निशुल्क प्रशिक्षण से तैयार हुए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय खिलाड़ी, जोधपुर का नाम विश्व पटल पर किया रोशन
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
9783414079 diliprakhai@gmail.com
जोधपुर की धरती केवल संस्कृति, विरासत और पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि खेल प्रतिभाओं के लिए भी देशभर में अपनी अलग पहचान बना रही है। इस पहचान को मजबूत करने में अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग कोच विनोद आचार्य और उनकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के पुराने परिसर में संचालित प्रशिक्षण केंद्र पिछले लगभग 18 से 20 वर्षों से निशुल्क खेल प्रशिक्षण देकर सैकड़ों खिलाड़ियों का भविष्य संवार रहा है। इस केंद्र से नौ अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, सैकड़ों राष्ट्रीय खिलाड़ी तथा दर्जनों अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता तैयार हुए हैं।
हाल ही में जोधपुर हैंड प्रोसेस टेक्सटाइल एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष उमेश लीला के सम्मान समारोह के दौरान राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित ने अंतरराष्ट्रीय कोच विनोद आचार्य से विशेष बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने खेलों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता, खिलाड़ियों की उपलब्धियों, सरकारी सहयोग, भविष्य की योजनाओं तथा खेलों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की।
विशेष साक्षात्कार
अंतरराष्ट्रीय कोच विनोद आचार्य से बातचीत
प्रश्न 1 : विनोद जी, सबसे पहले आपको हाल ही में हुए पदोन्नति के लिए बधाई। आज आयोजित कार्यक्रम के बारे में हमारे पाठकों को बताइए।
उत्तर : बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं राइजिंग भास्कर और आपके माध्यम से सभी खेल प्रेमियों का आभार व्यक्त करता हूं। आज का कार्यक्रम हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के पुराने परिसर में स्थित यह प्रशिक्षण केंद्र लगभग दो दशकों से खेल प्रतिभाओं को निखारने का कार्य कर रहा है। आज यहां जोधपुर हैंड प्रोसेस टेक्सटाइल एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष उमेश लीला का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जोधपुर वुशु संघ के अध्यक्ष सुरेश डोसी, समाजसेवी अनिल सिंघवी, दिनेश प्रजापत सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया तथा भविष्य में सहयोग का आश्वासन दिया।
प्रश्न 2 : इस प्रशिक्षण केंद्र की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या मानते हैं?
उत्तर : हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि खिलाड़ियों की सफलता है। पिछले 18 से 20 वर्षों में इस केंद्र से नौ अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार हुए हैं। सैकड़ों खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं और लगभग 50 वुशु तथा 40 मुक्केबाजी खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया है।
हमारा उद्देश्य केवल पदक जीतना नहीं बल्कि अनुशासित और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है। कई खिलाड़ी खेल कोटे से सरकारी सेवाओं में नियुक्त हुए हैं, जो हमारे लिए गर्व का विषय है।
प्रश्न 3 : यह पूरा प्रशिक्षण निशुल्क दिया जाता है। इसके पीछे आपकी सोच क्या है?
उत्तर : खेल प्रतिभा किसी आर्थिक वर्ग की मोहताज नहीं होती। कई बच्चे ऐसे परिवारों से आते हैं जहां प्रशिक्षण का खर्च उठाना संभव नहीं होता। यदि प्रतिभा को अवसर नहीं मिले तो वह दम तोड़ देती है।
हमारी टीम ने तय किया कि आर्थिक अभाव किसी बच्चे के सपनों की राह में बाधा नहीं बनेगा। इसी सोच के साथ वर्षों से निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जब कोई खिलाड़ी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतता है तो वही हमारी सबसे बड़ी कमाई होती है।
प्रश्न 4 : वर्तमान में इस केंद्र में कितने खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं?
उत्तर : नियमित रूप से लगभग 100 से 150 बच्चे यहां प्रशिक्षण लेते हैं। इनमें बालक और बालिकाएं दोनों शामिल हैं। हमें विशेष खुशी इस बात की है कि बेटियां भी लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और राष्ट्रीय स्तर पर जोधपुर का नाम रोशन कर रही हैं।
प्रश्न 5 : हाल के वर्षों में खिलाड़ियों की कौन-कौन सी उपलब्धियां उल्लेखनीय रही हैं?
उत्तर : हाल ही में दौसा में आयोजित राज्य स्तरीय मुक्केबाजी प्रतियोगिता में जोधपुर की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार स्वर्ण पदक जीते और जिले को चैंपियन बनाया। इसके अलावा हमारी अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ी मंजू चौधरी को खेल कोटे से कनिष्ठ सहायक के पद पर नियुक्ति मिली है। यह उपलब्धि अन्य खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
प्रश्न 6 : सरकार और जनप्रतिनिधियों का आपको कितना सहयोग मिलता है?
उत्तर : खेलों में परिणाम सबसे अधिक मायने रखते हैं। जब खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो सरकार और समाज दोनों सहयोग के लिए आगे आते हैं। हाल ही में विधायक कोष से लगभग 40 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई है, जिससे यहां खेल सुविधाओं का विकास होगा। इसके लिए विधायक अतुल भंसाली और सुरेश डोसी सहित सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त करता हूं। पूर्व में भी विभिन्न सरकारों ने हमारी आवश्यकताओं को समझा और यथासंभव सहयोग प्रदान किया। हमें विश्वास है कि भविष्य में भी यह सहयोग जारी रहेगा।
प्रश्न 7 : एक कोच के रूप में आपकी सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?
उत्तर : सबसे बड़ी चुनौती संसाधनों की कमी और खिलाड़ियों का मनोबल बनाए रखना रही है। कई बार आर्थिक समस्याएं, पारिवारिक परिस्थितियां और सुविधाओं का अभाव खिलाड़ियों को प्रभावित करता है। लेकिन जब प्रशिक्षक और खिलाड़ी एक परिवार की तरह काम करते हैं तो कठिनाइयां छोटी लगने लगती हैं। हमने हमेशा खिलाड़ियों को यह विश्वास दिलाया कि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती।
प्रश्न 8 : आज के युवा खिलाड़ियों को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
उत्तर : खेल केवल शारीरिक शक्ति का माध्यम नहीं बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का सबसे प्रभावी साधन है। खिलाड़ियों को अनुशासन, धैर्य और निरंतर अभ्यास को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में ध्यान भटकना आसान है, लेकिन सफलता वही प्राप्त करता है जो अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहता है। यदि युवा पूरी ईमानदारी से मेहनत करें तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचना असंभव नहीं है।
प्रश्न 9 : जोधपुर की खेल प्रतिभाओं का भविष्य आप किस रूप में देखते हैं?
उत्तर : मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले वर्षों में जोधपुर देश के प्रमुख खेल केंद्रों में शामिल होगा। यहां प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता केवल उचित मार्गदर्शन और अवसर की है। हमारे यहां प्रशिक्षित खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त कर रहे हैं। यह संकेत है कि भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है।
प्रश्न 10 : आपके लिए सबसे गर्व का क्षण कौन सा रहा?
उत्तर : जब कोई खिलाड़ी पहली बार राष्ट्रीय ध्वज के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेता है, वह क्षण मेरे लिए सबसे भावुक और गर्वपूर्ण होता है। एक प्रशिक्षक के रूप में जब मैं देखता हूं कि कोई बच्चा, जिसने इस मैदान से अपने सफर की शुरुआत की थी, आज देश का प्रतिनिधित्व कर रहा है, तब लगता है कि वर्षों की मेहनत सफल हुई।
प्रश्न 11 : समाज और उद्योग जगत से आप क्या अपेक्षा रखते हैं?
उत्तर : खेल केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। समाज, उद्योग जगत और सामाजिक संस्थाओं को भी आगे आना चाहिए। यदि उद्योगपति और सामाजिक संगठन खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन दें तो और अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त कर सकते हैं। आज उमेश लीला जैसे उद्योगपति खिलाड़ियों के बीच आए और सहयोग का आश्वासन दिया, यह खेलों के लिए सकारात्मक संकेत है।
प्रश्न 12 : अंत में राइजिंग भास्कर के पाठकों के लिए आपका संदेश?
उत्तर : मैं सभी अभिभावकों से कहना चाहूंगा कि वे बच्चों को खेलों के लिए प्रोत्साहित करें। खेल केवल करियर नहीं बल्कि बेहतर जीवन का मार्ग है। स्वस्थ शरीर, मजबूत आत्मविश्वास और अनुशासित जीवन खेलों की सबसे बड़ी देन है। मैं राइजिंग भास्कर और ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने खेल और खिलाड़ियों की उपलब्धियों को समाज तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। हम सभी मिलकर खेल संस्कृति को और मजबूत बनाएंगे तथा जोधपुर, राजस्थान और भारत का नाम विश्व स्तर पर रोशन करेंगे।





