स्कूलों में न शिक्षक, न बिजली, न शौचालय; शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
विशेष रिपोर्ट | सरकारी शिक्षा की जमीनी हकीकत पर पड़ताल
दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली
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“पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया”—यह नारा वर्षों से देश में शिक्षा के महत्व को रेखांकित करता रहा है। लेकिन जब सरकारी स्कूलों के बंद होने, शिक्षकों की कमी, बिजली और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव की खबरें सामने आती हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या देश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था वास्तव में उस दिशा में बढ़ रही है, जिसका सपना देखा गया था?
हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर दावे किए गए हैं। वीडियो में कहा गया कि पिछले दस वर्षों में देशभर में लगभग 90 हजार सरकारी स्कूल बंद हुए, हजारों स्कूलों में आज भी बिजली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं तथा बड़ी संख्या में स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। इन दावों ने शिक्षा व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।
90 हजार सरकारी स्कूल बंद होने का दावा
वीडियो के अनुसार पिछले एक दशक में देशभर में करीब 90 हजार सरकारी स्कूल बंद हुए। दावा किया गया कि मध्य प्रदेश में लगभग 3 हजार और उत्तर प्रदेश में करीब 25 हजार सरकारी स्कूल या तो बंद हुए या उनका दूसरे स्कूलों में विलय किया गया।
यदि किसी क्षेत्र में स्कूलों का विलय या बंद होना छात्रों की शिक्षा तक पहुंच को प्रभावित करता है, तो इसका सबसे अधिक असर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ सकता है, जहां निजी विद्यालयों तक पहुंच सीमित होती है।
बेटियों की शिक्षा पर सबसे बड़ा सवाल
वीडियो में यह भी दावा किया गया कि 98,592 सरकारी स्कूलों में कार्यशील बालिका शौचालय नहीं हैं। यदि किसी विद्यालय में छात्राओं के लिए सुरक्षित और उपयोगी शौचालय उपलब्ध नहीं है, तो इसका सीधा असर उनकी नियमित उपस्थिति और पढ़ाई पर पड़ सकता है। शिक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से मानते रहे हैं कि स्वच्छ शौचालय, विशेषकर किशोरियों की शिक्षा के लिए, अत्यंत आवश्यक बुनियादी सुविधा है।
1.19 लाख स्कूलों में बिजली नहीं
दावे के अनुसार देश के 1,19,000 सरकारी स्कूलों में कार्यशील बिजली की सुविधा नहीं है। आज जब शिक्षा डिजिटल माध्यमों की ओर बढ़ रही है, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब और ऑनलाइन शिक्षण पर जोर दिया जा रहा है, तब बिजली का अभाव शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
गर्मी के मौसम में बिना पंखों के कक्षाओं में पढ़ाई करना भी विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों के लिए कठिन चुनौती बन जाता है।
एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हजारों स्कूल
वीडियो में कहा गया कि 1,04,125 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां केवल एक शिक्षक कार्यरत है। एक शिक्षक को पढ़ाने के साथ-साथ उपस्थिति दर्ज करना, प्रशासनिक कार्य, मिड-डे मील की निगरानी और अन्य जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित होना स्वाभाविक माना जाता है।
ग्रामीण भारत सबसे अधिक प्रभावित
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा संसाधनों की कमी का सबसे अधिक प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ता है। कई गांवों में स्कूल दूर होने या सुविधाओं के अभाव के कारण बच्चों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है।
विशेषकर गरीब परिवारों के बच्चों के लिए सरकारी विद्यालय ही शिक्षा का प्रमुख माध्यम होते हैं। ऐसे में यदि इन विद्यालयों की स्थिति कमजोर होती है तो इसका असर सीधे सामाजिक और आर्थिक विकास पर पड़ता है।
नेताओं के बच्चों की पढ़ाई पर उठे सवाल
वीडियो में कई प्रमुख नेताओं के बच्चों की विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई का उल्लेख करते हुए यह सवाल उठाया गया कि जब जनप्रतिनिधियों के परिवार बेहतर शिक्षण संस्थानों तक पहुंच रखते हैं, तो आम नागरिकों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण सरकारी शिक्षा क्यों नहीं मिल पाती। यह एक राजनीतिक टिप्पणी है, लेकिन इससे शिक्षा में समान अवसर और सार्वजनिक शिक्षा की गुणवत्ता पर बहस जरूर तेज हुई है।
सरकारी शिक्षा बनाम निजी स्कूल
पिछले कुछ वर्षों में निजी विद्यालयों की संख्या और उनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ी है। दूसरी ओर, कई राज्यों में सरकारी स्कूलों में नामांकन कम होने, संसाधनों की कमी और विद्यालयों के विलय जैसी प्रक्रियाओं ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी विद्यालय मजबूत होंगे तो समाज के हर वर्ग को समान अवसर मिल सकेगा।
शिक्षा केवल इमारत नहीं, भविष्य का निवेश है
किसी भी देश की सबसे बड़ी पूंजी उसकी युवा आबादी होती है। यदि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रशिक्षित शिक्षक और आधुनिक सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तो भविष्य में देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति भी प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा पर किया गया निवेश केवल खर्च नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में निवेश है।
क्या होने चाहिए समाधान?
शिक्षा विशेषज्ञ निम्नलिखित कदमों को महत्वपूर्ण मानते हैं—
- सभी सरकारी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति।
- प्रत्येक विद्यालय में कार्यशील बिजली और पेयजल की व्यवस्था।
- छात्राओं के लिए सुरक्षित और स्वच्छ शौचालय।
- डिजिटल शिक्षा के लिए इंटरनेट और स्मार्ट क्लास की सुविधा।
- विद्यालयों के विलय या बंद करने से पहले स्थानीय परिस्थितियों का विस्तृत अध्ययन।
- ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में शिक्षा पर विशेष ध्यान।




