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Thursday, July 9, 2026, 12:02 am

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हरियाली से खुशहाली का संकल्प: महावीर इंटरनेशनल के 52वें स्थापना दिवस पर सेवा पखवाड़ा, 25 पौधों का रोपण

पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान, महिलाओं ने निभाई अग्रणी भूमिका; सेवा, संवेदना और प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश

दिलीप कुमार पुरोहित, जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

महावीर इंटरनेशनल के 52वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत जोधपुर के चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित नहर रोड पर पर्यावरण संरक्षण को समर्पित विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। सेवा पखवाड़े के दूसरे दिन आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और प्रकृति के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि यदि आज पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल संकट, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं जैसी विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 25 छायादार एवं औषधीय पौधों का सामूहिक वृक्षारोपण रहा। इस दौरान नीम, कचनार, अशोक, बादाम, चम्पा और चमेली सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए। उपस्थित सदस्यों ने केवल पौधे लगाने तक ही अपनी जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी, बल्कि उनके संरक्षण और नियमित देखभाल का भी संकल्प लिया।

पेड़ लगाना ही नहीं, उन्हें जीवित रखना भी सबसे बड़ा धर्म

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज पूरी दुनिया पर्यावरण संकट से गुजर रही है। तेजी से बढ़ता औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, वनों की अंधाधुंध कटाई और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन पृथ्वी के संतुलन को बिगाड़ रहा है। बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, जल स्रोतों का सूखना और वायु प्रदूषण इसी असंतुलन के परिणाम हैं।

उन्होंने कहा कि केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। जब तक समाज का प्रत्येक नागरिक अपने जीवन में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता नहीं देगा, तब तक इस चुनौती का समाधान संभव नहीं है। हर व्यक्ति यदि वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प ले तो देश में हरियाली का विस्तार तेजी से हो सकता है।

प्रकृति का संरक्षण ही मानवता की सबसे बड़ी सेवा

कार्यक्रम में कहा गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल प्रकृति को बचाने का अभियान नहीं बल्कि मानव अस्तित्व को सुरक्षित रखने का प्रयास है। स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और संतुलित जलवायु के बिना स्वस्थ जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसलिए वृक्षारोपण को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति में सदियों से वृक्षों को देवतुल्य माना गया है। पीपल, नीम, बरगद, तुलसी और अन्य पौधों की पूजा केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण की वैज्ञानिक सोच का प्रतीक रही है। आधुनिक जीवनशैली में इस परंपरा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।

महिलाओं ने संभाली हरित अभियान की कमान

वृक्षारोपण कार्यक्रम में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी विशेष आकर्षण रही। वंदना बक्शी, जो अंतरराष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण की निदेशक हैं, ने कहा कि महिलाएं परिवार और समाज दोनों को संस्कार देती हैं। यदि प्रत्येक महिला अपने परिवार के बच्चों को पर्यावरण संरक्षण का महत्व समझाए तो आने वाली पीढ़ी स्वतः प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनेगी।

उन्होंने कहा कि एक पौधा केवल पेड़ नहीं होता, बल्कि वह भविष्य की स्वच्छ हवा, वर्षा, जैव विविधता और जीवन का आधार होता है। इसलिए हर नागरिक को जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, सामाजिक कार्यक्रम और राष्ट्रीय पर्व जैसे अवसरों पर पौधे लगाने की परंपरा विकसित करनी चाहिए।

सेवा और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ

महावीर इंटरनेशनल जोधाबाई केंद्र की सचिव उर्मिला जैन ने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल सामाजिक सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण भी सेवा का महत्वपूर्ण आयाम है। सेवा पखवाड़े के माध्यम से समाज में यह संदेश दिया जा रहा है कि प्रकृति की रक्षा करना भी मानव सेवा का ही स्वरूप है।

उन्होंने कहा कि पेड़ हमें बिना किसी भेदभाव के ऑक्सीजन, छाया, फल, औषधियां और जीवन प्रदान करते हैं। इसलिए हमारा भी दायित्व है कि हम अधिक से अधिक पौधे लगाएं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें।

हरित जोधपुर बनाने का लिया संकल्प

महावीर इंटरनेशनल की उपाध्यक्ष माया भंसाली ने कहा कि जोधपुर जैसे मरुस्थलीय क्षेत्र में हर पौधे का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। यहां जल संरक्षण और वृक्षारोपण दोनों समान रूप से आवश्यक हैं। यदि शहर में निरंतर हरित अभियान चलाया जाए तो स्थानीय तापमान में कमी आएगी, धूल प्रदूषण कम होगा और नागरिकों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा।

उन्होंने कहा कि संस्था भविष्य में भी विभिन्न क्षेत्रों में वृक्षारोपण अभियान चलाकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करती रहेगी।

इन पौधों का हुआ रोपण

कार्यक्रम के दौरान लगाए गए पौधों में नीम, कचनार, अशोक, बादाम, चम्पा और चमेली प्रमुख रहे। विशेषज्ञों के अनुसार ये पौधे न केवल पर्यावरण को शुद्ध करते हैं बल्कि छाया, सौंदर्य और जैव विविधता को भी बढ़ाते हैं। विशेष रूप से नीम अपने औषधीय गुणों तथा वायु शुद्धिकरण के लिए अत्यंत उपयोगी माना जाता है।

देखभाल की जिम्मेदारी भी तय

कार्यक्रम में यह भी सुनिश्चित किया गया कि लगाए गए पौधे केवल औपचारिकता बनकर न रह जाएं। पौधों की नियमित सिंचाई, सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी चेतन और निधि ने स्वयं स्वीकार की। संस्था के सदस्यों ने कहा कि वृक्षारोपण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब प्रत्येक पौधा विकसित होकर बड़ा वृक्ष बने।

सामूहिक प्रयास से मिलेगा समाधान

कार्यक्रम में उपस्थित सदस्यों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक संस्था या सरकार का विषय नहीं बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। यदि प्रत्येक विद्यालय, सामाजिक संगठन, उद्योग, व्यापारी और नागरिक नियमित रूप से वृक्षारोपण करें तथा प्लास्टिक के उपयोग को कम करें तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव है।

इनका रहा सहयोग

इस अवसर पर चंद्रा मेहता, आरती, निधि और चेतना सहित अनेक सदस्यों ने वृक्षारोपण में सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी ने पौधों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति निरंतर जनजागरण चलाने का संकल्प लिया।

पर्यावरण पर प्रेरक वक्तव्य
  • “आज लगाया गया एक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन का सबसे बड़ा उपहार है।”
  • “धरती हमें विरासत में नहीं मिली है, बल्कि यह हमारे बच्चों की अमानत है, जिसे सुरक्षित लौटाना हमारी जिम्मेदारी है।”
  • “जब तक पेड़ सुरक्षित रहेंगे, तब तक मानव सभ्यता सुरक्षित रहेगी।”
  • “वृक्ष केवल ऑक्सीजन ही नहीं देते, वे जीवन, संस्कृति और भविष्य की रक्षा भी करते हैं।”
  • “हर नागरिक यदि एक पौधे को अपना परिवार मानकर उसकी देखभाल करे तो पर्यावरण संकट काफी हद तक कम किया जा सकता है।”
  • “प्रकृति के साथ संतुलन ही विकास का वास्तविक मार्ग है। विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।”
सेवा पखवाड़ा देगा सामाजिक जागरूकता का संदेश

महावीर इंटरनेशनल के 52वें स्थापना दिवस पर आयोजित सेवा पखवाड़ा केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को सेवा, संवेदना, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश देने वाला अभियान बनता दिखाई दे रहा है। वृक्षारोपण जैसे रचनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से संस्था ने यह संदेश दिया कि यदि समाज संगठित होकर प्रकृति के संरक्षण का संकल्प ले तो पर्यावरण संकट से काफी हद तक मुकाबला किया जा सकता है।

कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि लगाए गए सभी पौधों की नियमित देखभाल की जाएगी तथा भविष्य में भी अधिकाधिक वृक्षारोपण और पर्यावरण जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित कर जोधपुर को अधिक हरित, स्वच्छ और स्वस्थ बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor