जागरूकता बढ़ेगी तो हजारों परिवारों की बुझेगी नहीं उम्मीद की लौ
दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली
“मृत्यु जीवन का अंतिम सत्य है, लेकिन यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके अंग किसी अन्य व्यक्ति के शरीर में धड़कते रहें, उसकी आंखों से कोई दुनिया देख सके और उसकी किडनी, लीवर या हृदय किसी दूसरे को नया जीवन दे सके, तो इससे बड़ा मानव धर्म और कोई नहीं हो सकता।”
भारत में हर वर्ष लाखों लोग ऐसे हैं जो किडनी, लीवर, हृदय, फेफड़े या अन्य अंगों के गंभीर रोगों से जूझते हैं। इनमें से हजारों मरीज केवल इसलिए समय से पहले मृत्यु का शिकार हो जाते हैं क्योंकि उन्हें समय पर उपयुक्त अंग उपलब्ध नहीं हो पाता। दूसरी ओर अनेक ऐसे लोग भी होते हैं जिनकी ब्रेन डेथ हो जाती है, लेकिन जागरूकता के अभाव में उनके अंग दान नहीं किए जाते। यदि समाज में अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हो जाए तो हजारों लोगों को नया जीवन मिल सकता है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि अंगदान को केवल चिकित्सा का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय संवेदना के रूप में देखा जाए।
अंगदान क्या है?
अंगदान (Organ Donation) वह प्रक्रिया है जिसमें कोई व्यक्ति अपने जीवनकाल में या मृत्यु के बाद अपने शरीर के उपयोगी अंग अथवा ऊतकों को जरूरतमंद रोगी के उपचार के लिए दान करता है। जीवित व्यक्ति भी कुछ अंग दान कर सकता है, जबकि मृत्यु के बाद कई महत्वपूर्ण अंग एवं ऊतक दान किए जा सकते हैं। अंगदान चिकित्सा विज्ञान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है क्योंकि इसके माध्यम से असाध्य रोगों से जूझ रहे मरीजों को नया जीवन मिलता है।
कौन-कौन से अंग दान किए जा सकते हैं?
मृत्यु के बाद निम्न प्रमुख अंग दान किए जा सकते हैं—
- हृदय (Heart)
- दोनों किडनी
- लीवर
- दोनों फेफड़े
- अग्न्याशय (Pancreas)
- छोटी आंत
इसी प्रकार कई ऊतक भी दान किए जा सकते हैं—
- आंखों का कॉर्निया
- त्वचा
- हड्डियां
- हृदय के वाल्व
- टेंडन
- रक्त वाहिकाएं
जीवित व्यक्ति क्या दान कर सकता है?
जीवित व्यक्ति भी चिकित्सा मानकों के अनुसार निम्न दान कर सकता है—
- एक किडनी
- लीवर का एक भाग
- बोन मैरो
- रक्त
- प्लेटलेट्स
इन दानों के बाद भी अधिकांश लोग सामान्य जीवन जीते हैं।
भारत में अंगदान की स्थिति
भारत की जनसंख्या विश्व में सबसे अधिक देशों में शामिल है, लेकिन अंगदान की दर अभी भी विकसित देशों की तुलना में बहुत कम है।
विशेषज्ञों के अनुसार—
- लाखों मरीज प्रतिवर्ष अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा करते हैं।
- किडनी प्रत्यारोपण की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।
- बड़ी संख्या में मरीज अंग नहीं मिलने के कारण उपचार से वंचित रह जाते हैं।
- यदि प्रत्येक अस्पताल में ब्रेन डेथ के मामलों में अंगदान को बढ़ावा मिले तो स्थिति में बड़ा परिवर्तन आ सकता है।
एक व्यक्ति बचा सकता है कई लोगों का जीवन
एक मृत अंगदाता से—
- 8 तक लोगों को जीवन मिल सकता है।
- 50 से अधिक लोगों को विभिन्न ऊतकों के माध्यम से लाभ मिल सकता है।
यही कारण है कि अंगदान को “जीवनदान” कहा जाता है।
ब्रेन डेथ क्या होती है?
अधिकांश लोगों में सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि ब्रेन डेथ और कोमा एक ही बात है।
वास्तव में ऐसा नहीं है।
ब्रेन डेथ का अर्थ है—
- मस्तिष्क पूरी तरह और स्थायी रूप से काम करना बंद कर देता है।
- मरीज कभी वापस सामान्य जीवन में नहीं लौट सकता।
- मशीनों की सहायता से कुछ समय तक हृदय धड़कता हुआ दिखाई दे सकता है।
ब्रेन डेथ की पुष्टि विशेषज्ञ डॉक्टर निर्धारित चिकित्सा प्रक्रिया के अनुसार करते हैं।
इसी स्थिति में अंग सुरक्षित रूप से प्रत्यारोपण के लिए उपयोग किए जा सकते हैं।
भ्रम और सच्चाई
भ्रम 1
यदि मैंने अंगदान की सहमति दे दी तो डॉक्टर मुझे बचाने का प्रयास नहीं करेंगे।
सच्चाई
यह पूरी तरह गलत धारणा है।
डॉक्टर का पहला कर्तव्य मरीज का जीवन बचाना होता है। अंगदान की प्रक्रिया केवल तभी शुरू होती है जब चिकित्सा मानकों के अनुसार मृत्यु अथवा ब्रेन डेथ की पुष्टि हो जाती है।
भ्रम 2
अंगदान से शरीर विकृत हो जाता है।
सच्चाई
अंग निकालने की प्रक्रिया अत्यंत सम्मानपूर्वक एवं सर्जिकल तकनीक से की जाती है।
अंतिम संस्कार पूरी गरिमा के साथ किया जा सकता है।
भ्रम 3
उम्र अधिक होने पर अंगदान नहीं किया जा सकता।
सच्चाई
आयु से अधिक महत्वपूर्ण अंगों की कार्यक्षमता होती है।
अंतिम निर्णय चिकित्सक करते हैं।
भ्रम 4
धर्म अंगदान की अनुमति नहीं देता।
सच्चाई
विश्व के अधिकांश प्रमुख धर्म मानव सेवा और जीवन बचाने को सर्वोच्च मानते हैं।
कई धार्मिक विद्वान अंगदान को महान परोपकार मानते हैं।
भ्रम 5
सिर्फ अमीर लोगों को अंग मिलते हैं।
सच्चाई
भारत में अंगों का आवंटन निर्धारित चिकित्सा नियमों, प्रतीक्षा सूची तथा चिकित्सकीय आवश्यकता के आधार पर किया जाता है।
अंगदान की प्रक्रिया कैसे होती है?
यदि कोई व्यक्ति अंगदान करना चाहता है तो—
- अंगदान का संकल्प लिया जा सकता है।
- परिवार को इसकी जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है।
- आवश्यकता पड़ने पर अधिकृत अस्पताल अथवा संबंधित संस्था से संपर्क किया जाता है।
- ब्रेन डेथ की पुष्टि होने पर परिवार की सहमति के साथ प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
- विशेषज्ञ टीम अंग सुरक्षित तरीके से निकालती है।
- प्रतीक्षा सूची में शामिल उपयुक्त मरीज को प्रत्यारोपण किया जाता है।
प्रेरक तथ्य
अंगदान क्यों करें?
- किसी को नया जीवन मिलेगा।
- कई परिवारों की खुशियां लौट सकती हैं।
- मृत्यु के बाद भी आपका अस्तित्व समाज में जीवित रहेगा।
- इससे बड़ा कोई मानवीय दान नहीं माना जाता।
परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण
भारत में कई बार व्यक्ति अंगदान की इच्छा रखता है लेकिन परिवार को इसकी जानकारी नहीं होती।
ऐसी स्थिति में अंगदान नहीं हो पाता।
इसलिए—
- परिवार से खुलकर चर्चा करें।
- अपनी इच्छा लिखित रूप में रखें।
- परिजनों को बताएं कि मृत्यु के बाद आपके अंग जरूरतमंदों को दान किए जाएं।
आंखों का दान सबसे सरल
कॉर्निया दान के माध्यम से दृष्टिहीन व्यक्ति को रोशनी मिल सकती है।
आंखों का दान मृत्यु के कुछ घंटों के भीतर किया जा सकता है।
यह प्रक्रिया अत्यंत सम्मानपूर्वक की जाती है।
क्या आप जानते हैं?
- एक स्वस्थ लीवर का एक भाग भी किसी मरीज का जीवन बचा सकता है।
- एक व्यक्ति केवल एक किडनी के साथ भी सामान्य जीवन जी सकता है।
- त्वचा दान से गंभीर रूप से झुलसे मरीजों का उपचार संभव होता है।
- हृदय के वाल्व छोटे बच्चों तक का जीवन बचा सकते हैं।
समाज की जिम्मेदारी
अंगदान केवल सरकार या अस्पतालों की जिम्मेदारी नहीं है।
विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, मीडिया और स्वयंसेवी संस्थाओं को भी जनजागरूकता अभियान चलाने चाहिए।
यदि प्रत्येक परिवार अंगदान पर खुलकर चर्चा करे तो हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है।
मीडिया की भूमिका
समाचार माध्यमों की जिम्मेदारी है कि वे अंगदान से जुड़े मिथकों को दूर करें और सफल प्रत्यारोपण की प्रेरक कहानियों को समाज तक पहुंचाएं। जब लोग जानेंगे कि किसी एक परिवार के निर्णय ने आठ लोगों को नया जीवन दिया, तब समाज में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः आएगा।
मृत्यु के बाद भी जीवित रहने का सबसे सुंदर मार्ग
मानव जीवन की सबसे बड़ी पहचान केवल लंबी आयु नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में छोड़ी गई अमिट छाप होती है। अंगदान ऐसा पुण्य कार्य है जिसमें मृत्यु के बाद भी व्यक्ति का हृदय किसी दूसरे के शरीर में धड़कता है, उसकी आंखों से कोई नई दुनिया देखता है और उसके अंग किसी परिवार की बुझती उम्मीद को फिर से जीवित कर देते हैं। आइए, हम सभी अंगदान के प्रति जागरूक बनें, अपने परिवार से इस विषय पर चर्चा करें और समाज में यह संदेश फैलाएं कि “अंगदान महादान” केवल एक नारा नहीं, बल्कि अनेक लोगों के लिए जीवन की नई शुरुआत है। जब हम इस दुनिया से जाएं, तो अपने साथ सब कुछ लेकर न जाएं—कुछ जीवन दूसरों के लिए छोड़ जाएं।


