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मुख्यमंत्री शुभलक्ष्मी योजना : बेटी के जन्म से स्कूल तक सरकार दे रही आर्थिक संबल

बालिका जन्म को प्रोत्साहन देने के लिए शुरू हुई विशेष योजना

दिलीप कुमार पुरोहित. जयपुर 

9783414079 diliprakhai@gmail.com

राजस्थान सरकार द्वारा बेटियों के जन्म को बढ़ावा देने और राज्य में लिंगानुपात सुधारने के उद्देश्य से “मुख्यमंत्री शुभलक्ष्मी योजना” शुरू की गई थी। वर्ष 2013-14 की बजट घोषणा के तहत लागू की गई यह योजना 1 अप्रैल 2013 से प्रभावी हुई। योजना का मुख्य उद्देश्य बालिका जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना और बालिकाओं के स्वास्थ्य व शिक्षा को आर्थिक सहयोग देना है।

संस्थागत प्रसव पर मिलती है पहली सहायता राशि

योजना के तहत यदि किसी महिला के यहां 1 अप्रैल 2013 या उसके बाद राजकीय अथवा अधिस्वीकृत चिकित्सा संस्थान में बालिका का जीवित जन्म होता है, तो महिला को 2100 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। यह राशि जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत मिलने वाली राशि से अलग होती है। सरकार का मानना है कि इससे संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिलेगा और मातृ एवं शिशु सुरक्षा बेहतर होगी।

टीकाकरण पूरा होने पर मिलता है दूसरा लाभ

मुख्यमंत्री शुभलक्ष्मी योजना में बालिका के स्वास्थ्य को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। यदि बालिका की आयु एक वर्ष पूर्ण होने तक सभी आवश्यक टीके लगवा दिए जाते हैं, तो परिवार को अतिरिक्त 2100 रुपये की राशि दी जाती है। इसके लिए ममता कार्ड अथवा टीकाकरण कार्ड प्रस्तुत करना आवश्यक होता है। यह लाभ 1 अप्रैल 2014 से लागू किया गया था।

स्कूल प्रवेश पर सरकार देती है तीसरी किस्त

बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से योजना में तीसरा लाभ भी शामिल किया गया है। जब बालिका पांच वर्ष की आयु पूरी कर स्कूल में प्रवेश लेती है, तब परिवार को 3100 रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि प्रदान की जाती है। यह प्रावधान 1 अप्रैल 2018 से लागू किया गया। सरकार का उद्देश्य है कि बालिकाओं का स्कूलों में नामांकन बढ़े और प्रारंभिक शिक्षा सुनिश्चित हो सके।

जुड़वा या अधिक बालिकाओं के जन्म पर भी मिलेगा लाभ

यदि एक ही प्रसव में एक से अधिक बालिकाओं का जन्म होता है, तो प्रत्येक जीवित बालिका के लिए अलग-अलग लाभ दिया जाता है। यानी 2100 रुपये की राशि बालिकाओं की संख्या के अनुसार प्रदान की जाएगी। योजना का लाभ कॉटेज वार्ड में भर्ती प्रसूताओं तथा परिवहन के दौरान प्रसव होने की स्थिति में भी दिया जाता है।

चिकित्सा संस्थानों को दी गई जिम्मेदारी

योजना के सफल संचालन के लिए संबंधित चिकित्सा संस्थानों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिस अस्पताल में प्रसव होगा, वहीं से पहली सहायता राशि का भुगतान किया जाएगा। अधिस्वीकृत निजी चिकित्सालयों में भी जननी सुरक्षा योजना की प्रक्रिया के अनुसार भुगतान किया जाएगा।
पहले लाभ के बाद ही मिलेगा दूसरा परिलाभ
सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना का दूसरा लाभ तभी दिया जाएगा जब महिला प्रथम लाभ प्राप्त कर चुकी हो। राज्य सरकार का मानना है कि मुख्यमंत्री शुभलक्ष्मी योजना समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने और महिला सशक्तिकरण को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor