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Tuesday, August 25, 2026, 7:07 am

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Lifestyle

आज से 30 मार्च राजस्थान दिवस तक रोज पढ़िए नाचीज बीकानेरी की कविता

(नाचीज बीकानेरी वरिष्ठ कवि व शाइर है। आपकी कई रचनाएं देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है और होती रहती है। आपने कई पुस्तकें लिखी हैं और कई पुरस्कार भी आपको मिल चुके हैं। आप बीकानेर में साहित्य साधना कर रहे हैं। आप राइजिंग भास्कर के लिए आज से रोज राजस्थान दिवस 30 मार्च तक पाठकों के लिए एक कविता लिखेंगे। इसी कड़ी में पेश है पहली कविता- मीठी बोली। )

मीठी बोली

मीठे -मीठे कंठां री बोली ।
मोर-पपैयाँ री प्यारी बोली ।।

मिसरी सूं मीठी आ ‘ बोली ।
मुरधर री आ ‘राजस्थानी बोली ।।

सीधा-सादा मिनख अठै रा ।
बगत रै साथै-साथै अ चालै ।।

बोलण सूं पैलां मिसरी घोळै ।
रस घोळे आ ‘राजस्थानी बोली ।।

लोकतन्त्र री अ ‘ पैल करणिया ।
आगीवाण बण अलख जगावै ।।

इय्यै धरा रै रुं – रुं में आण बाण ।
अलबेलां री आ ‘राजस्थानी बोली ।।

इय्यै धरा नैं सगळो जग जाणै ।
आण बाण आळा मिनख जठै ।।

दोहा-सोरठा-अखाणा री बतळावण् ।
आ’ है “नाचीज़” थारी राजस्थान बोली ।।

नाचीज़ बीकानेरी
मो~ 9680868028

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor