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Thursday, August 27, 2026, 6:31 am

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एनसीईआरटी : पाठ्यपुस्तकों पर कम्युनिस्ट लेखकों का प्रभाव और हिंदुत्व पर प्रहार

इन पाठ्य पुस्तकों का हिंदी भाषा, हिंदी साहित्य, भाषा विज्ञान, हिंदी व्याकरण इत्यादि से किसी प्रकार का संबंध नहीं है, कक्षा 6 से 12वीं तक की पुस्तकों में संकलित अध्यायों व लेखकों की पृष्ठभूमि पर दृष्टिपात करने की आवश्यकता है

डॉ. अमित व्यास की रिपोर्ट

एक ओर जहाँ सभी की नजर भारतीय इतिहास के विकृत स्वरूप को भारतीय दृष्टिकोण से वापस लिखने पर है वहीं कम्युनिस्टों ने दबे पांव विद्यालयी शिक्षा में चल रहे हिंदी पाठ्‌यक्रम में अपनी पैठ बना ली है। इस ओर अधिक लोगों का ध्यान नहीं गया है।
एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित कक्षा 6 से 12 वीं तक पुस्तकों में संकलित अध्यायों और उनके लेखकों की पृष्ठभूमि की ओर दृष्टिपात करने की आवश्यकता है। लेकिन उससे पहले इसके लिए 2006 से बनाई गई पाठ्य पुस्तक निर्माण समिति के सदस्यों की वास्तविकता का भी ज्ञान होना चाहिए। प्रस्तुत लेख में हम समिति सदस्यों की वैचारिक पृष्ठभूमि का विश्लेषण करने का प्रयास करेंगे।

इस पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति में अध्यक्ष है- प्रो० नामवर सिंह, जिनका परिचय दिया गया है. पूर्व अध्यक्ष, भारतीय भाषा केन्द्र नई दिल्ली। प्रो० नामवर सिंह जाने – माने कम्युनिस्ट लेखक है किन्तु एक सच्चाई यह भी हैं कि वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जैसे राजनीतिक पार्टी के सक्रिय सदस्य रहे है।

1959 में चुकिया चुन्दौली के लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार थे और चुनाव हार गए थे। उस समय वे बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय पढ़ा रहे थे , हार के कारण उन्हें विश्वविद्यालय छोड़ना पड़ा। जैसा कि सभी पाठकों को ज्ञात है कम्युनिस्ट विचारकों का आश्रय स्थल जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय है, नामवर सिंह ने भी वहां अध्यापन कार्य किया। अवकाश प्राप्ति के पश्चात वे इस विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा केंद्र में एमेरिटस प्रोफेसर बन कर आमरण पद पर बने रहे।
2006 में एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित हिंदी पाठ्यपुस्तक समिति के अध्यक्ष के रूप में पद प्राप्त किया और अपनी कम्युनिस्ट विचारधारा का प्रवेश बालमन में करना आरंभ किया जो अत्यंत घातक है।
जहां लगभग सभी राजनीतिक दलों में वंशवाद या परिवारवाद चलता है वैसे ही कम्युनिस्ट में विचारवादी व्यक्ति वंश का उत्तराधिकारी होता है।पाठ्य पुस्तक समिति में दूसरा पद मुख्य सलाहकार का है जिसे प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल सुशोभित कर रहे हैं। इनके जीवन की ओर दृष्टिपात करें तो हम पाते हैं कि इन महाशय ने प्रोफेसर नामवर सिंह के निर्देशन में पीएचडी उपाधि हासिल की और कृपा पात्र बने । कम्युनिस्टों की वैचारिक थाती को आगे बढ़ाने का कार्य किया ।इतना ही नहीं 2007 से 2013 तक वे संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य भी रहे।
उनके द्वारा गोधरा नरसंहार की पृष्ठभूमि में लिखी गई पुस्तक संस्कृति वर्चस्व और प्रतिरोध की भूमिका में कम्युनिस्ट विचारधारा स्पष्ट हो जाती है ।जो हिंदुत्व पर प्रहार करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य है।
6 जुलाई 2023 को लल्लनटॉप यू यूट्यूब चैनल पर व्यक्त उनके विचार को सुनना आवश्यक है वह मानते हैं कि भारत में जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है तब से भारत अंधकार में चला जा रहा है ।यह सुनने से स्पष्ट है कि वे कतई निष्पक्ष नहीं है ।अपनी वैचारिक कुंठा को चैनल के सामने खुलकर प्रस्तुत कर रहे हैं ।क्या इतना होने पर भी उनके द्वारा निर्देशित पाठ्य पुस्तक सामग्री भारतीय संस्कृति को सही अर्थों में आगे बढ़ाने वाली हो सकती है ?यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।
पाठ्य पुस्तक निर्माण समिति के सदस्य अजगर वजाहत भी इसी विचारधारा को पुष्पित पल्लवित करने वाले लेखक हैं। वे केवल समिति के सदस्य ही नहीं वरन एनसीईआरटी द्वारा सीबीएसई स्कूलों में चलने वाली 12वीं कक्षा की पाठ्य पुस्तक में इनकी कहानी भी संकलित है।
इस कहानी में उन्होंने आर्थिक ,सामाजिक और राजनीतिक कुंठा को परोसने का कार्य किया है ।यह कहानी युवावस्था की ओर जाने वाले विद्यार्थियों में भारतीय प्रजातंत्र के प्रति विद्रोह की भावना भरने का कार्य कर रही है ।
अभी तक हमने पाठ्य पुस्तक समिति के कुछ सदस्यों का ही लेखा जोखा प्रस्तुत किया है किंतु प्रश्न यह उठता है इस समिति के सदस्यों में एनडीटीवी इंडिया के संपादक प्रियदर्शन ,लोकमत समाचार के संपादक मधुकर उपाध्याय सहित जेएनयू के प्रोफेसर की भरमार क्यों है?
इनकी ओर यदि ध्यान नहीं दिया गया तो निश्चित मानना होगा कि 2006 से अब तक नित्य निरंतर जिन हिंदी पाठ्य पुस्तकों के माध्यम से विद्यार्थियों को कम्युनिस्ट विचारधारा को भरोसा गया है ,वह आगामी पीढ़ी को वैचारिक रूप से भ्रष्ट कर रही है। एक हिंदी शिक्षक होने के नाते यह स्पष्ट कह सकता हूं कि इन पाठ्य पुस्तकों का हिंदी भाषा, हिंदी साहित्य, भाषा विज्ञान , हिंदी व्याकरण इत्यादि से किसी प्रकार का संबंध नहीं है ।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor