कविता : संजय भंडारी, सीए, ग्रीन गैलरी, जोधपुर
आँखों से शोले बरसने चाहिए
पद्मावती के जौहर पे
सर झुकना चाहिए!
महाराणा के शौर्य पर
गर्व होना चाहिए!
राणा सांगा के घावों पर
रक्त उबलना चाहिए!
लक्ष्मी बाई की जाँबाज़ी पर
छाती भर जानी चाहिए!
शिवाजी की तलवार पर
दंभ भरना चाहिए !
और
आक्रांताओं के जुल्मों पे
ज़हर उगलना चाहिए!
गद्दारों के मंसूबों पे
क़हर बरसाना चाहिए !
देश ने झेले है ऐसे तंज़
आँखों से शोले बरसने चाहिए
ग़ुलामी के झेले दर्द पे
आजादी की मोहर लगनी चाहिये!
ना हो फिर ऐसे हमले
उसकी तैयारी होनी चाहिए!
उसकी तैयारी होनी चाहिए!
संजय भंडारी, सीए, फाउंडर, ग्रीन गैलरी, जोधपुर




