छोटे से धोगे से धन-धान्य होंगे रिश्ते…
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
भाई-बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास और आपसी सुरक्षा के संकल्प का पर्व रक्षाबंधन आज पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। इस बार पर्व को लेकर विशेष बात यह है कि भद्रा का साया नहीं होने के कारण बहनें पूरे दिन शुभ मुहूर्त में भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी। पर्व के लिए बाजारों में राखियों, मिठाइयों, उपहारों और पूजन सामग्री की खरीदारी को लेकर भी उत्साह दिखाई दे रहा है। घरों में सुबह से ही रक्षाबंधन की तैयारियां शुरू हो गई।
रक्षाबंधन को सामान्य तौर पर भाई की कलाई पर राखी बांधने और भाई द्वारा बहन की रक्षा का वचन देने वाले पर्व के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसकी वास्तविक भावना इससे कहीं व्यापक है। राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि विश्वास, जिम्मेदारी, भावनात्मक जुड़ाव और एक-दूसरे के साथ खड़े रहने का प्रतीक है। समय के साथ भाई-बहन के रिश्ते का स्वरूप बदलता रहा है, लेकिन राखी का भाव आज भी उतना ही मजबूत है।
सुकर्मा योग में मनाया जाएगा रक्षाबंधन
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार रक्षाबंधन के दिन सुकर्मा योग का संयोग बताया गया है। इसे शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। यही कारण है कि रक्षाबंधन के लिए अलग-अलग शुभ समय बताए गए हैं और बहनों को सुविधा के अनुसार इन मुहूर्तों में राखी बांधने का अवसर मिलेगा। दिन में कई ऐसे समय बताए गए हैं जिन्हें राखी बांधने के लिए शुभ माना गया है। इनमें सुबह का समय, अभिजीत मुहूर्त, दोपहर का शुभ चौघड़िया और शाम का समय शामिल है। इसलिए परिवारों को किसी एक समय की बाध्यता के बजाय अपनी सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त का चयन करने की सलाह दी जा सकती है।
बताए गए प्रमुख शुभ समय में सुबह 6:09 बजे से 10:53 बजे तक, दोपहर 12:04 बजे से 12:53 बजे तक अभिजीत मुहूर्त, दोपहर 12:28 बजे से 2:03 बजे तक, अपराह्न 1:44 बजे से 4:15 बजे तक तथा शाम 5:13 बजे से 6:48 बजे तक के समय शामिल हैं। स्थानीय पंचांग में कुछ मिनट का अंतर संभव है, इसलिए धार्मिक अनुष्ठान करने वाले परिवार अपने क्षेत्र के पंचांग को प्राथमिकता दे सकते हैं।
राखी में छिपी है रिश्ते की पूरी कहानी
रक्षाबंधन की थाली में रखी प्रत्येक वस्तु अपने आप में एक संदेश देती है। रोली अपनापन और मंगलभाव का प्रतीक है, अक्षत स्थायित्व और शुभकामना का संकेत देते हैं, दीपक सकारात्मकता और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है, जबकि राखी रिश्ते की सुरक्षा और संकल्प को दर्शाती है। बहन जब भाई के माथे पर तिलक लगाती है और उसकी कलाई पर राखी बांधती है, तो यह केवल धार्मिक रस्म नहीं होती। उस क्षण दोनों के बीच वर्षों की साझा स्मृतियां, बचपन की शरारतें, एक-दूसरे की मदद और परिवार से जुड़ी भावनाएं भी जीवंत हो उठती हैं।
भाई-बहन चाहे अलग-अलग शहरों में रहते हों, उनकी जिंदगी कितनी भी व्यस्त हो गई हो, रक्षाबंधन उन्हें फिर एक भावनात्मक बंधन में जोड़ देता है। यही वजह है कि आज रक्षाबंधन केवल एक दिन की रस्म नहीं, बल्कि रिश्ते को याद करने और उसे मजबूत करने का अवसर बन गया है।
रक्षा का अर्थ केवल शारीरिक सुरक्षा नहीं
रक्षाबंधन में ‘रक्षा’ शब्द को केवल शारीरिक सुरक्षा तक सीमित करना रिश्ते के व्यापक अर्थ को छोटा कर देना होगा। आज के संदर्भ में भाई-बहन के बीच रक्षा का अर्थ है—मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ देना, गलत रास्ते से रोकना, अकेलेपन में साथ खड़ा होना और जरूरत पड़ने पर भावनात्मक सहारा देना।
जीवन के अलग-अलग पड़ाव पर भाई और बहन दोनों एक-दूसरे की भूमिका निभाते हैं। बचपन में भाई बहन की मदद करता है तो कई बार बहन भी भाई के लिए मजबूत सहारा बनती है। बड़े होने के बाद पढ़ाई, नौकरी, विवाह, परिवार और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के बीच दोनों के जीवन में बदलाव आता है, लेकिन रिश्ते की आत्मीयता बनी रह सकती है। इसीलिए आधुनिक समय में राखी का संदेश यह भी है कि जब कोई अकेला हो तो उसे अकेला न छोड़ें, जब वह गलत रास्ते पर जा रहा हो तो उसे समझाएं और जब जीवन में कठिन परिस्थिति आए तो उसका हाथ थामें।
नारियल से लेकर दीपक तक हर रस्म का अपना अर्थ
रक्षाबंधन की पूजा की थाली को देखें तो उसमें नारियल, रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी जैसी वस्तुएं दिखाई देती हैं। इन सभी का सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व है। नारियल बाहर से कठोर और भीतर से कोमल होता है। इसे रिश्ते में बाहरी कठिनाइयों के बावजूद भीतर से संवेदनशील बने रहने के संदेश से जोड़ा जा सकता है। भाई-बहन का रिश्ता भी ऐसा ही है—कई बार दोनों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन भीतर का स्नेह बना रहता है। रोली और अक्षत भाई के माथे पर तिलक लगाने के साथ मंगलकामना और स्थायित्व का भाव व्यक्त करते हैं। दीपक अंधकार में प्रकाश का प्रतीक है। इसका संदेश है कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद और सकारात्मकता का प्रकाश बना रहना चाहिए।
और अंत में राखी—जो इस पूरे अनुष्ठान का केंद्र है—भाई-बहन के बीच विश्वास और संकल्प का प्रतीक बनती है। राखी का संदेश: गलत राह से रोकना भी रक्षा
आज के दौर में बच्चों और युवाओं के सामने अनेक प्रकार की चुनौतियां हैं। ऐसे में रक्षाबंधन का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। रक्षा का मतलब केवल किसी बाहरी खतरे से बचाना नहीं है, बल्कि अपने प्रियजन को गलत आदतों और गलत फैसलों से बचाना भी है। राखी बांधते समय भाई-बहन एक-दूसरे के प्रति यह भाव रख सकते हैं कि वे जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे को सही सलाह देंगे। यदि कोई परेशानी में है तो उससे बात करेंगे और समस्या को छिपाने के बजाय परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति से मदद लेने के लिए प्रेरित करेंगे। इस दृष्टि से रक्षाबंधन को भावनात्मक सुरक्षा का पर्व भी कहा जा सकता है।
बचपन की शरारतों से जीवनभर के साथ तक
भाई-बहन का रिश्ता जीवन के साथ बदलता रहता है। बचपन में साथ खेलना, छोटी-छोटी बातों पर झगड़ना और फिर कुछ देर बाद एक-दूसरे के साथ हो जाना इस रिश्ते की सहजता है। किशोरावस्था और युवावस्था में दोनों की अपनी-अपनी दुनिया बनने लगती है। नौकरी, पढ़ाई और विवाह के बाद भौगोलिक दूरी भी बढ़ सकती है। इसके बावजूद रक्षाबंधन जैसे पर्व रिश्ते को फिर से उसी भावनात्मक धरातल पर ले आते हैं। बहन जब भाई की कलाई पर राखी बांधती है तो केवल वर्तमान नहीं, बल्कि पूरा बचपन जैसे उस क्षण में लौट आता है। कई बार भाई-बहन अलग-अलग शहरों या देशों में रहने के कारण प्रत्यक्ष रूप से राखी नहीं बांध पाते। ऐसे में डाक, कूरियर और डिजिटल माध्यमों से राखी भेजने की परंपरा भी बढ़ी है। लेकिन माध्यम चाहे कोई भी हो, भावना वही रहती है—आप मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं और मैं आपके सुख-दुख में आपके साथ हूं।
दीपक देता है मुश्किल समय में अकेले न रहने का संदेश
रक्षाबंधन की थाली में दीपक का विशेष भावनात्मक अर्थ भी है। दीपक प्रकाश का प्रतीक है और यही संदेश देता है कि मुश्किल समय में व्यक्ति को अकेला नहीं रहना चाहिए। आज जब जीवन की गति तेज है और परिवार के सदस्य अलग-अलग जगहों पर रहते हैं, ऐसे में भावनात्मक संवाद की जरूरत और बढ़ गई है। भाई-बहन के बीच केवल त्योहार पर बातचीत करने के बजाय नियमित रूप से एक-दूसरे का हाल पूछना भी इस पर्व की भावना को वास्तविक जीवन में उतार सकता है। किसी भाई को बहन की जरूरत हो या बहन को भाई के समर्थन की—रिश्ते की मजबूती इसी में है कि दोनों बिना संकोच अपनी परेशानी साझा कर सकें।
21 दिन या जन्माष्टमी तक राखी धारण करने की मान्यता
राखी को 21 दिन या जन्माष्टमी तक धारण करने की मान्यता का भी उल्लेख किया गया है। इसके पीछे यह भाव माना जाता है कि राखी केवल एक दिन की रस्म नहीं बल्कि कुछ समय तक रक्षा-संकल्प की याद दिलाने वाला प्रतीक बनी रहे। हालांकि धार्मिक परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती हैं। इसलिए राखी कितने समय तक धारण करनी है, इसे परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार तय किया जा सकता है।
बाजारों में राखियों की रौनक, थाली सजी
रक्षाबंधन की बाजारों में रौनक दिखाई दे रही है। रंग-बिरंगी राखियों के साथ पारंपरिक और आधुनिक डिजाइन की राखियां लोगों को आकर्षित कर रही हैं। बच्चों के लिए कार्टून और विभिन्न आकर्षक डिजाइनों वाली राखियां भी बाजार में उपलब्ध हैं।
मिठाई की दुकानों पर भी रक्षाबंधन को लेकर तैयारी है। परिवारों ने राखी के साथ मिठाई, फल, उपहार और पूजा सामग्री खरीदने की तैयारी की है। बहनें भाई की पसंद के अनुसार उपहार तैयार कर रही हैं तो भाई भी बहनों के लिए उपहार चुन रहे हैं।
इस तरह रक्षाबंधन धार्मिक आस्था के साथ-साथ पारिवारिक मिलन और खुशियां बांटने का अवसर भी बनता है।
रिश्ता मजबूत करने का संकल्प बने रक्षाबंधन
रक्षाबंधन की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि इसमें महंगे उपहारों से ज्यादा महत्व भावना और रिश्ते का है। एक साधारण राखी भी तब विशेष बन जाती है जब उसके पीछे स्नेह, सम्मान और अपनापन हो। इस वर्ष रक्षाबंधन पर राखी बांधते समय भाई-बहन यदि चार संकल्पों को अपने जीवन में उतारें—एक-दूसरे की सुरक्षा, गलत राह से बचाना, मुश्किल समय में साथ देना और रिश्ते में संवाद बनाए रखना—तो इस पर्व का अर्थ और गहरा हो सकता है। रक्षाबंधन इसलिए केवल कलाई पर धागा बांधने का पर्व नहीं है। यह याद दिलाता है कि जीवन चाहे कितना भी बदल जाए, रिश्तों की असली ताकत एक-दूसरे के सुख-दुख में खड़े रहने में है। रोली अपनापन देती है, अक्षत रिश्ते में स्थायित्व का भाव जगाते हैं, दीपक मुश्किल समय में उम्मीद का प्रकाश देता है और राखी सुरक्षा के संकल्प को बांधती है। यही कारण है कि रक्षाबंधन की रस्म कुछ मिनटों की होकर भी उसका संदेश पूरे जीवन साथ चल सकता है। आज जब परिवारों के बीच दूरी बढ़ रही है, ऐसे में यह पर्व केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का अवसर नहीं, बल्कि रिश्तों को फिर से जोड़ने, संवाद बढ़ाने और एक-दूसरे के लिए मजबूत सहारा बनने का संकल्प लेने का दिन भी है।
