“रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में गूँजा छंदों का स्वर, प्रतिभागियों को वितरित हुए प्रमाण-पत्र”
दिलीप कुमार पुरोहित. भोपाल
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रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के तत्वावधान में संचालित हिन्दी छंद लेखन सर्टिफिकेट कोर्स के तृतीय, चतुर्थ एवं पंचम बैच के सफल प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय के कथा ऑडिटोरियम में आयोजित एक गरिमामय समारोह में प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मानविकी एवं उदार कला संकाय की अधिष्ठाता डॉ. रुचि मिश्रा तिवारी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में देश की सुप्रसिद्ध मंचीय कवयित्री श्रीमती संगीता सरल उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ कोर्स के संचालक योगेश समदर्शी द्वारा वीणापाणि माँ सरस्वती की वंदना से हुआ।
समारोह में विभिन्न बैचों के प्रतिभागियों ने अपनी श्रेष्ठ छंद रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं का मन मोह लिया। प्रतिभागियों की सशक्त प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को साहित्यिक ऊर्जा से भर दिया।
मुख्य अतिथि संगीता सरल ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु का जीवन में अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। गुरु ही व्यक्ति को सही दिशा प्रदान करता है, चाहे वह जीवन की यात्रा हो अथवा छंद साधना का पथ। उन्होंने सभी छंद साधकों को काव्य-सृजन के क्षेत्र में निरंतर साधना, अध्ययन और अनुशासन बनाए रखने के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण संगीता सरल का काव्य-पाठ रहा। उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में मुक्तक, ग़ज़ल और गीत प्रस्तुत किए। उनके तरन्नुम में गाए गए काव्य-पाठ ने ऑडिटोरियम में उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरा सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूँजता रहा।
अध्यक्षीय उद्बोधन में मानविकी एवं उदार कला संकाय की डीन डॉ. रुचि मिश्रा तिवारी ने कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय विद्यार्थियों की रचनात्मक दक्षताओं को विकसित करने हेतु अनेक कौशल-आधारित पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है। इनमें लघुकथा लेखन, कविता लेखन, हिन्दी छंद लेखन, नाट्य एवं संगीत से संबंधित विभिन्न ऑनलाइन पाठ्यक्रम प्रमुख हैं। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों की अभिरुचियों को परिष्कृत करने और उनकी सृजनात्मक प्रतिभा को निखारने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्राप्ति पर शुभकामनाएँ दीं।
हिन्दी छंद लेखन सर्टिफिकेट कोर्स के संचालक योगेश समदर्शी ने कहा कि यह कक्षा किसी को कवि या छंदकार बनाने का दावा नहीं करती, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर पहले से विद्यमान कवि को तराशने और उसकी सृजनात्मक क्षमता को जागृत करने का प्रयास करती है। उन्होंने बताया कि यह पाठ्यक्रम गुरु-शिष्य परंपरा की भावना के साथ विद्यार्थियों में कविता और साहित्य की समझ के संस्कार विकसित करने का कार्य कर रहा है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अब तक इस कोर्स के पाँच बैच पूर्ण हो चुके हैं तथा 85 से अधिक हिन्दी छंद साधक इस प्रमाण-पत्र को प्राप्त कर चुके हैं।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन हिन्दी विभाग के सहायक प्राध्यापक नवनीत सिंह ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा से संदीप कुमार, चंडीगढ़ से सत्यवती आचार्य, श्रीगंगानगर से महावीर प्रसाद सुथार, इंदौर से शीतल सिंह राघव, लखनऊ से रौनक पोरवाल, रायपुर से जितेन्द्र पांचाल, धार से विजय शिंदे ‘मनपसंद’, शारजाह (यूएई) से कुलभूषण व्यास, गाजियाबाद से अमित चन्ना, पंचकूला से गौरव शर्मा तथा सतना से गुंजन जैन सहित अनेक प्रतिभागी उपस्थित रहे। सभी ने अपने उत्कृष्ट छंदों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं की भरपूर सराहना प्राप्त की।
इस अवसर पर मानविकी एवं उदार कला विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजलि तिवारी, डॉ. मधुप्रिया पाठक, डॉ. अनुपमा वंदना तथा डॉ. पूनम मटकर ने भी अपनी काव्य प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को समृद्ध किया और श्रोताओं की खूब तालियाँ बटोरीं।








