पुलिस, बीएसएफ और एयरफोर्स के जवानों-अधिकारियों को बांधी राखी, दादा-दादी और नाना-नानी ने भी उत्साह से निभाई पर्व की परंपरा
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
रक्षाबंधन का पर्व केवल भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का त्योहार नहीं, बल्कि सुरक्षा, जिम्मेदारी और समर्पण के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए अनुबंध वृद्धजन कुटीर में रक्षाबंधन का पर्व हर्षोल्लास, आत्मीयता और देशभक्ति के भाव के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों व जवानों, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अधिकारियों व जवानों तथा एयरफोर्स के अधिकारियों व जवानों को रक्षा सूत्र बांधकर उनके प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर अनुबंध की संचालिका अनुराधा अडवानी ने जवानों की कलाई पर राखी बांधी और देश की सुरक्षा के लिए उनके समर्पण की सराहना की।
कार्यक्रम में अनुबंध वृद्धजन कुटीर के दादा-दादी और नाना-नानी ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। लंबे समय से परिवार और समाज की जिम्मेदारियों को निभा चुके इन बुजुर्गों के बीच जब देश की रक्षा में जुटे जवान पहुंचे तो वातावरण भावनात्मक हो उठा। बुजुर्गों ने जवानों को अपना आशीर्वाद दिया और देश सेवा के उनके जज्बे को सलाम किया।
रक्षा सूत्र में सम्मान और देशसेवा का भाव
रक्षाबंधन के अवसर पर अनुबंध में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पुलिस, बीएसएफ और एयरफोर्स के जवानों तथा अधिकारियों को राखी बांधना रहा। अनुबंध की संचालिका अनुराधा अडवानी ने एक-एक कर जवानों और अधिकारियों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। राखी बांधते हुए उन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और राष्ट्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सभी सुरक्षा कर्मियों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि देशवासी अपने घरों में सुरक्षित रहकर त्योहार मनाते हैं, क्योंकि हजारों जवान दिन-रात अपने कर्तव्य पर डटे रहते हैं। उनके लिए परिवार से दूर रहना और देश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आसान नहीं है। ऐसे में रक्षाबंधन का यह आयोजन उन वीर जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का छोटा सा प्रयास है।
बुजुर्गों ने जवानों को दिया आशीर्वाद
अनुबंध वृद्धजन कुटीर में रहने वाले दादा-दादी और नाना-नानी ने भी कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उम्र के इस पड़ाव पर जब बुजुर्गों ने जवानों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा तो कार्यक्रम का वातावरण आत्मीय हो गया। कई बुजुर्गों ने जवानों को अपना बेटा मानकर उनके उज्ज्वल भविष्य और सुरक्षित जीवन की कामना की।
बुजुर्गों ने कहा कि देश की रक्षा करने वाले जवान पूरे समाज के लिए परिवार के सदस्य की तरह हैं। वे सीमाओं पर और अपने कार्यस्थलों पर कठिन परिस्थितियों में रहकर देशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
रंगारंग प्रस्तुतियों से सजा कार्यक्रम
रक्षाबंधन के इस विशेष आयोजन में केवल राखी बांधने की रस्म ही नहीं हुई, बल्कि रंगारंग कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। अनुबंध के दादा-दादी और नाना-नानी ने कार्यक्रम में अपनी सहभागिता से माहौल को जीवंत बना दिया। विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से पर्व की खुशियों को साझा किया गया।
कार्यक्रम में देशभक्ति गीतों की प्रस्तुतियों ने विशेष आकर्षण पैदा किया। जैसे ही देशभक्ति गीतों की स्वर लहरियां गूंजीं, उपस्थित जवानों, अधिकारियों और बुजुर्गों में उत्साह का संचार हो गया। गीतों के माध्यम से मातृभूमि के प्रति प्रेम, त्याग, समर्पण और वीरता की भावना को अभिव्यक्ति मिली।
रक्षाबंधन बना भावनाओं का संगम
अनुबंध वृद्धजन कुटीर में आयोजित यह कार्यक्रम कई भावनाओं का संगम बन गया। एक ओर बुजुर्गों के स्नेह और आशीर्वाद की भावना थी, तो दूसरी ओर देश की सेवा में समर्पित जवानों के प्रति सम्मान था। राखी के माध्यम से जहां भाई-बहन के रिश्ते में सुरक्षा और विश्वास का संदेश दिया जाता है, वहीं इस आयोजन ने रक्षा सूत्र के व्यापक सामाजिक अर्थ को भी सामने रखा।
कार्यक्रम में यह संदेश उभरा कि देश की रक्षा केवल सीमाओं पर तैनात जवानों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। जवान अपने कर्तव्य के माध्यम से देश की रक्षा करते हैं और समाज उनके सम्मान व सहयोग के माध्यम से उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर सकता है।
जवानों के त्याग को किया नमन
पुलिस, बीएसएफ और एयरफोर्स के अधिकारियों तथा जवानों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। देश की सुरक्षा व्यवस्था में तीनों बलों की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है। पुलिस आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालती है, बीएसएफ देश की सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और एयरफोर्स आकाशीय सुरक्षा के साथ राष्ट्रीय रक्षा का मजबूत आधार है।
इन सभी के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए अनुबंध परिवार ने उनके त्याग, साहस और कर्तव्यनिष्ठा को नमन किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने माना कि देश की सुरक्षा के लिए समर्पित जवानों के कारण ही आम नागरिक अपने परिवारों के साथ सुरक्षित और शांतिपूर्ण जीवन जी पाते हैं।
भोजन प्रसादी से बढ़ी आत्मीयता
कार्यक्रम के अंत में भोजन प्रसादी की भी व्यवस्था की गई। सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से प्रसादी ग्रहण की। साथ बैठकर भोजन करने से कार्यक्रम का पारिवारिक और आत्मीय वातावरण और अधिक मजबूत हुआ।
अनुबंध वृद्धजन कुटीर में रक्षाबंधन का यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि पर्व केवल परंपराओं को निभाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज में प्रेम, सम्मान, सेवा और कृतज्ञता की भावना को मजबूत करने का अवसर भी हैं।
अनुराधा अडवानी और अनुबंध परिवार के नरेंद्र अडवानी की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम ने बुजुर्गों और सुरक्षा बलों के बीच स्नेह का एक ऐसा रिश्ता कायम किया, जिसमें राखी का धागा केवल कलाई पर नहीं, बल्कि दिलों के बीच जुड़ता नजर आया। बुजुर्गों के आशीर्वाद, जवानों के प्रति सम्मान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और देशभक्ति के वातावरण ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया। रक्षाबंधन के इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि देश की रक्षा में समर्पित हर जवान समाज के लिए सम्मान और कृतज्ञता का पात्र है और उसके प्रति व्यक्त किया गया स्नेह ही सच्चे अर्थों में राष्ट्रभक्ति की अभिव्यक्ति है।
