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Thursday, July 9, 2026, 12:56 am

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मानसून से पहले पशुओं का टीकाकरण क्यों जरूरी? खेड़ली गड्डियां से शुरू हुआ जागरूकता अभियान

अदाणी फाउंडेशन, कवाई ने अपने वार्षिक पशु टीकाकरण अभियान की शुरुआत खेड़ली गड्डियां गांव से की है।

राखी पुरोहित. कोटा/कवाई 

ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन लाखों परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में पशुओं को मौसमी बीमारियों से सुरक्षित रखना न केवल पशुधन संरक्षण बल्कि किसानों की आर्थिक सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से अदाणी फाउंडेशन, कवाई ने अपने वार्षिक पशु टीकाकरण अभियान की शुरुआत खेड़ली गड्डियां गांव से की है।

अभियान के तहत पशुओं को हेमरेजिक सेप्टीसीमिया (एचएस/गलघोंटू) बीमारी से बचाने के लिए टीके लगाए जा रहे हैं। पशु चिकित्सकों के अनुसार गलघोंटू एक गंभीर जीवाणुजनित बीमारी है, जो विशेष रूप से मानसून के दौरान तेजी से फैलती है और समय पर उपचार न मिलने पर पशुओं की मृत्यु तक का कारण बन सकती है।

अदाणी फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान का लक्ष्य करीब 3,000 पशुओं का टीकाकरण करना है। वहीं अब तक लगभग 200 पशुओं को टीका लगाया जा चुका है। अभियान के दौरान पशुपालकों को पशुओं के स्वास्थ्य प्रबंधन, नियमित टीकाकरण, स्वच्छता और रोगों की शुरुआती पहचान के संबंध में भी जानकारी दी जा रही है।

मानसून शुरू होने से पहले हर वर्ष आयोजित किए जाने वाला यह टीकाकरण शिविर पशुओं को मौसमी बीमारियों के प्रकोप से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण निवारक पहल हैं। इस समय पर किए गए इन प्रयासों के माध्यम से, अदाणी फाउंडेशन पशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, पशुधन की मृत्यु दर को कम करने और पशुपालन पर निर्भर ग्रामीण परिवारों की आजीविका को मजबूत करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के मौसम में बढ़ी हुई नमी और संक्रमण का खतरा पशुओं को अधिक संवेदनशील बना देता है। ऐसे में मानसून से पहले किया गया टीकाकरण बीमारी की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है। इससे न केवल पशुओं का स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है, बल्कि दूध उत्पादन और पशुपालकों की आय पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को भी कम किया जा सकता है।

ग्रामीण विकास से जुड़े जानकारों का मानना है कि कई बार जागरूकता की कमी के कारण पशुपालक समय पर टीकाकरण नहीं करा पाते, जिससे बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में गांव स्तर पर आयोजित टीकाकरण शिविर न केवल स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का माध्यम बनते हैं, बल्कि पशुपालकों को वैज्ञानिक पशुपालन अपनाने के लिए भी प्रेरित करते हैं।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor