” छोटी-छोटी खुशियों” से जीवन बेहतर हो सकता है — यही सोच प्रेरणा बनी । कुछ सदस्यों ने स्वंय देखा कि बच्चों के पास किताबें नहीं , अच्छे कपड़े नहीं , कोई जागरूक नहीं है , नियमित उपचार नहीं हो पाता — इस तरह की समस्याओं से प्रभावित होकर सोसायटी की शुरुआत हुई : आरिफ खान
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
स्प्रेड स्माइल सोसायटी शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, कौशल प्रशिक्षण और विभिन्न क्ष्रेत्रों में कार्य कर रही है। सोसाइटी का ध्येय समाज में वंचित वर्ग के बच्चों के विकास में याेगदान करना है। संस्था के अध्यक्ष आरिफ खान से राइजिंग भास्कर ने लंबी बातचीत की। यहां प्रस्तुत है संपादित अंश-
1. “स्प्रेड स्माइल सोसायटी” की स्थापना की प्रेरणा कहां से मिली ? इस यात्रा की शुरुआत कैसे हुई ?
लोगों की ज़रूरतों को सीधे देखकर यह महसूस हुआ कि शिक्षा , स्वास्थ्य , पर्यावरण, पोषण जैसी बुनियादी चीज़ें भी कई जगह नहीं पहुँच पाती हैं । इस असमर्थता को देखते हुए , “छोटी-छोटी खुशियों” से जीवन बेहतर हो सकता है — यही सोच प्रेरणा बनी । कुछ सदस्यों ने स्वंय देखा कि बच्चों के पास किताबें नहीं , अच्छे कपड़े नहीं , कोई जागरूक नहीं है , नियमित उपचार नहीं हो पाता — इस तरह की समस्याओं से प्रभावित होकर सोसायटी की शुरुआत हुई ।
2. संस्था का नाम “स्प्रेड स्माइल” — इस नाम के पीछे क्या सोच और भावना रही ?
मुस्कान एक सार्वभौमिक भाषा है । मुस्कान में उम्मीद होती है , सहानुभूति होती है , एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत होती है । नाम इस भावना को दर्शाता है कि लक्ष्य सिर्फ मदद करना नहीं , बल्कि ऐसा माहौल बनाना है कि लोग आत्म-सम्मान और खुशी महसूस करें । मुस्कान इस बात की निशानी हो कि जीवन में गरिमा बनी है ।
3. जब आपने यह सोसायटी शुरू की थी, तब आपके सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या थी और आपने उसे कैसे पार किया ?
शुरुआती चरण में सबसे बड़ी चुनौतियाँ थीं — विश्वसनीयता बनने की, संसाधन जुटाने की , ज़रूरतमंदों तक पहुँच बनाने की । अक्सर लोगों को यह भरोसा देना पड़ता है कि आपकी सहायता सचमुच उन्हें मिलेगी । साथ ही , स्थानीय समुदायों का समर्थन और सहभागिता दिलाना मुश्किल था । इन चुनौतियों को पार करने के लिए नियमित रिपोर्टिंग , पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन , स्थानीय स्वयंसेवकों को शामिल करना और छोटी-छोटी सफलताओं को दिखाने की रणनीति अपनाएँगे ।
4. शिक्षा , स्वास्थ्य , सुरक्षा और अवसर — ये चारों क्षेत्र बहुत व्यापक हैं । संस्था इन सब पर संतुलन कैसे बनाती है ?
प्राथमिकता निर्धारण — सबसे ज़रूरी और ज़मीनी समस्याएँ पहले देखी जाती हैं उदा. बच्चों की स्कूल सामग्री , पौष्टिक भोजन , प्राथमिक स्वास्थ्य जांच प्रोजेक्ट विभाजन — हर क्षेत्र के लिए अलग-अलग पहल होती हैं शिक्षा-कार्य , स्वास्थ्य-कैम्प , महिला सुरक्षा या आत्म-निर्भरता के अवसर आदि । स्थानीय जरूरतों के अनुसार अनुकूलन — हर क्षेत्र में काम करते समय स्थानीय समुदाय की राय ली जाती है कि क्या ज़रूरत है , क्या काम करेगा । समय व संसाधनों का संचयन — संसाधन सीमित हैं , इसलिए काम की लंबी अवधि में प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए योजना बनायी जाती है कि कहाँ निवेश ज़्यादा असर करेगा ।
5. आज के दौर में “गरिमा और अवसरों से भरे जीवन” का वास्तविक अर्थ क्या है ?
गरिमापूर्ण जीवन का मतलब है कि व्यक्ति को अपने मूल अधिकार-जैसे कि शिक्षा , स्वास्थ्य , न्याय और सामाजिक सम्मान-प्राप्त हों । उसे यह महसूस हो कि वह समाज का हिस्सा है , उसकी आवाज़ मायने रखती है , और वह आत्म-निर्भर हो सकता है । अवसर-भरा जीवन वह है जिसमें किसी को अपनी क्षमताओं को विकसित करने , अपनी पसंद से निर्णय लेने , और अपने और अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य बनाने का मौका मिले।
6. संस्था के माध्यम से अब तक कितने लोगों तक पहुंच बनाई गई है और कौन सी उपलब्धि सबसे अधिक गर्व से भर देती है ?
संस्था ने शिक्षा , स्वास्थ्य , पोषण , महिला सशक्तिकरण आदि परियोजनाओं के ज़रिए अनेक लोगों तक पहुँच बनाई है । उदाहरण के लिए, मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम, स्वच्छता, पर्यावरण और स्वास्थ्य के बीच संवेदनशीलता बढ़ाना, कोई भूखा न सोये के तहत खाना खिलाना, कपडे देना, शिक्षा-संबंधी कार्यक्रमों में कई बच्चों को स्कूल सामग्री दी गयी, स्वास्थ्य व पोषण-कैम्प आयोजित हुए, गर्व की बात शायद यह होगी कि कितने बच्चे जिन्हें स्कूल जाना भी संभव नहीं था , उन्हें पढ़ाई का अवसर मिला, या किसी के चेहरे मुस्कान बने।
7. समाज के वंचित वर्ग तक पहुंच बनाना आसान नहीं होता — आपकी टीम यह सुनिश्चित कैसे करती है कि सहायता सही जरूरतमंदों तक पहुंचे ?
स्थानीय स्वयंसेवकों और समुदायों से संपर्क रखकर , उनकी ज़रूरतों को सुना जाता है । ज़रूरतों का सर्वे किया जाता है — कौन-से घर , कौन-से व्यक्तिगत मामले ज़्यादा प्रभावित हैं । पारदर्शिता — सहायता वितरित करने से पहले सूची बनायी जाती है , और बाद में रिपोर्ट तैयार की जाती है कि कितने लाभार्थी हुए । निगरानी और फीडबैक — लाभार्थियों से फीडबैक लिया जाता है कि सहायता उन्हें मिली या नहीं , क्या समस्या आयी ।
8. शिक्षा के क्षेत्र में आपने कौन-कौन सी अभिनव पहलें की हैं जिनसे बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव आया ?
“स्कूल चले हम” जैसे प्रोग्राम जहाँ आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को किताबें , स्टेशनरी , स्कूल यूनिफॉर्म आदि दी जाती है और जागरूकता कार्यक्रम ।
9. स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में स्प्रेड स्माइल सोसायटी किन प्रमुख अभियानों या प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है ?
स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम Wellness camps , health check-ups आयोजित किये जा रहे हैं ।
पोषण Nutrition सेवाएँ — विशेषकर बच्चों के लिए , और ज़रूरतमंदों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की पहल । स्वच्छता , पर्यावरण और स्वास्थ्य के बीच संवेदनशीलता बढ़ाना ।
10. आपने महिला सुरक्षा या आत्मनिर्भरता से जुड़े कौन से कार्यक्रम शुरू किए हैं? क्या कुछ सफलता की कहानियां साझा करेंगे?
महिला सुरक्षा या आत्मनिर्भरता से जुड़े कार्यक्रम और कुछ सफलता की कहानियाँ “हुनर से रोजगार” जैसे कौशल विकास कार्यक्रम जहाँ महिलाओं को सिलाई-कुर्तन , अन्य व्यावसायिक कौशल सिखाये जाते हैं । महिलाओं की शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम , सामाजिक सम्मान और अधिकारों की जानकारी प्रदान करना।
11. संस्था के कार्यों में युवाओं की भागीदारी कैसी है ? क्या आप उन्हें समाजसेवा की ओर प्रेरित करने के लिए विशेष पहल करते हैं ?
बहुत से युवा स्वयंसेवक हैं — पढ़ाई-लिखाई के साथ-संग समय निकाल कर, कार्यक्रमों में भाग लेते हैं । युवाओं को नेतृत्व में मौका दिया जाता है — उन्हें प्रोजेक्ट संचालन, आयोजनों की योजना बनाने आदि में शामिल किया जाता है । प्रेरित करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम , सोशल मीडिया अभियानों और स्थानीय स्कूल/कॉलेजों में मीट-अप्स आयोजित की जाती हैं ।
12. दान और संसाधनों की चुनौतियों से निपटने के लिए संस्था कौन-सी रणनीतियाँ अपनाती है ?
• नियमित दाताओं और स्थानीय समर्थकों से साझेदारी यूनिट-प्रायोजक sponsor कार्यक्रम स्थापित करना ।
• ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स , सोशल मीडिया , फ़ंडरेज़िंग इवेंट्स , जागरूकता अभियानों के माध्यम से निधि जुटाना ।
• पारदर्शिता रख कर , यह दिखाना कि हर पैसा कहाँ खर्च हो रहा है , जिससे दाताओं का विश्वास बढ़े ।
• स्वयं-सेवकों की भूमिका बढ़ाना ताकि मानव संसाधन सीमित होने पर भी काम संभव हो सके ।
13. आपने अपने कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए कौन से कदम उठाए हैं?
• कानूनी पंजीकरण संस्थान कानूनन पंजीकृत है , आयकर विभाग 12AB आदि के द्वारा मान्यता प्राप्त है ।
• नियमित लेखा-जोखा , वित्तीय रिपोर्ट , दान उपयोग की रिपोर्टिंग । • Darpan ID आदि के माध्यम से सरकार और नागरिकों के बीच ट्रांसपेरेंसी ।
• सार्वजनिक संवाद और फीडबैक-प्रक्रिया लाभार्थियों और समुदाय से यह पूछा जाता है कि सेवा से क्या लाभ हुआ , क्या समस्याएँ आई ।
14. स्थानीय समुदायों और सरकारी एजेंसियों के साथ संस्था का सहयोग किस तरह का है?
स्थानीय समुदायों से जुड़ाव: स्थानीय स्वयंसेवक, ग्रामीणों या वार्ड-स्तर के लोगों की भागीदारी। समुदाय की ज़रूरतों को समझना।
सरकारी योजनाओं और नीतियों के साथ तालमेल: स्वच्छ भारत अभियान, पेयजल, प्राथमिक स्वास्थ्य योजनाएँ आदि से जुड़ना। सरकारी एजेंसियों से सहायता (अनुमति, संसाधन, सामुदायिक केंद्र आदि) लेना और सामाजिक कल्याण विभागों के कार्यक्रमों को लागू करना।
15. तकनीक के बढ़ते युग में आप डिजिटल माध्यमों का उपयोग समाजसेवा के विस्तार के लिए कैसे कर रहे हैं?
• सोशल मीडिया फेसबुक , इंस्टाग्राम , व्हाट्सप्प के माध्यम से जागरूकता व अभियान चलाना ।
• ऑनलाइन दान प्लेटफार्म , डिजिटल बैंकिंग , UPI/QR कोड द्वारा दान लेना ।
• ई-रिपोर्टिंग , फ़ोटो-वीडियो प्रारूप में प्रगति दिखाना , लाभार्थियों के अनुभव साझा करना ताकि दानदाता और समुदाय जुड़े रहें ।
• संभव हो तो ऐप या वेबसाइट के ज़रिए स्वयंसेवकों को जोड़ना , कार्यक्रमों का प्रबंधन करना ।
16. आपके अनुसार , समाज में स्थायी बदलाव लाने के लिए सबसे जरूरी तत्व क्या है — नीति , भागीदारी या मानसिकता में बदलाव ?
सभी तीनों आवश्यक हैं , लेकिन मानसिकता में बदलाव सबसे आधारभूत है जब लोगों की सोच बदलती है , तब नीति और भागीदारी का असर असली बनता है । नीति अगर मजबूत नहीं हो , तो कमज़ोर कार्रवाई होती है,भागीदारी होनी चाहिए ताकि लोगों को लगे कि यह उनका भी काम है — तभी यह लगातार बनी रहती है ।
17. संस्था की अब तक की यात्रा में कोई ऐसा पल रहा जब आपको लगा कि “हां , हमारा प्रयास सार्थक दिशा में जा रहा है” ?
हाँ — जब बच्चों स्कूल जाना नियमित हुआ , स्वच्छता,पर्यावरण और स्वास्थ्य के बीच संवेदनशीलता बढ़ाना,कोई भूखा न सोये के तहत खाना खिलाना,कपडे देना, मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम, जब महिलाएँ कौशल सीख कर आत्मनिर्भर, या जब किसी गाँव में स्वास्थ्य कैंप ने लोगों की जान बचायी — ऐसे क्षण महसूस होते हैं कि प्रयास सफल है । — यह सब प्रेरणादायक पल होते हैं ।
18. आने वाले वर्षों में स्प्रेड स्माइल सोसायटी की प्राथमिकताएं और दीर्घकालिक योजनाएं क्या हैं ?
• पर्यावरणीय पहलें बढ़ाना , स्वच्छता , पेयजल , हरित initiatives बढ़ाना ।
• शिक्षा को और विस्तार देना — और ज़्यादा बच्चों को स्कूलों से जोड़ना , गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना ।
• स्वास्थ्य और पोषण कार्यक्रमों का विस्तार — विशेषकर दूरदराज क्षेत्रों में ।
• महिलाओं के लिए स्वावलंबन के अवसर बढ़ाना — कौशल प्रशिक्षण , स्वरोजगार प्रोजेक्ट्स ।
• डिजिटल पहुँच सुधारना — डिजिटल साक्षरता , ऑनलाइन संसाधनों की मदद से समाज सेवा की पहुँच बढ़ाना ।
19. जो लोग समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं लेकिन शुरुआत नहीं कर पा रहे — उन्हें क्या संदेश देंगे ?
शुरुआत में छोटे-छोटे कदम भी बहुत मायने रखते हैं । हर एक छोटी सेवा से बदलाव होता है । डरें नहीं कि संसाधन कम हैं — अगर दिल हो तो रास्ता हो जाएगा । भरोसा रखें कि आपकी ईमानदारी और मेहनत किसी के जीवन में फर्क लायेगी । स्वयंसेवक बनें , समय दें , संसाधन साझा करें — हर तरह की भागीदारी महत्व रखती है ।
20. अंत में , “स्प्रेड स्माइल” के जरिए आप समाज में कैसी मुस्कान फैलाना चाहते हैं — आपकी सबसे बड़ी प्रेरणा क्या है ?
हम एक ऐसी मुस्कान चाहते हैं जो सिर्फ ज़ाहिर न हो बल्कि अंदर-से हो — आत्म-सम्मान , आज़ादी , उम्मीद से भरी हो । जब एक बच्चा सोच सके कि उसका भविष्य उज्जवल है , एक महिला महसूस करे कि उसकी मेहनत मायने रखती है , एक परिवार को लगे कि उसकी आवाज़ सुनी जा रही है — ऐसी मुस्कान । मेरी प्रेरणा है कि हर व्यक्ति को यह अनुभव हो कि वह सम्मानित है , कि उसके पास अवसर हैं , और कि समाज उसकी मदद के लिए उसके साथ है ।
ऐसे कर सकते हैं संस्था को सहयोग :
• बैंक खाता :
खाता नाम: Spread Smile Society
खाता संख्या: 10112024385
बैंक: IDFC First Bank, शाखा: नांदड़ी, Jodhpur
IFSC: IDFB0042483 (Spread Smile Society)













