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अब मूक-बधिर बच्चे भी सुन सकेंगे दुनिया की आवाज

सरकार की ADIP योजना से हैदराबाद में मुफ्त कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी, लाखों परिवारों के लिए बनी उम्मीद की नई किरण

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर 

किसी बच्चे की पहली आवाज सुनना हर माता-पिता का सपना होता है। जब कोई मासूम “मां” या “पापा” बोलता है, तो वह पल पूरे परिवार के जीवन का सबसे बड़ा उत्सव बन जाता है। लेकिन कल्पना कीजिए उन माता-पिता की पीड़ा, जिनके बच्चे जन्म से ही सुन नहीं सकते और बोल नहीं पाते। वर्षों तक ऐसे परिवार अपने बच्चों को सामान्य जीवन देने की उम्मीद में अस्पतालों के चक्कर काटते रहे, लेकिन महंगी चिकित्सा और सीमित सुविधाओं के कारण अधिकांश लोगों का सपना अधूरा रह जाता था।

अब ऐसे लाखों परिवारों के लिए एक बड़ी राहत और खुशखबरी सामने आई है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की मदद से जन्मजात मूक-बधिर बच्चों को सुनने और बोलने में सक्षम बनाया जा सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि अब यह अत्याधुनिक कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी सरकार की ADIP योजना के तहत मुफ्त में उपलब्ध कराई जा रही है।

हैदराबाद स्थित अमृता इंस्टिट्यूट हेड एंड नेक हॉस्पिटल इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है, जहां आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की अत्याधुनिक तकनीक से मुफ्त सर्जरी की जा रही है।

क्या है कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी?

कॉक्लियर इम्प्लांट एक आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है, जो उन लोगों के लिए उपयोगी साबित होता है जिनकी सुनने की क्षमता अत्यंत कमजोर होती है या जो जन्म से ही सुन नहीं सकते। यह उपकरण कान के अंदर प्रत्यारोपित किया जाता है और सीधे श्रवण तंत्रिका को सक्रिय करता है।

सामान्य हियरिंग मशीन केवल आवाज को तेज करती है, लेकिन कॉक्लियर इम्प्लांट ध्वनि संकेतों को सीधे मस्तिष्क तक पहुंचाने में मदद करता है। इससे बच्चा धीरे-धीरे आवाज पहचानना सीखता है और स्पीच थेरेपी के माध्यम से बोलना भी शुरू कर सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह सर्जरी कम उम्र में कर दी जाए, तो बच्चे के सामान्य जीवन जीने की संभावना काफी बढ़ जाती है। कई बच्चे स्कूल जाने, पढ़ाई करने और सामान्य बच्चों की तरह जीवन जीने में सफल हो रहे हैं।

10 लाख तक की सर्जरी अब मुफ्त

सामान्य तौर पर कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की लागत लगभग 8 से 10 लाख रुपये तक होती है। यह राशि अधिकांश मध्यम और गरीब परिवारों के लिए असंभव जैसी होती है। इसी समस्या को देखते हुए भारत सरकार की ADIP योजना के तहत जरूरतमंद बच्चों को यह सुविधा मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही है।

ADIP योजना का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को सहायक उपकरण और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करना है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।

विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता की कमी के कारण अभी भी कई परिवार इस योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक माता-पिता यह मान लेते हैं कि उनका बच्चा कभी सुन या बोल नहीं सकेगा, जबकि आधुनिक तकनीक ने अब यह संभव बना दिया है।

अमृता इंस्टिट्यूट बना उम्मीद का केंद्र

हैदराबाद का अमृता इंस्टिट्यूट हेड एंड नेक हॉस्पिटल वर्तमान में इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान कर रहा है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम आधुनिक तकनीक और विशेष प्रशिक्षण के साथ बच्चों का उपचार कर रही है।

अस्पताल का पता है—
अमृता इंस्टिट्यूट हेड एंड नेक हॉस्पिटल
HIG-450, VI फेज,
JNTU हाईटेक सिटी रोड,
KPHB, हैदराबाद – 72

यहां मरीजों की जांच, सर्जरी और बाद की थेरेपी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों के अनुसार केवल ऑपरेशन ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि बच्चे को सुनने और बोलने की ट्रेनिंग भी दी जाती है, जिसके लिए विशेष स्पीच थेरेपी करवाई जाती है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कर रही सेवा

इस अभियान से जुड़े प्रसिद्ध कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जन डॉ. ए.एस. श्रीधर पुतुली वर्षों से इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे एमएस ईएनटी (उस्मानिया) विशेषज्ञ हैं और अनेक सफल सर्जरी कर चुके हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि यदि बच्चे में जन्म के बाद सुनने की समस्या दिखाई दे, जैसे—

  • आवाज पर प्रतिक्रिया न देना
  • बोलने में अत्यधिक देरी
  • तेज ध्वनि पर भी प्रतिक्रिया नहीं करना
  • नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना

तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार प्रारंभिक पहचान और समय पर सर्जरी बच्चे के भविष्य को पूरी तरह बदल सकती है।

समाज में बढ़े जागरूकता की जरूरत

चिकित्सा विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि आज सबसे बड़ी जरूरत जागरूकता फैलाने की है। अभी भी देश के कई हिस्सों में लोग मूक-बधिरता को भाग्य या लाइलाज बीमारी मानते हैं, जबकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने इस सोच को बदल दिया है।

अखंड भारत जागरूकता अभियान से जुड़े लोग लगातार लोगों तक यह संदेश पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं कि कोई भी बच्चा केवल जानकारी के अभाव में जीवनभर अंधेरे में न रहे।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति यह जानकारी एक जरूरतमंद परिवार तक पहुंचा दे, तो हजारों बच्चों का जीवन बदल सकता है।

परिवारों के लिए नई उम्मीद

कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां वर्षों तक न सुन पाने वाले बच्चों ने सर्जरी और थेरेपी के बाद पहली बार अपने माता-पिता की आवाज सुनी। ऐसे क्षण केवल चिकित्सा उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए भावनात्मक पुनर्जन्म जैसे होते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किया जाए, तो देश में हजारों मूक-बधिर बच्चों को सामान्य जीवन दिया जा सकता है।

संपर्क जानकारी

जरूरतमंद परिवार अधिक जानकारी के लिए संपर्क कर सकते हैं—

फोन नंबर:
+91 8978152606
+91 7032255931
040-400117931
040-40064008

विशेषज्ञ:
डॉ. ए.एस. श्रीधर पुतुली
एमएस, ईएनटी (उस्मानिया)
कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जन

एक संदेश समाज के नाम

यदि आपके आसपास कोई ऐसा बच्चा है जो जन्म से सुन नहीं सकता या बोल नहीं पाता, तो यह जानकारी उसके परिवार तक अवश्य पहुंचाएं। संभव है कि आपकी एक छोटी सी कोशिश किसी बच्चे की जिंदगी में आवाज, मुस्कान और नया भविष्य लेकर आए।

क्योंकि हर बच्चे को दुनिया की आवाज सुनने का अधिकार है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor