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Friday, May 1, 2026, 3:30 am

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काव्य-कलश की काव्य गोष्ठी में बही राष्ट्र-प्रेम की अविरल धारा

 

पंकज जांगिड़. जोधपुर

साहित्याकाश में अपने पंख फैलाती संस्था “काव्य-कलश” की धमक पैदा करती नायाब गोष्ठी पावटा ‘सी’ रोड स्थित कार्यालय में संपन्न हुई। जिसमें हिंदी, उर्दू और राजस्थानी भाषा के 15 शीर्ष कलमवीरों ने तीन घंटे के अनमोल पलों को राष्ट्र-प्रेम की अविरल धारा में प्रवाहित कर अक्षुण्ण एवं अविस्मरणीय बना दिया।

गोष्ठी का ओजपूर्ण आगाज प्रदीप मिश्रा ने “घर घर तिरंगा है” से किया। डॉ. छगनराज राव ने “गीत गौरव गाथा के आज तुमको सिखलाता हूं,” डॉ. दीपा परिहार ने “अठै मां तो सागैसी खड़ीसी दिखै,” सुनाकर मां को ऑंखों के सामने जीवंत लाकर खड़ा कर दिया। दीपिका ‘रूहानी’ ने भी “मां कैसी होती है” सुनाकर सबको भाव-विह्वल कर दिया। प्रसिद्ध गजलकार खुरशीद खैराड़ी ने आग उगलती ताजा गजल “पूछकर धर्म मार दी गोली” प्रस्तुत की। नामवर गजलकार अशफाक अहमद फौजदार ने “तूफां को तो पूरी छूट करे वो कुछ भी, अदना सी हवा पर निगाहबानी बहुत है” उम्दा गजल पेश की। “गर्मी में कहां अब सड़कें सूनी लगती, आबादी दिन दूनी रात चौगुनी लगती” कविता सुनाकर ह॔सराज ‘ह॔सा’ ने असलियत भरे व्यंग्य का छमका लगा दिया डिंगल भाषा की मिठास दिलीप राव श्रीमाली ‘दलपत’ की रचना “जल तो जीवन रेख कहिजे” के कवित्त में महसूसी गई। जाने-माने शायर असरार ‘आहिल’ ने अपने कलाम “देखकर डूबता सूरज ये ख़याल आता है” सुनाकर सबकी आंखों को भिगो दिया। ऑलराउंडर फनकार एडवोकेट एन.डी. निंबावत ने मधुर गीत और खूबसूरत कव्वाली पेशकर मन मोह लिया। उभरते कवि उमेश दाधीच ने “मैं तो एक मुसाफ़िर ठहरा, तू मेरी बात ना ही कर,” महती कविता के माध्यम से अपनी संभावनाए जतला दी। ऊर्जावान रचनाधर्मी राजेश मोहता ने “पत्थरों के महल में सो सोकर लोग मुर्दा हो गए” सुनाकर श्रोताओं की चेतना को झिंझोड़ दिया। छोटी बहर की कविताओं के लिए प्रसिद्ध नवीन पंछी ने “कहा करती मां, फुर्सत मिले तब मिलने आना, आज फुर्सत है, मगर मां नहीं है” सुनाकर ऑखों को नम कर दिया। वरिष्ठ कवि श्याम गुप्ता ‘शान्त’ ने अपनी आधी सदी पुरानी व्यंग्य कविता “मैं चमचा हूं अफसर का” सुनाकर सदन में हास्य-रस ऊंड़ेल दिया।

संस्था के उजले भविष्य की संकल्पना के उद्बोधन के साथ अध्यक्ष मनोहर सिंह राठौड़ ने अपनी राजस्थानी व्यंग्य रचना “म्हारो चेहरो कठै गयो” का वाचन कर कार्यक्रम का समापन किया। उच्च प्रतिमान से लबरेज इस गरिमामय काव्य-गोष्ठी की सांझ का स॔चालन और आगंतुक रचनाकारों का धन्यवाद संस्था के उपाध्यक्ष अशफ़ाक अहमद फौजदार ने किया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor