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एजेंटों के लोन जाल से रहें सावधान: कैसे उधारकर्ता चुकाता है लगभग दोगुनी रकम

बाद में पता चला कि ऋण ₹60,000 का नहीं, बल्कि ₹66,000 का प्रोसेस किया गया था। एजेंट ने बड़ी चतुराई से यह जानकारी शुरुआत में नहीं दी थी। बाद में उधारकर्ता को मालूम हुआ कि अतिरिक्त ₹6,000 एजेंट द्वारा “कमीशन शुल्क” के रूप में जोड़ दिए गए थे।
चिंता की बात यह भी थी कि एजेंट ने इस संबंध में कोई लिखित दस्तावेज, रसीद या आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं कराया। सारी जानकारी केवल मोबाइल ऐप में दिखाई गई थी।
लोन लेने वाले व्यक्ति को जब एहसास हुआ कि नियमित किस्तें जारी रखने पर कुल भुगतान का बोझ और बढ़ता जाएगा, तब उसने किसी अन्य स्रोत से धन की व्यवस्था की और ऋण को समय से पहले बंद करने का निर्णय लिया। इसके लिए उसे ₹61,000 अतिरिक्त फोरक्लोजर भुगतान करना पड़ा।

नेहल लड्‌ढा. विशेष संवाददाता. जोधपुर

मुसीबत और आपातकाल कभी बताकर नहीं आते। और जब आर्थिक संकट सामने खड़ा हो जाए, तो लोग सबसे आसान विकल्प की ओर देखते हैं—लोन। लेकिन अक्सर वे यह समझ नहीं पाते कि “आसान पैसा” कई बार धोखाधड़ी, भ्रामक योजनाओं और बिचौलियों द्वारा किए जाने वाले शोषण का जाल भी साथ लेकर आता है। ऐसे एजेंट लोगों की जानकारी की कमी का फायदा उठाकर अपना लाभ कमाते हैं।

हाल ही में सामने आया एक मामला यह दर्शाता है कि किस प्रकार उधारकर्ता अनजाने में कर्ज के जाल में फंस सकता है।

नवंबर 2025 में एक व्यक्ति, जिसे यहां ‘एक्स’ के नाम से संबोधित किया जा रहा है, अपने बच्चे की फीस जमा करने के लिए ₹60,000 के ऋण की आवश्यकता लेकर एक निजी ऋण कंपनी के पास पहुंचा। कंपनी का नाम जाना-पहचाना था और किसी परिचित की सिफारिश भी थी, इसलिए उसे कंपनी भरोसेमंद लगी। पूरी प्रक्रिया कंपनी के एक एजेंट के माध्यम से संचालित की गई।

उधारकर्ता के अनुसार, एजेंट ने भरोसा दिलाया कि प्रक्रिया बेहद सरल है और दस्तावेज जमा करने तथा एक हस्ताक्षर करने के एक घंटे के भीतर राशि खाते में पहुंच जाएगी। जैसा वादा किया गया था, कुछ ही मिनटों में ₹60,000 की राशि उसके बैंक खाते में जमा हो गई।

लेकिन असली कहानी यहीं से शुरू होती है।

लोन 66,000 का प्रोसेस किया, 6 हजार एजेंट ने कमीशन जोड़ दिया

बाद में पता चला कि ऋण ₹60,000 का नहीं, बल्कि ₹66,000 का प्रोसेस किया गया था। एजेंट ने बड़ी चतुराई से यह जानकारी शुरुआत में नहीं दी थी। बाद में उधारकर्ता को मालूम हुआ कि अतिरिक्त ₹6,000 एजेंट द्वारा “कमीशन शुल्क” के रूप में जोड़ दिए गए थे।

चिंता की बात यह भी थी कि एजेंट ने इस संबंध में कोई लिखित दस्तावेज, रसीद या आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं कराया। सारी जानकारी केवल मोबाइल ऐप में दिखाई गई थी।

वास्तविक ब्याज दर स्पष्ट नहीं की, 31% वार्षिक लागू थी

उधारकर्ता का यह भी दावा है कि एजेंट ने ऋण पर लगने वाली वास्तविक ब्याज दर कभी स्पष्ट नहीं की। उसने केवल कुल ब्याज की एक राशि मौखिक रूप से बताई, जो वास्तविक देनदारी से काफी कम प्रतीत होती थी। जबकि वास्तविकता में ऋण पर लगभग 31 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर लागू थी।

ऋण की अवधि तय की गई थी—33 महीने।

यहीं तक बात सीमित नहीं थी। भुगतान संरचना भी इस प्रकार बनाई गई थी कि शुरुआती महीनों में जमा होने वाली अधिकांश ईएमआई केवल ब्याज चुकाने में चली जाए, जबकि मूलधन लगभग जस का तस बना रहे। जानकारी की कमी और लिखित विवरण न मिलने के कारण उधारकर्ता को इस बढ़ती हुई देनदारी का पूरा अंदाजा ही नहीं था।

7 महीनों मे 22 हजार ब्याज के चुका दिए

नवंबर से मई के बीच ही वह लगभग ₹22,000 केवल ब्याज के रूप में चुका चुका था। जब उसे यह एहसास हुआ कि नियमित किस्तें जारी रखने पर कुल भुगतान का बोझ और बढ़ता जाएगा, तब उसने किसी अन्य स्रोत से धन की व्यवस्था की और ऋण को समय से पहले बंद करने का निर्णय लिया। इसके लिए उसे ₹61,000 अतिरिक्त फोरक्लोजर भुगतान करना पड़ा।

परिणामस्वरूप, जिस व्यक्ति को वास्तव में ₹60,000 की जरूरत थी, उसने कुछ ही महीनों में कुल मिलाकर लगभग ₹83,000 चुका दिए। और ध्यान देने वाली बात यह है कि यदि उसने समय से पहले ऋण बंद न कराया होता, तो लगभग दो वर्ष और तक भुगतान जारी रखना पड़ता।

एजेंट लोन लेने वालों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की परिस्थितियां निजी ऋण क्षेत्र में असामान्य नहीं हैं, विशेषकर तब जब उधारकर्ता सीधे कंपनी से संपर्क करने के बजाय पूरी तरह एजेंटों पर निर्भर रहते हैं। कई एजेंट उधारकर्ता की मजबूरी और तात्कालिक आवश्यकता का फायदा उठाने से नहीं चूकते, क्योंकि उनका मुख्य उद्देश्य केवल अपना कमीशन प्राप्त करना होता है।

अक्सर उधारकर्ता निम्नलिखित महत्वपूर्ण प्रश्न पूछना ही भूल जाते हैं—

  • वास्तविक स्वीकृत ऋण राशि कितनी है?
    • प्रोसेसिंग शुल्क या कमीशन कितना है?
    • वार्षिक ब्याज दर क्या है?
    • फोरक्लोजर शुल्क कितना लगेगा?
    • ईएमआई का विस्तृत विभाजन क्या है?
    • पूरी अवधि में कुल कितना भुगतान करना होगा?

चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश लोगों को समझौते की वास्तविक गंभीरता का एहसास कई महीनों बाद होता है, जब वे पहले ही बड़ी राशि केवल ब्याज के रूप में चुका चुके होते हैं।

लोन लेते समय दस्तावेज मांगिए

यह मामला एक महत्वपूर्ण सीख देता है कि ऋण लेने से पहले उधारकर्ताओं को हमेशा निम्नलिखित दस्तावेज अवश्य मांगने चाहिए—

  • लिखित स्वीकृति पत्र (Sanction Letter)
    • आधिकारिक पुनर्भुगतान अनुसूची (Repayment Schedule)
    • ब्याज दर का स्पष्ट विवरण
    • प्रोसेसिंग शुल्क की जानकारी
    • फोरक्लोजर नीति से संबंधित दस्तावेज

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वित्तीय सलाहकार हमेशा ऋणदाता कंपनी से सीधे संपर्क करने की सलाह देते हैं, न कि किसी तीसरे पक्ष या एजेंट के माध्यम से। आपातकालीन परिस्थितियों में लिया गया ऋण तत्काल समस्या का समाधान जरूर प्रतीत हो सकता है, लेकिन यदि प्रक्रिया में पारदर्शिता न हो, तो वही अस्थायी आर्थिक संकट लंबे समय तक चलने वाले कर्ज के बोझ में बदल सकता है।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor