पूर्व जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास की सावन पर एक कविता
(पूर्व जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास प्रकृति और मौसम को अपनी कविताओं में बखूबी रेखांकित करते हैं। यहां प्रस्तुत है सावन महीने पर आधारित उनकी कविता।-संपादक) सावण सुं आस बायर चाले सावण में झिरमिर बरसे मेह, हरक जगावै हिवड़े में भीजी सगळी देह। बाँगा में हिंडा बाँधया नाचै दादुर मोर बादलिया गर्जण लागा बंधी प्रेम री डोर। … Read more