर : मेरे अपने जीवन के अनुभव ही इसकी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। मैंने महसूस किया कि समाज में कई बेटियां ऐसी हैं जिन्हें अवसर नहीं मिलते। कई परिवार आर्थिक अभाव में बेटियों की पढ़ाई रोक देते हैं।

तब मैंने सोचा कि अगर मैं अपने संघर्षों से बाहर निकल सकती हूं तो दूसरी बेटियों के लिए भी कुछ कर सकती हूं। इसी सोच से “बेटी एक मुस्कान नई सोच संस्थान” की स्थापना हुई।

प्रश्न : संस्थान द्वारा किन-किन क्षेत्रों में कार्य किया जा रहा है?

उत्तर : हमारा प्रयास केवल सहायता देना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का रास्ता दिखाना है।

हमारी प्रमुख गतिविधियां हैं—

  • जरूरतमंद बेटियों की स्कूल फीस और शिक्षा का खर्च उठाना।
  • निशुल्क ब्यूटीशियन प्रशिक्षण।
  • महिलाओं को सिलाई मशीन उपलब्ध कराना।
  • बेटी के जन्म पर आर्थिक सहयोग।
  • स्कूलों और सोसायटियों में सेल्फ-डिफेंस प्रशिक्षण।
  • कैंसर पीड़ितों के लिए हेयर डोनेशन अभियान।

अब तक 300 से अधिक बार बाल दान कर कैंसर रोगियों की सहायता की जा चुकी है।

संस्थान की प्रमुख उपलब्धियां

बेटियों की शिक्षा में आर्थिक सहयोग

महिलाओं को रोजगार आधारित प्रशिक्षण

300+ हेयर डोनेशन

सिलाई मशीन वितरण

सेल्फ-डिफेंस प्रशिक्षण

बेटी जन्मोत्सव अभियान

प्रश्न : आपके लिए महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ क्या है?

उत्तर : महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल अधिकार देना नहीं है। इसका मतलब है महिलाओं को निर्णय लेने की क्षमता देना, आत्मविश्वास देना और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना।

जब एक महिला आत्मनिर्भर होती है तो वह केवल अपना नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज का भविष्य बदल देती है।

प्रश्न : आज की बेटियों के लिए आपका संदेश क्या है?

उत्तर : मैं हर बेटी से कहना चाहती हूं कि कभी खुद को कमजोर मत समझो। परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, शिक्षा और आत्मविश्वास आपका सबसे बड़ा हथियार हैं। अपने सपनों को किसी भी हाल में मत छोड़ो। अगर रास्ते बंद दिखें तो नया रास्ता बनाओ।

प्रश्न : आपके जीवन में आध्यात्मिकता की क्या भूमिका है?

उत्तर : मेरे लिए आध्यात्मिकता शक्ति का स्रोत है। जब जीवन में कठिन समय आया, तब ईश्वर में विश्वास ने मुझे टूटने नहीं दिया। मेरा मानना है कि यदि इंसान के इरादे नेक हों, मन में श्रद्धा हो और सेवा भाव हो, तो ईश्वर स्वयं उसके लिए रास्ते बना देता है।

स्नेहा भंडारी के प्रेरक विचार

“बेटियां बोझ नहीं, समाज की सबसे बड़ी ताकत हैं।”

“संघर्ष जीवन का अंत नहीं, नई शुरुआत का संकेत है।”

“आत्मनिर्भर महिला ही सशक्त समाज की आधारशिला है।”

“सेवा का हर कार्य अंततः समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।”

प्रश्न : आपको मिले सम्मान आपके लिए क्या मायने रखते हैं?

उत्तर : सम्मान निश्चित रूप से प्रेरणा देते हैं, लेकिन मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान किसी बेटी की मुस्कान है। फिर भी विभिन्न मंचों पर मिले सम्मान मुझे यह विश्वास दिलाते हैं कि मेरा प्रयास सही दिशा में है। मुझे जोधपुर रत्न सम्मान, यूथ वर्ल्ड कर्णधार अवार्ड, अचीव अवार्ड पटना, कोरोना वॉरियर्स अवार्ड, नारी शक्ति सम्मान, रजत पदक, बेस्ट सोशल कॉज़ मूवी “हेलमेट” सम्मान और जिला प्रशासन के प्रशस्ति पत्र सहित अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। ये सम्मान मेरे नहीं, उन सभी बेटियों और महिलाओं के हैं जो संघर्षों से निकलकर आगे बढ़ रही हैं।

प्रश्न : भविष्य के लिए आपकी क्या योजनाएं हैं?

उत्तर : मेरा सपना है कि “बेटी एक मुस्कान नई सोच संस्थान” देशभर में बेटियों के लिए आशा का केंद्र बने। मैं चाहती हूं कि कोई भी बेटी केवल आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे और कोई महिला आत्मनिर्भर बनने के अवसर से दूर न रहे। हम आने वाले वर्षों में कौशल विकास, शिक्षा और महिला सुरक्षा के क्षेत्र में बड़े स्तर पर कार्य करने की योजना बना रहे हैं।

एक महिला, एक संघर्ष, हजारों मुस्कानें

स्नेहा भंडारी की कहानी केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है। यह उस साहस की कहानी है जिसने दर्द को ताकत में बदला, संघर्ष को अवसर बनाया और व्यक्तिगत पीड़ा को समाज सेवा का माध्यम बना दिया। आज वे उन हजारों महिलाओं और बेटियों के लिए प्रेरणा हैं जो जीवन की चुनौतियों से जूझ रही हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर संकल्प मजबूत हो, आत्मविश्वास अडिग हो और सेवा का भाव सच्चा हो, तो कोई भी बाधा सफलता का रास्ता नहीं रोक सकती। स्नेहा भंडारी की असली पहचान उनके पुरस्कार नहीं, बल्कि उन बेटियों के चेहरे पर आई मुस्कान है, जिनके जीवन में उन्होंने उम्मीद की नई रोशनी जगाई है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor