दर्द से जन्मी एक क्रांति
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
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राजस्थान की धरती पर जहां वर्षों से बाल विवाह जैसी कुरीति समाज के माथे पर कलंक बनी हुई है, वहीं इसी मिट्टी से एक ऐसी बेटी निकली जिसने अपने निजी दर्द को समाज सुधार की ताकत बना दिया। यह कहानी है जोधपुर की समाजसेवी और बाल विवाह विरोधी अभियान की अग्रणी योद्धा डॉ. कृति भारती की, जिन्होंने हजारों बच्चों की जिंदगी को अंधकार से निकालकर उजाले की ओर मोड़ा है।
डॉ. कृति भारती केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि उन मासूम बच्चियों की उम्मीद हैं जिन्हें कम उम्र में विवाह के बंधन में बांध दिया जाता है। संयुक्त राष्ट्र सहित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित हो चुकी कृति आज बाल विवाह उन्मूलन की वैश्विक पहचान बन चुकी हैं।
बचपन में संघर्ष, फिर भी नहीं टूटी हिम्मत
डॉ. कृति भारती का जीवन शुरुआत से ही संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने बताया कि जन्म लेने से पहले ही उनके पिता ने उन्हें और उनकी मां को छोड़ दिया था। कठिन परिस्थितियों में उनका पालन-पोषण हुआ। बचपन में उन्हें प्यार, सुरक्षा और अपनापन बहुत कम मिला।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब मात्र 10 वर्ष की आयु में उन्हें जहर दे दिया गया। इसका असर इतना भयानक था कि वे लंबे समय तक बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गईं। चलना-फिरना तो दूर, वे अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी दूसरों पर निर्भर हो गई थीं।
लेकिन उनकी मां ने हार नहीं मानी। देशभर में इलाज करवाने के बाद भी जब सुधार नहीं हुआ, तब भीलवाड़ा में आध्यात्मिक उपचार और रेकी थेरेपी के जरिए कृति ने धीरे-धीरे दोबारा चलना सीखा। 12 वर्ष की उम्र में उन्होंने फिर से अपने पैरों पर खड़ा होना शुरू किया। यही वह समय था जब उन्होंने तय कर लिया कि अब उनका जीवन केवल खुद के लिए नहीं, बल्कि समाज के कमजोर बच्चों के लिए समर्पित होगा।
“मुझे बचाने वाला कोई नहीं था, इसलिए मैं बच्चों को बचाने निकली”
डॉ. कृति भारती की यह पंक्ति आज हजारों बच्चियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि जब वे खुद संघर्ष कर रही थीं, तब उन्हें बचाने वाला कोई नहीं था। इसी दर्द ने उन्हें यह एहसास कराया कि वे उन बच्चों की “कृति दीदी” बनेंगी जिन्हें समाज की कुरीतियों से बचाने की जरूरत है।
12 साल की उम्र में उन्होंने जाति और धर्म से ऊपर उठने का फैसला किया और अपना सरनेम बदलकर “भारती” रख लिया। उनका कहना था कि वे केवल किसी जाति या धर्म की बेटी नहीं, बल्कि पूरे भारत की बेटी बनना चाहती थीं।
शिक्षा से फिर शुरू हुई जिंदगी
लंबे समय तक बीमार रहने के कारण उनकी पढ़ाई छूट गई थी, लेकिन उनकी मां ने दोबारा उन्हें शिक्षा से जोड़ा। डॉ. कृति ने कठिन परिस्थितियों में 16 से 18 घंटे तक पढ़ाई की और अपनी शिक्षा पूरी की। आज उनके पास पीएचडी सहित कई डिग्रियां हैं।
लेकिन वे मानती हैं कि उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि कोई डिग्री नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने का उनका मिशन है।
“सारथी ट्रस्ट” से शुरू हुई बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई
साल 2011-12 में डॉ. कृति भारती ने “सारथी ट्रस्ट” की स्थापना की। इस संगठन का उद्देश्य बाल विवाह जैसी कुप्रथा को खत्म करना और पीड़ित बच्चों को नया जीवन देना था।
उन्होंने केवल होने वाले बाल विवाह रुकवाने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन बच्चियों के लिए भी लड़ाई लड़ी जिनका विवाह पहले ही हो चुका था।
यहीं से शुरू हुआ भारत के पहले “चाइल्ड मैरिज कैंसिलेशन” का ऐतिहासिक अभियान। डॉ. कृति भारती ने देश का पहला बाल विवाह कानूनी रूप से निरस्त करवाया। यह उपलब्धि इतनी महत्वपूर्ण थी कि इसे लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया।
राजस्थान को बदनामी से सम्मान तक पहुंचाने की कोशिश
राजस्थान लंबे समय से बाल विवाह की घटनाओं के लिए बदनाम रहा है, लेकिन डॉ. कृति भारती ने इस सोच को बदलने का प्रयास किया। उन्होंने साबित किया कि यही राजस्थान अब बाल विवाह निरस्तीकरण के मामलों में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है।
उनकी मेहनत और कानूनी लड़ाइयों के चलते आज राजस्थान में सबसे अधिक बाल विवाह निरस्त किए जाने के मामले सामने आए हैं। यह केवल एक सामाजिक बदलाव नहीं, बल्कि सोच में आई क्रांति का संकेत है।
1600 से ज्यादा बाल विवाह रुकवाए
डॉ. कृति भारती और उनकी टीम अब तक लगभग 1600 से अधिक बाल विवाह रुकवा चुकी है। इसके अलावा उन्होंने दर्जनों बाल विवाह कानूनी रूप से निरस्त करवाए और हजारों महिलाओं एवं बच्चों के पुनर्वास का कार्य किया।
वे कहती हैं कि यही उनके जीवन का सबसे बड़ा पुरस्कार है। भले ही उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिले हों, लेकिन किसी बच्ची की बची हुई मुस्कान उनके लिए सबसे बड़ा अवॉर्ड है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी बढ़ा सम्मान
बाल विवाह के खिलाफ उनके संघर्ष को दुनिया ने भी सराहा है। उन्हें संयुक्त राष्ट्र सहित कई वैश्विक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया। वर्ष 2022 में उन्हें “ह्यूमन राइट्स चैंपियन” जैसे प्रतिष्ठित सम्मान भी मिले।
बॉलीवुड और हॉलीवुड के कई मंचों पर भी उनकी उपलब्धियों की चर्चा हुई। लेकिन इसके बावजूद वे आज भी जमीन से जुड़कर गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाती हैं।
सपना — किताबों तक सीमित रह जाए बाल विवाह
डॉ. कृति भारती का सबसे बड़ा सपना है कि आने वाली पीढ़ियां बाल विवाह को केवल इतिहास की किताबों में पढ़ें। वे चाहती हैं कि समाज से शोषण, अत्याचार और लैंगिक भेदभाव पूरी तरह समाप्त हो।
उनका मानना है कि जब समाज की सोच बदलेगी, तभी वास्तविक आजादी और समानता संभव होगी।
समाज के लिए प्रेरणा बनीं कृति भारती
आज डॉ. कृति भारती केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि कठिन से कठिन परिस्थितियां भी इंसान को रोक नहीं सकतीं, यदि उसके इरादे मजबूत हों।
एक ऐसी बच्ची जिसे कभी अपनापन नहीं मिला, वही आज हजारों बच्चों के जीवन में उम्मीद की रोशनी बन चुकी है। उनका संघर्ष, साहस और सेवा भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल है।
राजस्थान की यह बेटी आज सच में समाज परिवर्तन की एक जीवित क्रांति बन चुकी है।
आप डॉ कृति भारती की स्टोरी निम्न लिंक पर देख सुन सकते हैं




