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Friday, May 1, 2026, 3:06 pm

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वर्तमान भौतिक युग में कबीर की प्रासंगिकता है-कमल रंगा

राखी पुरोहित. बीकानेर

प्रज्ञालय संस्थान एवं राजस्थानी युवा लेखक संघ द्वारा नत्थूसर गेट बाहर स्थित लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन-सदन में आज प्रातः महान् कवि एवं समाज सुधारक कबीर की जयंती के अवसर पर एक परिसंवाद का आयोजन रखा गया। परिसंवाद का विषय ‘कबीर और उनके विचारों की वर्तमान मंे प्रासंगिकता’ रहा।
परिसंवाद के मुख्य वक्ता राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि वर्तमान समाज में कबीर के विचारों की प्रासंगिकता है, विशेषकर उनके सामाजिक न्याय, समता और मानवता के प्रति दृष्टिकोण की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। वैसे कबीर के काव्य में सामाजिक, धार्मिक एवं साम्प्रदायिक विसंगतियों एवं समस्याओं को समझा जा सकता है। ऐसे में हम यह कह सकते हैं कि वर्तमान भौतिक युग में कबीर के विचारों की प्रासंगिकता महत्वपूर्ण है।
कबीर का काव्य महत्वपूर्ण रही। साथ ही वे गंभीर दार्शनिक थे।
परिसंवाद में भाग लेते हुए वरिष्ठ शायर कासिम बीकानेरी ने कहा कि कबीर ने सूफी आंदोलन में भी योगदान दिया। साथ ही मानवता, प्रेम और समानता का मार्ग समाज को दिखाते रहे।
परिसंवाद में अपने विचार रखते हुए वरिष्ठ शिक्षाविद् राजेश रंगा ने कहा कि कबीर का दर्शन न केवल मानवीय और दैवीय प्रकृति का है, बल्कि सामाजिक और नैतिक प्रकृति का भी है। इसी क्रम में शिक्षाविद् भवानी सिंह ने उनके दर्शन पक्ष को रेखांकित करते हुए सद्भाव, समानता और भक्ति जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी बात कही।
करुणा वीर एवं शिक्षाविद् हरिनारायण आचार्य ने अपनी बात रखते हुए कहा कि कबीर पन्द्रहवीं सदी के रहस्यवादी कवि और महान् संत थे। जिनके दोहे आज भी जन-जन में लोकप्रिय हैं। इसी क्रम में युवा संस्कृतिकर्मी आशीष रंगा ने कहा कि कबीर संत तो थे ही साथ ही उन्होने मध्यकालीक भारत में भक्ति आदांेलन का नेतृत्व किया। यह उनका महत्वपूर्ण योगदान था।
इस महत्वपूर्ण परिसंवाद में कवि पुनीत कुमार रंगा ने उनके कई दोहों का वाचन करते हुए यह साफ तौर पर कहा कि इनमें आज के वर्तमान की झलक साफ दिखाई देती है। यह आज भी प्रासंगिक है।
परिसंवाद का संयोजन युवा कवि गिरिराज पारीक ने करते हुए कबीर के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। अंत में सभी का आभार अशोक शर्मा ने ज्ञापित किया।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor