लेखक : प्रवीण मैढ़, MSc भौतिक शास्त्र, अधिस्नातक डिप्लोमा, मानव संसाधन प्रबंधन, प्रभारी शिक्षा प्रकोष्ठ: मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज, राजस्थान.जोधपुर।
शिक्षा व्यक्ति के सर्वांगीण विकास का श्रेष्ठतम संसाधन है। जब बात सशक्त समाज की अवधारणा की होती है, तब यह आवश्यक है कि समाज का सशक्त प्रतिनिधित्व लोकतंत्र के चारों महत्वपूर्ण स्तंभ में अवश्य हो। यथा विधायिका: सदस्य राज्यसभा, लोकसभा, विधानसभा। कार्यपालिका:- आईएएस, आईपीएस केंद्र एवं राज्य की प्रशासनिक सेवा। न्यायपालिका:- जिला, उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय में जज। प्रेस: प्रमुख मीडिया हाउस, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सार्थक प्रतिनिधित्व आवश्यक है।
भारत का स्वर्णकार समाज अपनी मेहनत, कौशल, सत्यनिष्ठा, विश्वास के लिए सदियों से जाना जाता रहा है। आभूषण निर्माण, व्यापार, कला, उद्योग, शिक्षा, चिकित्सा अभियांत्रिकी,बैंकिंग, सामान्य प्रशासन तथा अन्य अनेक क्षेत्रों में समाज ने धीमी गति से निरंतर प्रगति की हैं। इसके उपरांत भी राजनैतिक प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में स्वर्णकार समाज की उपस्थिति अपेक्षाकृत बहुत कम दिखाई देती है। यह स्थिति केवल संयोग नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई सामाजिक, राजनैतिक और संगठनात्मक कारण हैं, जिन पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है।
राजनैतिक प्रतिनिधित्व क्यों आवश्यक है?
समाज का विकास केवल आर्थिक समृद्धि से नहीं होता है। समाज की समस्याओं, आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को नीति, नियम निर्धारित करने वाली संस्थाओं तक पहुँचाने के लिए राजनैतिक प्रतिनिधित्व अत्यंत आवश्यक है। सदस्य राज्यसभा, लोकसभा, विधानसभा, विभिन्न आयोग में अध्यक्ष, कुलपति,नगर निकाय, पंचायत, सहकारी संस्थाएँ, व्यापार मंडल और विभिन्न सरकारी समितियों में प्रतिनिधित्व होने से समाज की आवाज़ प्रभावी रूप से शासन तक पहुँचती है।
यदि कोई समाज केवल मतदाता बनकर रह जाए और निर्णय लेने वाली संस्थाओं में उसकी भागीदारी न हो, तो उसकी अनेक समस्याएँ अनसुनी रह जाती हैं।
स्वर्णकार समाज के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ
1. जनसंख्या का बिखराव
स्वर्णकार समाज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उसकी जनसंख्या किसी एक क्षेत्र में केंद्रित नहीं है। लगभग प्रत्येक गाँव, कस्बे और शहर में समाज के कुछ परिवार रहते हैं, परंतु कहीं भी इतनी संख्या में नहीं कि वे किसी निर्वाचन क्षेत्र का निर्णायक वोट बैंक बन सकें, कुछ स्थानों पर इतनी अवश्य है कि संगठित होकर निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं।
यही कारण है कि राजनैतिक दल उम्मीदवार चयन के समय समाज को प्राथमिकता नहीं देते।
2.एक पक्षीय राजनैतिक झुकाव
मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज लंबे समय से एक राजनैतिक दल के साथ जुड़ा हुआ माना जाता है, जो कि समाज के सर्वांगीण विकास में बड़ा अवरोध उत्पन्न करता है, इससे दो प्रकार की समस्या उत्पन्न होती हैं- जिस दल का समाज समर्थन करता है, वह दल उसे “निश्चित मतदाता” मानकर विशेष ध्यान नहीं देता। अन्य दल समाज को अपने प्रभाव क्षेत्र से बाहर समझकर उसे महत्व नहीं देते। इस प्रकार समाज सभी राजनैतिक दलों से उपेक्षित रह जाता है।
3.सामाजिक और व्यावसायिक व्यस्तता
पारंपरिक रूप से स्वर्णकार समाज स्वर्ण कला आभूषण व्यापार, उद्योग और स्वरोजगार से जुड़ा रहा है, वर्तमान समय में बड़े औद्योगिक घराने विभिन्न अन्य समाज का आभूषण व्यवसाय में आगमन, अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, सोने चांदी का आसमान छूता मूल्य. इत्यादि विभिन्न चुनौतियों के कारण स्व व्यवसाय करना दिनों दिन कठिन होता जा रहा है,ऐसी स्थिति में जीवन यापन भी एक चुनौती है तदर्थ समाज का एक बड़ा वर्ग राजनीति को प्राथमिकता नहीं देता।
4. संगठित राजनैतिक कार्य योजना का अभाव
मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज में गांव,तहसील,जिला,राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अनेक सामाजिक और धार्मिक संगठन सक्रिय हैं, लेकिन राजनैतिक सशक्तिकरण को लेकर कोई दीर्घकालिक और संगठित रणनीति प्रायः दिखाई नहीं देती साथ ही कई महत्वपूर्ण विषय पर सामंजस्य का भी अभाव नजर आता है परिणामस्वरूप समाज की सामूहिक शक्ति, राजनैतिक शक्ति में परिवर्तित नहीं हो पाती।
5. युवा नेतृत्व का अभाव
यह निश्चित हे कि गत दो दशक से समाज के अनेक प्रतिभाशाली युवा शिक्षा, व्यवसाय, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और अन्य पेशों में आगे बढ़े हैं, आर्थिक दृष्टि से भी समाज सशक्त हुआ है, युवा वर्ग में नेतृत्व करने की इच्छा शक्ति जागृत करना समाज के वरिष्ठ जनों का कार्य है आज का युवा संभावनाओं से परिपूर्ण है क्षमता है योग्यता है मार्गदर्शन चाहिए। जिससे समाज स्वयं को राजनैतिक और सार्वजनिक जीवन में प्रतिस्थापित एवं प्रतिष्ठित कर नेतृत्व की मुख्य धारा में आ सके।
समाधान और आगे की दिशा
1. राजनैतिक जागरूकता अभियान
समाज में यह भावना विकसित करनी होगी कि राजनीति केवल चुनाव लड़ने का माध्यम नहीं, वरन समाज निर्माण का सशक्त संसाधन है।सामाजिक सम्मेलनों, युवा अधिवेशनों और प्रतिभा सम्मान समारोहों में राजनैतिक सहभागिता के विषय को प्रमुखता से उठाया जाना चाहिए। युवाओं को सार्वजनिक जीवन के लिए प्रेरित करना। समाज के युवाओं को निम्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाए—छात्र राजनीति, पंचायत एवं नगर निकाय चुनाव, राजनैतिक दलों के संगठनात्मक पद,सामाजिक आंदोलन एवं जनसेवा इत्यादि।
2. पत्रकारिता और मीडिया में प्रवेश
आज मीडिया जनमत निर्माण का सबसे प्रभावशाली माध्यम है। समाज के युवाओं को पत्रकारिता, डिजिटल मीडिया, जनसंपर्क और संचार के क्षेत्र में आगे बढ़ाना चाहिए। जब समाज की अपनी सशक्त आवाज़ होगी, तब उसकी उपलब्धियाँ और समस्याएँ दोनों का उचित प्रचार प्रसार होगा साथ ही समस्याओं के हल में समाज की स्पष्ट भागीदारी भी होगी।
3.विधि एवं न्याय क्षेत्र में सहभागिता
समाज को अधिकाधिक युवाओं को वकालत, न्यायिक सेवाओं और विधि शिक्षा की ओर प्रेरित करना चाहिए। अधिक अधिवक्ता, विधि विशेषज्ञ और न्यायिक अधिकारी समाज की वैचारिक तथा सामाजिक शक्ति को बढ़ाते हैं।
4.राजनैतिक दलों से संवाद
समाज को किसी एक दल तक सीमित रहने के बजाय सभी राष्ट्रीय / क्षेत्रीय दलों से संवाद स्थापित करना चाहिए। समर्थन समाज को प्रतिनिधित्व, विचारधारा और नीतियों के आधार पर हो सकता है, किंतु समाज का संवाद सभी राजनैतिक दलों से होना चाहिए ताकि उसकी उपस्थिति हर मंच पर बनी रहे।
5 डेटा और संगठन शक्ति विकसित करना
समाज को अपनी जनसंख्या, शिक्षित युवाओं, अधिकारियों, उद्यमियों और जनप्रतिनिधियों का व्यवस्थित डाटाबेस तैयार करना चाहिए।
संगठित जानकारी किसी भी समाज की शक्ति को कई गुना बढ़ा देती है।
6.आर्थिक शक्ति को सामाजिक शक्ति में बदलना
स्वर्णकार समाज आर्थिक रूप से सक्षम समाजों में गिना जाता है। आवश्यकता इस बात की है कि इस आर्थिक शक्ति का उपयोग शिक्षा, नेतृत्व विकास, छात्रवृत्ति, थिंक टैंक और जनसेवा संस्थानों के निर्माण में किया जाए।
निष्कर्ष : राजनैतिक प्रतिनिधित्व सम्मान, सुरक्षा, अधिकारों और भावी पीढ़ी के विकास का आधार
राजनैतिक प्रतिनिधित्व किसी समाज के लिए केवल पद प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि उसके सम्मान, सुरक्षा, अधिकारों और भावी पीढ़ियों के विकास का आधार होता है।
“जिस समाज की आवाज़ सत्ता के गलियारों तक पहुँचती है, वही समाज अपने भविष्य को स्वयं आकार देता है। इसलिए आर्थिक समृद्धि के साथ राजनैतिक जागरूकता और प्रतिनिधित्व भी समाज के सर्वांगीण विकास का अनिवार्य आधार है।” राजनैतिक नेतृत्व अचानक नहीं बनता इसके लिए दृढ़ इच्छा शक्ति, संगठित समाज, सामूहिक योजनाएं एवं प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है।






