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राजस्थान में बढ़ रही बच्चों के लापता होने की घटनाएं: क्या संगठित गिरोह हैं सक्रिय?

अजमेर में नाबालिगों की खरीद-फरोख्त के मामले ने बढ़ाई चिंता, हिंदू हेल्पलाइन के जोधपुर अध्यक्ष अशोक रायजादा ने मानव तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की

विशेष रिपोर्ट : दिलीप कुमार पुरोहित

जयपुर/जोधपुर 

राजस्थान में बच्चों और किशोरियों के लापता होने की घटनाओं ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और बाल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगातार बच्चों के गुम होने की खबरें सामने आ रही हैं। हाल के दिनों में जोधपुर सहित कई शहरों में बच्चों और किशोरियों के अचानक लापता होने के मामलों ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।

इसी बीच अजमेर से सामने आए एक मामले ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। पुलिस ने नाबालिग लड़कियों के कथित सौदे और जबरन विवाह से जुड़े एक संदिग्ध नेटवर्क की जांच शुरू की है। इस मामले में कई संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है और पुलिस विभिन्न क्षेत्रों में दबिश देकर तथ्यों को जुटाने में लगी हुई है।

हिंदू हेल्पलाइन के अध्यक्ष अशोक रायजादा का मानना है कि बच्चों के लापता होने के मामलों को केवल गुमशुदगी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इनके पीछे संभावित मानव तस्करी, बाल श्रम, जबरन विवाह, यौन शोषण और अन्य संगठित अपराधों की संभावना की भी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।

अजमेर प्रकरण ने बढ़ाई चिंता

अजमेर में पुलिस द्वारा की जा रही जांच के दौरान नाबालिग लड़कियों के कथित सौदे और विवाह से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं। पुलिस ने कुछ संदिग्ध महिलाओं को हिरासत में लेकर पूछताछ की है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं कोई संगठित गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बच्चियों को निशाना तो नहीं बना रहा।

पुलिस सूत्रों के अनुसार मामले की जांच कई जिलों तक फैली हुई है और कुछ संदिग्ध कड़ियों की पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

जोधपुर सहित कई जिलों में गुमशुदगी के मामले

पिछले कुछ वर्षों में बच्चों और किशोरियों के गुम होने की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। जोधपुर, जयपुर, अजमेर, बीकानेर, चूरू, बाड़मेर, पाली और अन्य जिलों से समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। कुछ मामलों में लंबी अवधि तक कोई जानकारी नहीं मिल पाती। यही स्थिति परिवारों के लिए सबसे बड़ी पीड़ा का कारण बनती है।

मानव तस्करी: देशव्यापी चुनौती

मानव तस्करी केवल राजस्थान की समस्या नहीं है बल्कि यह पूरे देश और दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती है। मानव तस्कर अक्सर गरीब, अशिक्षित और सामाजिक रूप से कमजोर परिवारों को निशाना बनाते हैं।

एक्सपर्ट के अनुसार मानव तस्करी के प्रमुख उद्देश्य हो सकते हैं:

  • जबरन विवाह
  • बाल श्रम
  • घरेलू कामकाज में शोषण
  • यौन शोषण
  • भीख मंगवाना
  • अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल
  • अंगों का सौदा

जांच एजेंसियां लगातार ऐसे नेटवर्कों को तोड़ने के प्रयास कर रही हैं।

बच्चों के गायब होने पर तुरंत क्या करें?

  1. तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाएं।
  2. बच्चे की हालिया फोटो उपलब्ध कराएं।
  3. 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
  4. रिश्तेदारों और मित्रों को सूचित करें।
  5. सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग करें।
  6. किसी भी संदिग्ध सूचना को तुरंत पुलिस तक पहुंचाएं।

परिवार, स्कूल, समाज और प्रशासन मिलकर काम करें : अशोक रायजादा

हिंदू हेल्पलाइन के अध्यक्ष अशोक रायजादा का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, स्कूल, समाज और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा।

उनके के अनुसार:

  • बच्चों को अजनबियों से सावधान रहने की शिक्षा दी जाए।
  • स्कूलों में सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं।
  • ऑनलाइन सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए।
  • रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाए।

किन बच्चों पर अधिक खतरा?

  • आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे
  • स्कूल छोड़ चुके बच्चे
  • अकेले यात्रा करने वाले बच्चे
  • सड़क पर रहने वाले बच्चे
  • पारिवारिक विवादों से प्रभावित बच्चे

पुलिस और प्रशासन के सामने चुनौती

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक तकनीक ने अपराधियों के तौर-तरीकों को भी बदल दिया है। सोशल मीडिया, फर्जी पहचान और डिजिटल संपर्कों के माध्यम से बच्चों को बहलाने-फुसलाने के मामले सामने आते रहे हैं। इसीलिए साइबर निगरानी, सीसीटीवी नेटवर्क, फेस रिकग्निशन तकनीक और अंतरराज्यीय समन्वय को मजबूत बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

अभिभावक इन बातों का रखें ध्यान

  1. बच्चों को अपना मोबाइल नंबर याद करवाएं।
  2. स्कूल और घर के बीच सुरक्षित मार्ग तय करें।
  3. बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें।
  4. अजनबियों से मिलने-जुलने के प्रति जागरूक करें।
  5. किसी भी असामान्य गतिविधि की सूचना तुरंत दें।

सामाजिक जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार

एक्सपर्ट का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए समाज को अधिक सतर्क और जागरूक बनने की आवश्यकता है। यदि कोई बच्चा संदिग्ध परिस्थितियों में दिखाई दे, किसी नाबालिग का जबरन विवाह कराया जा रहा हो या किसी प्रकार की मानव तस्करी की आशंका हो तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना दी जानी चाहिए।

राजस्थान में बढ़ती गुमशुदगी की घटनाएं एक गंभीर चेतावनी हैं। हालांकि हर गुमशुदगी का संबंध किसी संगठित गिरोह से हो, यह आवश्यक नहीं है, लेकिन प्रत्येक मामले की गंभीर जांच और समय पर कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण है। बच्चों की सुरक्षा केवल एक कानूनी मुद्दा नहीं बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। तभी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor