
शास्त्री नगर के युगप्रवर्तक नन्द किशोर शारदा मिशन की पहल से जरूरतमंद महिलाओं को मिल रही आत्मनिर्भरता की राह
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
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शहर की सांसी बस्ती में संचालित “वात्सल्य माँ बसंती मनिहार सिलाई प्रशिक्षण केंद्र” आज जरूरतमंद महिलाओं के लिए नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनता जा रहा है। शास्त्री नगर स्थित युगप्रवर्तक नन्द किशोर शारदा मिशन के मार्गदर्शन में यह केंद्र सामाजिक सरोकार का ऐसा उदाहरण बनकर उभरा है, जहां आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद महिलाओं को न केवल सिलाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और सम्मान के साथ जीवन जीने की प्रेरणा भी मिल रही है।
इस प्रशिक्षण केंद्र का संचालन समाजसेवी नीतू सिंह द्वारा किया जा रहा है। उनके प्रयासों से कई महिलाएं आज अपने पैरों पर खड़े होने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। केंद्र में महिलाओं को सिलाई, कपड़ों की कटिंग, फॉल-पिको, डिजाइनिंग और घरेलू स्तर पर छोटे रोजगार शुरू करने से जुड़ी बारीकियां सिखाई जा रही हैं।
आर्थिक मजबूरी से आत्मनिर्भरता तक का सफर
सांसी बस्ती की कई महिलाएं वर्षों से आर्थिक तंगी और सामाजिक चुनौतियों से जूझ रही थीं। घर की जिम्मेदारियों के बीच उनके पास रोजगार या आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। ऐसे में यह केंद्र उनके लिए किसी नई रोशनी से कम साबित नहीं हो रहा।
केंद्र से जुड़ी महिलाओं ने बताया कि यहां आने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। पहले जहां वे खुद को सीमित महसूस करती थीं, वहीं अब उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है और वे भविष्य को लेकर आशावादी नजर आ रही हैं। कई महिलाएं अब अपने परिवार की आर्थिक मदद करने का सपना भी देखने लगी हैं।
कुछ महिलाओं ने कहा कि इस केंद्र ने उन्हें केवल सिलाई नहीं सिखाई, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने का हौसला भी दिया है। उनके अनुसार प्रशिक्षण के दौरान उन्हें परिवार जैसा वातावरण मिलता है, जिससे सीखने में सहजता महसूस होती है।
समाजसेवा के साथ महिला सशक्तिकरण का प्रयास
युगप्रवर्तक नन्द किशोर शारदा मिशन लंबे समय से सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से समाजहित में कार्य करता आ रहा है। मिशन का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को आत्मनिर्भर बनाना है।
मिशन से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि महिलाओं को कौशल और अवसर मिल जाएं तो वे अपने परिवार और समाज दोनों को नई दिशा दे सकती हैं। इसी सोच के साथ इस प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत की गई, ताकि जरूरतमंद महिलाओं को हुनर के माध्यम से सशक्त बनाया जा सके।
नीतू सिंह की मेहनत ला रही रंग
केंद्र का संचालन कर रहीं नीतू सिंह महिलाओं को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ उन्हें लगातार प्रोत्साहित भी करती हैं। वे महिलाओं को यह समझाने का प्रयास करती हैं कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक मजबूती नहीं, बल्कि आत्मसम्मान से भी जुड़ी होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नीतू सिंह की मेहनत और समर्पण के कारण ही यह केंद्र तेजी से महिलाओं के बीच लोकप्रिय हो रहा है। यहां प्रशिक्षण लेने वाली महिलाएं नियमित रूप से आकर नए हुनर सीख रही हैं।
क्षेत्र में बन रहा सकारात्मक माहौल
सांसी बस्ती जैसे क्षेत्र में इस तरह का प्रशिक्षण केंद्र खुलना सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे महिलाओं में जागरूकता बढ़ रही है और परिवारों में शिक्षा व आत्मनिर्भरता को लेकर सकारात्मक सोच विकसित हो रही है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार यदि ऐसे केंद्रों को लगातार सहयोग और प्रोत्साहन मिलता रहा तो आने वाले समय में कई महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकेंगी।
हुनर से बदल रही जिंदगी
वात्सल्य माँ बसंती मनिहार सिलाई प्रशिक्षण केंद्र आज केवल प्रशिक्षण देने का स्थान नहीं, बल्कि उन महिलाओं के लिए नई शुरुआत का मंच बन चुका है जो परिस्थितियों के कारण पीछे छूट गई थीं। यहां सीखने वाली महिलाओं की आंखों में अब आत्मनिर्भर भविष्य के सपने दिखाई देने लगे हैं।
समाज में महिला सशक्तिकरण की बात अक्सर की जाती है, लेकिन सांसी बस्ती में चल रही यह पहल उस सोच को जमीन पर उतारने का कार्य कर रही है। यह केंद्र साबित कर रहा है कि सही मार्गदर्शन, अवसर और सहयोग मिले तो महिलाएं हर चुनौती को पार कर नई पहचान बना सकती हैं।



