सांवरिया सेठ ने भरा नानीबाई का मायरा, भक्त नरसिंह मेहता की रखी लाज, भक्ति और समर्पण की कथा सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, संतों का मिला पावन सान्निध्य
सुनील वर्मा. जोधपुर
श्री अग्रसेन फ्रेंड्स क्लब संस्थान जोधपुर द्वारा गांधी मैदान सरदारपुरा में आयोजित तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन “नानीबाई रो मायरो” का आज तीसरे एवं अंतिम दिन भक्ति, श्रद्धा और भावपूर्ण वातावरण में समापन हुआ। परम पूज्य गोवत्स राधाकृष्ण जी महाराज के भक्ति-रस से परिपूर्ण मुखारविंद से कथा के अंतिम दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अपने परम भक्त नरसिंह मेहता की लाज रखते हुए नानीबाई का मायरा भरने के अत्यंत मार्मिक प्रसंग का वर्णन किया गया।
कार्यक्रम संयोजक दीपक मंगल ने बताया कि आज की कथा में यह भाव प्रमुख रूप से सामने आया कि जब भक्त का अपने आराध्य के प्रति समर्पण पूर्ण होता है, उसकी भावना निष्कपट एवं श्रेष्ठ होती है तथा उसका विश्वास अटूट होता है, तब भगवान स्वयं उसके जीवन के प्रत्येक कार्य को पूर्ण करने के लिए उपस्थित हो जाते हैं। भक्त नरसिंह मेहता के पास सांसारिक साधन भले ही नहीं थे, लेकिन उनके पास भगवान श्रीकृष्ण के प्रति असीम श्रद्धा और विश्वास था। इसी विश्वास की लाज रखने के लिए भगवान श्रीकृष्ण सांवरिया सेठ के रूप में स्वयं पधारे और नानीबाई का मायरा भरकर अपने भक्त की प्रतिष्ठा एवं मान की रक्षा की।
महाराज श्री ने कथा के माध्यम से संदेश दिया कि भगवान को धन, वैभव अथवा बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि भक्त का निर्मल हृदय, सच्ची भावना और पूर्ण समर्पण प्रिय है। भक्त जब अपने जीवन की डोर प्रभु के हाथों में सौंप देता है, तब भगवान भी उसके योगक्षेम का भार स्वयं वहन करते हैं। इस भावपूर्ण प्रसंग के वर्णन के दौरान पूरा कथा पंडाल भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और भगवान श्रीकृष्ण एवं भक्त नरसिंह मेहता के जयकारों से गांधी मैदान गूंज उठा।
कार्यक्रम सह-संयोजक मृदुल गोयल ने बताया कि तीनों दिनों में जोधपुर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में माताएं, बहनें, अग्रबंधु एवं श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे। आयोजन का उद्देश्य नानीबाई के मायरे के माध्यम से समाज में भक्ति, प्रेम, समर्पण, पारिवारिक संस्कार और भगवान के प्रति अटूट विश्वास के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना रहा।
मोहरें भेंट कर जीवंत किया मायरे का प्रसंग
कथा के समापन अवसर पर एक विशेष एवं भावपूर्ण परंपरा का निर्वहन भी किया गया। जिस प्रकार ठाकुर जी ने नानीबाई का मायरा भरते हुए मोहरों से मायरा भरा था, उसी भाव को साकार करते हुए श्री अग्रसेन फ्रेंड्स क्लब संस्थान द्वारा मायरे में पधारे सभी श्रद्धालुओं को प्रतीक स्वरूप मोहरें भेंट की गईं। मोहरें प्राप्त कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। इस अनूठी पहल ने नानीबाई के मायरे के प्रसंग को प्रत्यक्ष रूप से जीवंत करते हुए आयोजन के समापन को और भी यादगार बना दिया।
पूज्य संतों का मिला पावन सान्निध्य
नीरज गोयल ने बताया कि कथा के समापन अवसर पर आयोजन को पूज्य संतों का भी पावन सान्निध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। इस अवसर पर संत श्री अजनेश्वर आश्रम के परम पूज्य 108 शांतेश्वर जी महाराज एवं परम पूज्य 108 परमहंस डॉ. रामप्रसाद जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति रही। पूज्य संतों के सान्निध्य से कथा स्थल का आध्यात्मिक एवं भक्तिमय वातावरण और अधिक दिव्य हो उठा।
तीसरे एवं समापन दिवस पर रमेश अग्रवाल, डॉक्टर राम गोयल डॉक्टर बिना गोयल संजय मंगल श्री अग्रसेन फ्रेंड्स क्लब के मनदीप गर्ग चमन अग्रवाल सुनील गुप्ता, बाबूलाल अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, मनीष जालानी, अक्षय मोदी, विनिल सिंघल, निर्मल अग्रवाल, नरेंद्र गर्ग एवं अभिषेक बंसल सहित अनेक गणमान्य समाजबंधु उपस्थित रहे।
इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद जोधपुर प्रांत के प्रांत मंत्री परमेश्वर जोशी एवं प्रांत संगठन मंत्री राजेश पटेल की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। इसके साथ ही विभिन्न अग्रवाल समाज संस्थाओं, बासनी समाज, प्रतापनगर समाज, श्री अग्रसेन संस्थान एवं अग्रवाल पंचायत के पदाधिकारी एवं समाजबंधु भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
तीन दिवसीय आयोजन के समापन पर आयोजकों ने कथा में पधारे सभी संतजनों, अतिथियों, सहयोगकर्ताओं, कार्यकर्ताओं, माताओं-बहनों, समाजबंधुओं एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
ठाकुर जी एवं भक्त नरसिंह मेहता के जयकारों और भक्तिमय वातावरण के बीच तीन दिनों तक चली भक्ति, प्रेम और समर्पण की अनुपम कथा “नानीबाई रो मायरो” का भावपूर्ण समापन हुआ।
