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Friday, July 10, 2026, 5:50 pm

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Lifestyle

एडवोकेट अनिल भारद्वाज का बारिश पर गीत

(अनिल भारद्वाज ग्वालियर में हाईकोर्ट में एडवोकेट हैं। आप मानवादी कवि हैं। प्रकृति पर शानदार कविताएं लिखते हैं। गीतों में आपको महारथ हासिल हैं। आपके लिए शब्द ही साधना है। यहां प्रस्तुत है उनकी ताजा रचना। आपकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी। -संपादक)

बरसता पानी

कभी रह-रह के कभी जम के बरसता पानी,

कभी मन से कभी बेमन से बरसता पानी।

कभी सावन से रूठता है कभी भादो से,

कभी माहवट से रूठता है बरसता पानी।

झील में सोता है सागर में करवट लेता,

नदी में लहरा के चलता है बरसता पानी।

पहले जी भर के बरसता था ये चौमासों में,

झर लगा देता था दिन-रात बरसता पानी।

जाने कैसे ये अपनी बूंदें पिरो देता है,

उनकी जुल्फों से टपकता है बरसता पानी।

कभी जब झूम के रिमझिम के गीत गाता है,

दिलों में आग लगाता है बरसता पानी।

कभी सुख में कभी दुख में कभी विदाई में,

पलकों की काली घटाओं से बरसता पानी ।

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Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor