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Sunday, October 18, 2026, 8:09 am

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तिथि अनुसार जोधपुर के स्थापना दिवस पर बाल लोकनृत्य प्रतिभा संजीवनी पुरोहित सम्मानित

लोक संगीत माड़ शोध संस्थान ने संजीवनी पुरोहित को लोक संस्कृति संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए किया सम्मानित

राखी पुरोहित. जोधपुर

निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर गुरुवार को लोक संगीत माड़ शोध संस्थान की ओर से होटल चंद्रा इंपीरियल में एक गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राजस्थान की उभरती हुई बाल लोकनृत्य कलाकार संजीवनी पुरोहित को लोक नृत्य के क्षेत्र में उनकी उल्लेखनीय प्रतिभा, समर्पण और लोक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। संजीवनी के साथ यह सम्मान उनकी माताजी ने ग्रहण किया।

समारोह में लोक कला, संगीत, साहित्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य लोक संस्कृति से जुड़ी प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के लिए प्रेरित करना था।

कम उम्र में लोकनृत्य के क्षेत्र में बनाई विशेष पहचान

संजीवनी पुरोहित ने बहुत कम आयु में ही अपनी प्रतिभा के बल पर लोकनृत्य की दुनिया में अलग पहचान बनाई है। उन्होंने विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों, विद्यालयी एवं सामाजिक मंचों पर राजस्थान के पारंपरिक लोकनृत्यों की प्रभावशाली प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया है। उनकी प्रस्तुतियों में राजस्थान की समृद्ध लोक परंपरा, संस्कृति और सभ्यता की जीवंत झलक दिखाई देती है।

संस्थान के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान समय में जब आधुनिकता के प्रभाव से लोक कलाएं नई चुनौतियों का सामना कर रही हैं, ऐसे में संजीवनी जैसी युवा एवं बाल प्रतिभाएं लोक संस्कृति को नई ऊर्जा और नई पहचान देने का कार्य कर रही हैं। उनका यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक है।

माताजी ने ग्रहण किया सम्मान

समारोह के दौरान संजीवनी पुरोहित की ओर से उनकी माताजी ने सम्मान ग्रहण किया। संस्थान के प्रतिनिधियों ने उन्हें स्मृति-चिह्न, प्रशस्ति-पत्र एवं सम्मान सामग्री भेंट कर शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने संजीवनी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे आगे भी अपनी प्रतिभा के माध्यम से राजस्थान की लोक संस्कृति का गौरव राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाएं।

लोक संस्कृति के संरक्षण का दिया संदेश

कार्यक्रम में पूर्व जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास ने कहा कि लोक संगीत, लोकनृत्य और लोक परंपराएं किसी भी समाज की सांस्कृतिक पहचान होती हैं। यदि नई पीढ़ी इन कलाओं से जुड़ती है तो हमारी समृद्ध विरासत सुरक्षित रह सकती है। लोक संगीत माड़ शोध संस्थान लंबे समय से लोक कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने, उनका सम्मान करने तथा लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

समारोह के अंत में संस्थान ने सभी कलाकारों, अतिथियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए लोक कला के संरक्षण के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग से सहयोग की अपील की। कार्यक्रम का समापन लोक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। बाल कलाकार संजीवनी पुरोहित का सम्मान समारोह का प्रमुख आकर्षण रहा और उपस्थित सभी लोगों ने उनकी प्रतिभा की मुक्त कंठ से सराहना की। संजीवनी के नेतृत्व को फिल्म अदाकारा शिल्पा शेट्‌टी भी सराहना कर चुकी है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor