चक्षु चिकित्सा सेवा समिति के अध्यक्ष कमलराज धारीवाल का कहना है कि “हमारा लक्ष्य केवल आंखों का इलाज नहीं, बल्कि समाज के हर जरूरतमंद तक रोशनी पहुंचाना है”
विशेष साक्षात्कार
दिलीप कुमार पुरोहित
ग्रुप एडिटर, राइजिंग भास्कर
9783414079 diliprakhai@gmail.com
जोधपुर की धरती सेवा, समर्पण और परोपकार की परंपरा के लिए जानी जाती है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए चक्षु चिकित्सा सेवा समिति पिछले 65 वर्षों से लाखों लोगों के जीवन में प्रकाश भरने का कार्य कर रही है। स्वर्गीय पुखराजजी अबाणी के संकल्प से प्रारंभ हुई यह संस्था आज राजस्थान की अग्रणी नेत्र चिकित्सा संस्थाओं में शामिल है। गरीबों के लिए निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन, ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्र शिविर, विद्यार्थियों की आंखों की जांच, डायबिटिक रेटिना संरक्षण जैसी योजनाओं के माध्यम से समिति ने सेवा का एक अद्भुत मॉडल प्रस्तुत किया है।
अब संस्था जोधपुर में लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक सुपर स्पेशियलिटी नेत्र चिकित्सालय स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना, संस्था के अब तक के सफर और भविष्य की योजनाओं पर चक्षु चिकित्सा सेवा समिति के अध्यक्ष श्री कमलराज धारीवाल से राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित ने विस्तृत बातचीत की।
प्रश्न : चक्षु चिकित्सा सेवा समिति के 65 वर्षों के इस गौरवशाली सफर को आप किस रूप में देखते हैं?
कमलराज धारीवाल : यह केवल एक संस्था का सफर नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन में लौटाई गई रोशनी की कहानी है। वर्ष 1961 में जब स्वर्गीय पुखराजजी अबाणी और उनके सहयोगियों ने इस संस्था की नींव रखी थी, तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह सेवा आंदोलन इतना व्यापक स्वरूप ले लेगा।
आज पीछे मुड़कर देखते हैं तो महसूस होता है कि हजारों लोगों की आंखों में जो प्रकाश लौटा है, वही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है। अनेक ऐसे मरीज हमारे पास आए जो आर्थिक अभाव के कारण उपचार नहीं करा सकते थे। आज वे सामान्य जीवन जी रहे हैं। यही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है।
प्रश्न : संस्था की मूल सोच और उद्देश्य क्या है?
कमलराज धारीवाल : हमारी मूल भावना बहुत स्पष्ट है—“कोई व्यक्ति केवल आर्थिक कमजोरी के कारण दृष्टि से वंचित न रहे।”
नेत्र ज्योति मानव जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है। यदि किसी व्यक्ति की दृष्टि चली जाती है तो उसका पूरा परिवार प्रभावित होता है। इसलिए हमने सेवा को व्यवसाय नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व माना है। हम चाहते हैं कि आधुनिक नेत्र चिकित्सा केवल बड़े शहरों और संपन्न वर्ग तक सीमित न रहे, बल्कि गरीब और ग्रामीण व्यक्ति तक भी पहुंचे।
प्रश्न : वर्तमान में समिति किन अस्पतालों का संचालन कर रही है?
कमलराज धारीवाल : वर्तमान में समिति तीन प्रमुख संस्थानों के माध्यम से सेवाएं दे रही है—
- चक्षु चिकित्सा सेवा समिति, चांदी हॉल, जोधपुर
- पटवा छोटल बिदाम कंवर चक्षु चिकित्सालय, प्रतापनगर
- डॉ. एल.एम. सिंघवी चक्षु चिकित्सालय, शास्त्री नगर
इन सभी संस्थानों में आधुनिक उपकरणों, अनुभवी चिकित्सकों और प्रशिक्षित स्टाफ के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
प्रश्न : गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए समिति क्या विशेष कार्य कर रही है?
कमलराज धारीवाल : हमारी प्राथमिकता सदैव जरूरतमंद वर्ग रहा है। नियमित रूप से निःशुल्क और रियायती मोतियाबिंद ऑपरेशन किए जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में शिविर आयोजित कर मरीजों की पहचान की जाती है और आवश्यकता होने पर उन्हें अस्पताल लाकर ऑपरेशन करवाया जाता है। हम मानते हैं कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक चिकित्सा सुविधा पहुंचना ही सच्ची सेवा है।
प्रश्न : मोतियाबिंद ऑपरेशन को लेकर संस्था की क्या उपलब्धियां रही हैं?
कमलराज धारीवाल : पहले हम प्रत्येक शनिवार को निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन करते थे, लेकिन बढ़ती जरूरत को देखते हुए अब यह सुविधा प्रतिदिन उपलब्ध है। मोतियाबिंद बुजुर्गों में अंधत्व का सबसे बड़ा कारण है। समय पर ऑपरेशन होने से व्यक्ति पुनः सामान्य जीवन जी सकता है। हजारों मरीजों के सफल ऑपरेशन हमारे लिए गर्व का विषय हैं।
प्रश्न : आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में समिति कितनी आगे बढ़ी है?
कमलराज धारीवाल : आज नेत्र चिकित्सा में तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमने हमेशा तकनीकी उन्नयन को प्राथमिकता दी है। हमारे अस्पतालों में Zeiss, Nidek, Topcon और Alcon जैसी विश्वस्तरीय कंपनियों के उपकरण उपलब्ध हैं। रेटिना, कॉर्निया, ग्लूकोमा और अन्य जटिल रोगों की सटीक जांच और उपचार किया जा रहा है। हम चाहते हैं कि जो सुविधा महानगरों में उपलब्ध है, वही जोधपुर और आसपास के लोगों को भी मिले।
प्रश्न : डायबिटिक मरीजों के लिए डीआरपीसी योजना कितनी महत्वपूर्ण है?
कमलराज धारीवाल : आज मधुमेह तेजी से बढ़ रही है। इसके कारण रेटिना प्रभावित होती है और कई लोग धीरे-धीरे दृष्टि खो देते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने Diabetic Retina Protection Card (DRPC) योजना शुरू की है।
इस योजना के माध्यम से मरीज नियमित जांच करा सकते हैं और प्रारंभिक अवस्था में बीमारी पकड़ में आ जाती है। मेरा मानना है कि आने वाले वर्षों में यह योजना अंधत्व रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्रश्न : विद्यार्थियों के लिए चल रहे आई स्क्रीनिंग कार्यक्रम का क्या प्रभाव रहा है?
कमलराज धारीवाल : यह हमारे सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में से एक है।हजारों विद्यार्थियों की आंखों की जांच की जा चुकी है। कई बच्चों में दृष्टिदोष प्रारंभिक अवस्था में ही पकड़ में आया, जिससे समय पर उपचार संभव हो सका। यदि बच्चे स्पष्ट रूप से नहीं देख पाते, तो उनकी पढ़ाई और आत्मविश्वास दोनों प्रभावित होते हैं। इसलिए यह कार्यक्रम समाज के भविष्य में निवेश है।
प्रश्न : समिति के साथ 820 से अधिक आजीवन सदस्य जुड़े हैं। इसे आप कैसे देखते हैं?
कमलराज धारीवाल : यह समाज के विश्वास का प्रतीक है। जब लोग किसी संस्था से भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं, तभी वह संस्था लंबे समय तक टिकती है। हमारे आजीवन सदस्य, दानदाता और स्वयंसेवक ही हमारी वास्तविक शक्ति हैं।
प्रश्न : सरदारपुरा में प्रस्तावित सुपर स्पेशियलिटी नेत्र चिकित्सालय की क्या विशेषताएं होंगी?
कमलराज धारीवाल : यह हमारा ड्रीम प्रोजेक्ट है। लगभग 3800 वर्गफुट भूमि पर 15 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक सुपर स्पेशियलिटी नेत्र चिकित्सालय विकसित किया जाएगा। यहां रेटिना, कॉर्निया, ग्लूकोमा, बाल नेत्र रोग, लेजर सर्जरी और अन्य जटिल उपचार एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगे। हमारा उद्देश्य है कि मरीजों को उपचार के लिए जयपुर, अहमदाबाद या दिल्ली न जाना पड़े।
प्रश्न : इस परियोजना के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
कमलराज धारीवाल : सबसे बड़ी चुनौती संसाधनों का प्रबंधन है। लेकिन हमें समाज के सहयोग पर पूरा विश्वास है। जब उद्देश्य सेवा हो तो समाज हमेशा साथ खड़ा होता है। हमें विश्वास है कि यह परियोजना जनसहयोग से अवश्य साकार होगी।
प्रश्न : आने वाले वर्षों के लिए आपकी क्या दृष्टि है?
कमलराज धारीवाल : हम चाहते हैं कि पश्चिमी राजस्थान में कोई भी व्यक्ति उपचार के अभाव में दृष्टि न खोए। हम अधिक मोबाइल नेत्र शिविर, ग्रामीण आउटरीच कार्यक्रम, स्कूल स्क्रीनिंग अभियान और डिजिटल नेत्र स्वास्थ्य सेवाएं शुरू करना चाहते हैं। साथ ही रिसर्च, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
प्रश्न : समाज के लिए आपका संदेश?
कमलराज धारीवाल : नेत्रदान, रक्तदान और सेवा—ये तीन ऐसे कार्य हैं जो किसी व्यक्ति को जीवनभर यादगार बना सकते हैं। मैं समाज से आग्रह करूंगा कि नियमित नेत्र जांच करवाएं, मधुमेह और ग्लूकोमा जैसी बीमारियों के प्रति जागरूक रहें तथा जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए आगे आएं। यदि हम किसी व्यक्ति की आंखों में रोशनी लौटा सकें तो इससे बड़ा पुण्य शायद कोई नहीं।
65 वर्षों का सफर : मानवता, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरक अध्याय
चक्षु चिकित्सा सेवा समिति का 65 वर्षों का सफर केवल चिकित्सा सेवाओं की कहानी नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरक अध्याय है। अध्यक्ष कमलराज धारीवाल के नेतृत्व में संस्था अब सेवा के एक नए युग की ओर बढ़ रही है। 15 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित सुपर स्पेशियलिटी नेत्र चिकित्सालय न केवल जोधपुर बल्कि पूरे पश्चिमी राजस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र साबित होगा।
रोशनी बांटने का यह अभियान आने वाले वर्षों में लाखों लोगों के जीवन को नई दिशा देगा और यही चक्षु चिकित्सा सेवा समिति की सबसे बड़ी पहचान है।























