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Sunday, August 23, 2026, 5:20 am

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Lifestyle

दूसरा ताजमहल पर सार्थक चर्चा

राखी पुरोहित. जोधपुर 

हमारे जीवन में बाहर जो दिखाई पड़ता, वह अंदर चल रहे ऊहापोह के सामने कुछ भी नहीं होता! बाहर से देखने पर बहुत से लोगों का जीवन संपन्न लगता!लेकिन उनका अकेला पन किस हद तक उनके जीवन को खा रहा हैं इसका बोध हम नहीं लगा पाते. ” दूसरा ताजमहल” कहानी एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम को अपनी तरह से रेखंकित करती हैं!

नयना का खालीपन एक उम्र के मोड़ पर, उसे रविभूषण नामक व्यक्ति के प्रति आकर्षित करता हैं! पति, बच्चों की अपनी दुनिया हैं, लेकिन उसके जीवन के रंगों को जीने का एक ख्वाबों का ताजमहल को समझने का समय किसी के पास नहीं! वास्तु विद रविभूषण का आगमन उसे एक ताजमहल की एस्पिरेशन से भर देता हैं! डॉक्टर पति से लिया आखिरी चुंबन की स्मृति भी उसके जीवन से कब कि धुंधली हो चुकी हैं! आकर्षण और अंदर। जो सालों से दबा पड़ा हैं वह हिमौरे मारने लगता हैं! दिल्ली बम्बई के बीच टेलिफोन पर बहुत कुछ घटित होता हैं! बहेलिया रविभूषण बम्बई की रफ़्तार में अपनी तरह से हर वह चीज मैनेज करना जानता हैं जो शराब के शुरूर में उसकी फैन्टसी बनती हैं!

महिला और पुरुष की सोच प्रेम और जीवन को लेकर क्या होती हैं? यह कहानी बढ़िया से हाईलाइट करतीं हैं! नासिरा शर्मा जिस मूड को लेकर कहानी शुरू करती है वह अंत तक अपनी ट्रैक से भटकती नहीं! हमारे समय की एक महत्वपूर्ण कहानी पर दोस्तों के साथ सार्थक बात हुई!

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor